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पलायन रोकें, मिले 150 दिन काम

Tue, 12 Jan 2016 11:00 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई Updated Tue, 12 Jan 2016 11:00 PM IST
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Stop the exodus , received 150 working days
जनपद में सूखा के हालात हैं। ऐसे में शासन ने मजदूरों का पलायन रोकने के
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लिए 150 दिन मजदूरी का आदेश जारी किया है। हर गांव में मजदूर को काम मिले और समय से उसका भुगतान हो। इससे उसको अपनी जीविका चलाने में र्कोई परेशानी न उठाना पड़े। नव निर्वाचित प्रधान अपने गांव की तीन प्रमुख समस्याओं को चिह्नित करके बताएं। इससे उनको

दूर किया जा सके। प्रधान व रोजगार सेवक आपस में तालमेल बनाकर काम करें। तीन माह तक प्रधान काम करें और फिर रोजगार सेवकों की रिपोर्ट दें। यह बात मनरेगा कार्यक्रम सम्मेलन में अधिकारियों ने कही। डीएम रामगणेश ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर गांव में मनरेगा से काम चालू रहे, कहीं काम बंद मिला तो कार्रवाई की जाएगी। शहर के तुलसी धाम के

सभाहाल में आयोजित सम्मेलन में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की  योजनाओं को गति दी जाए। गांव में जाब कार्डधारक को 150 दिन काम दिया जाए ताकि सूखे के हालात में वह पलायन न करें। जिले के सभी 575 ग्राम पंचायतों में काम कराया जाए। मनरेगा का जो 60:40 का अनुपात है, वह बना रहे। लेबर बजट के मुताबिक काम किया जाए।

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने कहा कि प्रधान व रोजगार सेवक आपस में तालमेल बनाकर काम करें। अगर कोई रोजगार सेवक काम में सहयोग नहीं कर रहा तो उसकी सूचना प्रधान दें जिससे उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा सके। सभी प्रधान वर्ष 2016-17 का लेबर बजट तैयार करके प्रस्तुत करें। शौचालय, इंदिरा आवास, लोहिया आवास

एवं अन्य विकास कार्यो को तेजी के साथ पूरा कराया जाए। प्रधान अपने गांव की तीन समस्याओं को चिंहित करें जिससे उनको दूर कराया जा सके।  डीपीआरओ मोहम्मद सरफराज आलम, मनरेगा उपायुक्त पीएस चंद्रोल के अलावा खंड विकास अधिकारी एवं अन्य अधिकारी और प्रधान महासंघ के जिलाध्यक्ष अमित द्विवेदी इतिहास, रामशरण दुहौलियां, रामू गुर्जर,

रविंद्र याज्ञिक, श्रीपाल राठौर, सीमा तिवारी, जितेंद्र, माधुरी, राकेश यादव, अशोक यादव, अरविंद द्विेदी, संजय कुमार, रज्जन सिंह, लोकेंद्र तिवारी समेत बड़ी संख्या में प्रधान मौजूद रहे।

अमर उजाला ने भी उठाई समस्या
जिले में सूखे के हालात से परेशान होकर मजदूर पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसको लेकर 12 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने भी समाचार प्रकाशित कर समस्या उठाई है। बताते चलें कि मनरेगा लागू होने के बाद भी लोगों को गांव में काम नहीं मिल पा रहा है और काम मिल भी गया तो उसके भुगतान के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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