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पुल ध्वस्त, छह गांवों का संपर्क टूटा

Sat, 05 Dec 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई Updated Sat, 05 Dec 2015 11:26 PM IST
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The bridge collapsed , falling in six villages
छह गांवों को जोड़ने वाला हमीरपुर शाख की नहर का ब्रिटिश कालीन पुल नंबर 39
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शुक्रवार की देर रात ध्वस्त हो गया। ओवरलोड वाहनों के चलते पुल ध्वस्त हो गया। इससे क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों का आवागमन ठप हो गया है। क्षेत्रीय जनता में इसे लेकर खासा आक्रोश है।

आधा दर्जन गांवों को जोड़ने वाला लगभग 60 साल पुराना हमीरपुर शाख का पुल नंबर 39 करीब 11 साल से जर्जर था। इसे क्षेत्रीय लोगों ने बांस, बल्ली, मिट्टी की बोरियों आदि के जरिए किसी तरह बचा रखा था। उधर, रोक के बावजूद इस पर से लगातार ओवरलोड वाहन गुजरते रहे। अंतत: यह पुल शुक्रवार रात ओवरलोडिंग के चलते जवाब दे गया। इस दौरान

नहर पर बने इस पुल के बड़े-बड़े पीपे पानी में बह गए। पुल का आधे से ज्यादा हिस्सा ध्वस्त होने से पुल की चौड़ाई लगभग पांच फुट ही बची है। इसी पुल से क्षेत्र के किसान जान का जोखिम उठाकर अपने वाहन यहां से निकाल रहे हैं। वहीं क्षेत्र के छह गांवों के बाशिंदों का शहर से संपर्क टूट गया है। इससे क्षेत्रीय लोगों में ओवरलोड वाहन संचालकों के खिलाफ भारी आक्रोश है।

देर रात पुल टूटने से कई लोगों को सड़क किनारे पूरी रात गुजारनी पड़ी। सुबह होते ही किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष बृजेश राजपूत पुल पर पहुंचे। इस दौरान ऐरी, रमपुरा, हैदलपुर, सिमिरिया, गुढ़ा, बंधौली के ग्रामीण एकत्रित हो गए और ओवरलोड वाहन संचालकों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। जिला प्रशासन को भी खूब खरीखोटी सुनाते हुए जल्द ही पुल का

पुनर्निर्माण की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पुल का निर्माण नहीं किया गया तो क्षेत्रीय लोग आंदोलन को मजबूर होंगे।
 
आधा दर्जन गांवों के वासिंदों को शहर पहुंचने में करनी होगी मशक्कत
पुल टूटने से गांव सिमिरिया, गुढ़ा, बन्धौली, ऐरी, रमपुरा एवं हैदलपुर के सरकारी विद्यालयों में उरई से जाने वाले अध्यापकों के लिए संकट हो गया है। इसी तरह ग्रामीणांचलों से शहर में पढ़ने जाने वाले छात्र/छात्राओं को भी बड़ी मशक्कत करते हुए शहर तक पहुंचना होगा।

कई एकड़ खेती होगी पानी से वंचित
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पुल ध्वस्त होने से उन लोगों की सैकड़ों एकड़ खेती की भूमि पानी से वंचित हो सकती है। इनका कहना है कि खेती ऊंचाई वाले इलाके में होने से वे इसी पुल पर आड़ा बंधा डालकर पलेवा करते थे। अब उनके सामने खेतों की सिंचाई का नया संकट खड़ा हो गया है।

ये है मामला
दरअसल, इस रूट से मौरंग माफिया अपने वाहनों को गैरकानूनी तौर पर ले जाते हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार इन्हीं वाहनों के चलते यह पुल ध्वस्त हो गया है।
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