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तहसील में नहीं मिल रहे स्टाम्प, रजिस्ट्री व शपथ पत्र के लिए भटक रहे लोग
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्टांप वेंडर उमेश
- फोटो : ORAI
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कोंच (जालौन)। शासन के निर्देश पर स्टांप खरीदने की नई व्यवस्था से तहसील में छोटे बड़े स्टांपों की भारी किल्लत हो गई है, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नई व्यवस्था के अनुसार अब स्टांप तहसील के उप कोषागार से स्टांप वेंडरों को उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं बल्कि रोकड़िया व खजांची के माध्यम से दिए जा रहे है। वहीं कोंच में उपकोषागार में खजांची का पद काफी समय से खाली चल रहा है, जिससे तहसील के लोगों को स्टांप लेने के लिए उरई तक भागना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि सरकार ने 17 दिसंबर को एक शासनादेश जारी किया है, जिसके मुताबिक जिन उप कोषागारों में डिप्टी ट्रेजरार या रोकड़िया/ खजांची तैनात नहीं हैं वहां के उप कोषागार में ट्रेजरी से स्टांप नहीं भेजे जाएंगे। दरअसल, शासन बदायूं के दातागंज के करोड़ों के स्टांप घोटाले के बाद से प्रशासन सतर्क हुआ है और शासन स्तर से यह नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। पिछले सप्ताह जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने सभी स्टांप को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
निर्देश के बाद जिले के सभी उप कोषागारों में स्टांप की सीधी टेंडरों से बिक्री को बंद कर दिया है। वेंडरों को स्टांप न मिलने से तहसील में स्टांप के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। इसमें रजिस्ट्री कराने वालों से लेकर छोटे छोटे स्टांप खरीदने वालों को दिक्कत हो रही है। कोंच में स्टांप न मिलने से लोगों को जिला मुख्यालय तक भागना पड़ रहा है। वरिष्ठ कोषाधिकारी आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि शासन के नए आदेश के मुताबिक वह कोंच स्टांप नहीं भेज सकते हैं क्योंकि वहां डिप्टी ट्रेजरार नहीं है। स्टांप वेंडर अपनी डिमांड लगा कर उरई कोषागार से स्टांप ले जा सकते हैं।
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शपथ पत्र बनवाने वालों को हो रही परेशानी
तहसील में स्टांप न सबसे ज्यादा दिक्कतें शपथ पत्र बनवाने वालों को हो रही है। बता दें कि आवास योजना से लेकर लगभग सभी सरकारी योजनाओं में 10 रुपये के स्टांप के शपथ पत्र अनिवार्य हैं इसके साथ ही दावा, नकल इकरारनामा आदि में शपथ पत्र लगता है। लोगों को 10 रुपये का स्टांप लेने के लिए मुख्यालय तक आना पड़ रहा है। वहीं शपथ पत्र न बनने से वह कई योजनाओं के फार्म नहीं भर पा रहे है।
रिक्त चल रहा पद, बढ़ी और मुसीबतें
कोंच उपकोषागार में लंबे समय से ये पद खाली हैं, जिस वजह से और दिक्कतें हो रही हैं। बता दें कि यहां एक सहायक लेखाकार अर्जुन कनौजिया की तैनाती थी, जिसके सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा था, लेकिन हाल ही में उनकी ड्यूटी उरई लगा दिए जाने से यहां के उप कोषागार में ताले पड़ गए हैं। जिससे परेशानी और बढ़ गई है और लोगों को हाल ही में इस परेशानी का कोई हल नजर नहीं आ रहा है।
नगदी लेकर मुख्यालय जाना जोखिम भरा
कोंच। स्टांप की भारी किल्लत को लेकर बारसंघ अध्यक्ष नवलकिशोर जाटव कहना है कि लोगों को नगदी लेकर स्टांप लेने के लिए उरई जाना पड़ रहा है जिससे जान माल का जोखिम तो है ही, लोगों का अनावश्यक पैसा और समय भी बर्बाद हो रहा है। उन्होंने शासन से अपेक्षा जताई है कि कोंच उप कोषागार में अधिकारी की तैनाती की जाए ताकि लोगों को यहीं स्टांप उपलब्ध हो सकें।
वेंडरों की रोजी रोटी प्रभावित
कोंच। कोंच उप कोषागार के बंद होने का सीधा असर यहां काम कर रहे स्टांप वेंडरों पर पड़ा है। कोंच में 26 स्टांप वेंडर्स हैं जिनके सामने रोजी कमाने की समस्या खड़ी हो गई है। स्टांप वेंडर उमेश का कहना है कि उन्हें अपनी डिमांड लगाने के लिए अब उरई जाना पड़ेगा जिसमें पूरा दिन बर्बाद होगा तथा पैसा भी खर्च होगा। उनका मानना है कि सरकार की नई व्यवस्था से उन वेंडर्स की रोजी रोटी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
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गौरतलब है कि सरकार ने 17 दिसंबर को एक शासनादेश जारी किया है, जिसके मुताबिक जिन उप कोषागारों में डिप्टी ट्रेजरार या रोकड़िया/ खजांची तैनात नहीं हैं वहां के उप कोषागार में ट्रेजरी से स्टांप नहीं भेजे जाएंगे। दरअसल, शासन बदायूं के दातागंज के करोड़ों के स्टांप घोटाले के बाद से प्रशासन सतर्क हुआ है और शासन स्तर से यह नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। पिछले सप्ताह जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने सभी स्टांप को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
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निर्देश के बाद जिले के सभी उप कोषागारों में स्टांप की सीधी टेंडरों से बिक्री को बंद कर दिया है। वेंडरों को स्टांप न मिलने से तहसील में स्टांप के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। इसमें रजिस्ट्री कराने वालों से लेकर छोटे छोटे स्टांप खरीदने वालों को दिक्कत हो रही है। कोंच में स्टांप न मिलने से लोगों को जिला मुख्यालय तक भागना पड़ रहा है। वरिष्ठ कोषाधिकारी आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि शासन के नए आदेश के मुताबिक वह कोंच स्टांप नहीं भेज सकते हैं क्योंकि वहां डिप्टी ट्रेजरार नहीं है। स्टांप वेंडर अपनी डिमांड लगा कर उरई कोषागार से स्टांप ले जा सकते हैं।
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शपथ पत्र बनवाने वालों को हो रही परेशानी
तहसील में स्टांप न सबसे ज्यादा दिक्कतें शपथ पत्र बनवाने वालों को हो रही है। बता दें कि आवास योजना से लेकर लगभग सभी सरकारी योजनाओं में 10 रुपये के स्टांप के शपथ पत्र अनिवार्य हैं इसके साथ ही दावा, नकल इकरारनामा आदि में शपथ पत्र लगता है। लोगों को 10 रुपये का स्टांप लेने के लिए मुख्यालय तक आना पड़ रहा है। वहीं शपथ पत्र न बनने से वह कई योजनाओं के फार्म नहीं भर पा रहे है।
रिक्त चल रहा पद, बढ़ी और मुसीबतें
कोंच उपकोषागार में लंबे समय से ये पद खाली हैं, जिस वजह से और दिक्कतें हो रही हैं। बता दें कि यहां एक सहायक लेखाकार अर्जुन कनौजिया की तैनाती थी, जिसके सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा था, लेकिन हाल ही में उनकी ड्यूटी उरई लगा दिए जाने से यहां के उप कोषागार में ताले पड़ गए हैं। जिससे परेशानी और बढ़ गई है और लोगों को हाल ही में इस परेशानी का कोई हल नजर नहीं आ रहा है।
नगदी लेकर मुख्यालय जाना जोखिम भरा
कोंच। स्टांप की भारी किल्लत को लेकर बारसंघ अध्यक्ष नवलकिशोर जाटव कहना है कि लोगों को नगदी लेकर स्टांप लेने के लिए उरई जाना पड़ रहा है जिससे जान माल का जोखिम तो है ही, लोगों का अनावश्यक पैसा और समय भी बर्बाद हो रहा है। उन्होंने शासन से अपेक्षा जताई है कि कोंच उप कोषागार में अधिकारी की तैनाती की जाए ताकि लोगों को यहीं स्टांप उपलब्ध हो सकें।
वेंडरों की रोजी रोटी प्रभावित
कोंच। कोंच उप कोषागार के बंद होने का सीधा असर यहां काम कर रहे स्टांप वेंडरों पर पड़ा है। कोंच में 26 स्टांप वेंडर्स हैं जिनके सामने रोजी कमाने की समस्या खड़ी हो गई है। स्टांप वेंडर उमेश का कहना है कि उन्हें अपनी डिमांड लगाने के लिए अब उरई जाना पड़ेगा जिसमें पूरा दिन बर्बाद होगा तथा पैसा भी खर्च होगा। उनका मानना है कि सरकार की नई व्यवस्था से उन वेंडर्स की रोजी रोटी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

ताला बंद कोच का उप कोषागार- फोटो : ORAI

वेंडर के पास स्टांप लेने के लिए खड़े लोग- फोटो : ORAI

बार संघ अध्यक्ष नवल किशोर जाटव- फोटो : ORAI