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Jalaun News: तत्कालीन चौकी इंचार्ज के खिलाफ डकैती कोर्ट से समन जारी
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अदालत से
वादी व गवाहों के बयान के बाद न्यायालय ने लिया संज्ञान, 16 जुलाई को अगली सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। रामपुरा क्षेत्र के ग्राम हुसेपुरा जागीर निवासी श्यामजी उर्फ वकील द्वारा तत्कालीन चौकी इंचार्ज जगम्मनपुर अटल बिहारी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के मामले में न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। वादी की ओर से थाने में रिपोर्ट दर्ज न होने पर डकैती न्यायालय में वाद दायर किया गया था। वादी और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद न्यायालय ने मामले में संज्ञान लेते हुए तत्कालीन चौकी इंचार्ज के खिलाफ समन जारी किए हैं।
वादी श्यामजी का आरोप है कि वर्ष 2021 में खरीदे गए एक प्लॉट को लेकर चल रहे विवाद में विपक्षी पक्ष के प्रभाव में आकर पुलिस ने उनके और उनके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। उनका कहना है कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने बिना पर्याप्त साक्ष्यों के उनकी बाइक चौकी में खड़ी करा ली और उन्हें जेल भेज दिया। इतना ही नहीं, जेल से छूटने के बाद दोबारा घर से उठाकर चौकी ले जाया गया व उनका मोबाइल फोन अपने कब्जे में रख लिया गया।
पीड़ित ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि चौकी इंचार्ज द्वारा उन्हें और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां भी दी गईं। मामले में कई ग्रामीणों ने स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए न्यायालय के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए हैं। वादी का कहना है कि उन्होंने थाना रामपुरा समेत पुलिस के उच्चाधिकारियों से कई बार शिकायत की लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और न ही उनका मोबाइल फोन तथा बाइक वापस किया गया।
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न्यायालय ने वादी और गवाहों के बयानों के आधार पर संज्ञान लेते हुए संबंधित चौकी इंचार्ज के खिलाफ समन जारी कर दिए हैं। हालांकि सूत्रों के अनुसार अभी तक समन तामील नहीं हो सफा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित है।
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वादी व गवाहों के बयान के बाद न्यायालय ने लिया संज्ञान, 16 जुलाई को अगली सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। रामपुरा क्षेत्र के ग्राम हुसेपुरा जागीर निवासी श्यामजी उर्फ वकील द्वारा तत्कालीन चौकी इंचार्ज जगम्मनपुर अटल बिहारी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के मामले में न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। वादी की ओर से थाने में रिपोर्ट दर्ज न होने पर डकैती न्यायालय में वाद दायर किया गया था। वादी और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद न्यायालय ने मामले में संज्ञान लेते हुए तत्कालीन चौकी इंचार्ज के खिलाफ समन जारी किए हैं।
वादी श्यामजी का आरोप है कि वर्ष 2021 में खरीदे गए एक प्लॉट को लेकर चल रहे विवाद में विपक्षी पक्ष के प्रभाव में आकर पुलिस ने उनके और उनके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। उनका कहना है कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने बिना पर्याप्त साक्ष्यों के उनकी बाइक चौकी में खड़ी करा ली और उन्हें जेल भेज दिया। इतना ही नहीं, जेल से छूटने के बाद दोबारा घर से उठाकर चौकी ले जाया गया व उनका मोबाइल फोन अपने कब्जे में रख लिया गया।
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पीड़ित ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि चौकी इंचार्ज द्वारा उन्हें और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां भी दी गईं। मामले में कई ग्रामीणों ने स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए न्यायालय के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए हैं। वादी का कहना है कि उन्होंने थाना रामपुरा समेत पुलिस के उच्चाधिकारियों से कई बार शिकायत की लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और न ही उनका मोबाइल फोन तथा बाइक वापस किया गया।
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न्यायालय ने वादी और गवाहों के बयानों के आधार पर संज्ञान लेते हुए संबंधित चौकी इंचार्ज के खिलाफ समन जारी कर दिए हैं। हालांकि सूत्रों के अनुसार अभी तक समन तामील नहीं हो सफा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित है।