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Jalaun News: पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के बेटे को मिली अंतरिम जमानतं

Sat, 13 Jun 2026 01:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2026 01:33 AM IST
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Son of former District Panchayat President granted interim bail.
उरई । कोंच स्थित आशीर्वाद होटल में कुक की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन के पुत्र हिमांशु निरंजन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विशेष एससी-एसटी न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। शुक्रवार को न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई न हो पाने के कारण आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी गई। मामले की अगली सुनवाई और जमानत अर्जी पर विचार के लिए 22 जून की तिथि निर्धारित की गई है। वहीं न्यायालय ने मामले में क्षेत्राधिकारी (सीओ) को भी तलब किया है।
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कोंच कोतवाली क्षेत्र स्थित आशीर्वाद होटल में कार्यरत एक कुक की हत्या के मामले में हिमांशु निरंजन के विरुद्ध हत्या सहित एससी-एसटी एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, लेकिन बाद में ट्रायल कोर्ट से उसे जमानत मिल गई थी।
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हालांकि पीड़ित पक्ष की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ के न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 14 नवंबर 2025 को पारित जमानत आदेश को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि एससी-एसटी एक्ट के मामलों में पीड़ित पक्ष को सूचना और सुनवाई का अवसर दिए बिना आरोपी को राहत देना कानून के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन है।
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अपीलकर्ता नंदनी देवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि एससी-एसटी एक्ट की धारा 15ए(3) एवं 15ए(5) के तहत पीड़ित अथवा उसके आश्रितों को प्रत्येक महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यवाही की सूचना देना और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट में जमानत सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया।

न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित निर्णय हरिराम भांभी बनाम सत्यानारायण एवं अन्य का हवाला देते हुए कहा था कि पीड़ित पक्ष को सूचना दिए बिना पारित आदेश विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का जमानत आदेश निरस्त करते हुए सभी पक्षों को सुनने के बाद नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे।

धाराएं हटाने को लेकर उठा था विवाद

मामले की विवेचना के दौरान आरोपों की गंभीरता और लागू धाराओं को लेकर भी विवाद सामने आया था। न्यायिक हिरासत के समय रिमांड आदेश में कुछ धाराओं का उल्लेख नहीं हो पाया था। बाद में कोंच क्षेत्राधिकारी ने न्यायालय में आवेदन देकर संबंधित धाराओं में रिमांड स्वीकृत कराया। इसके बाद 14 नवंबर 2025 को क्षेत्राधिकारी की ओर से ट्रायल कोर्ट में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कहा गया कि सीसीटीवी फुटेज और विवेचना के आधार पर आरोपी के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट एवं अन्य गंभीर धाराओं के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने कुछ गंभीर धाराएं हटाते हुए आरोपी को अन्य धाराओं में जमानत प्रदान कर दी थी।


हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब आरोपी हिमांशु निरंजन ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। विशेष एससी-एसटी न्यायालय में 22 जून को जमानत अर्जी पर सुनवाई होगी। मामले में न्यायालय द्वारा क्षेत्राधिकारी को तलब किए जाने के बाद यह सुनवाई और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब पीड़ित पक्ष, आरोपी पक्ष और प्रशासन समेत सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
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