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Jalaun News: कहीं लटक रहा ताला, कहीं फार्मासिस्ट चला रहे आयुर्वेदिक अस्पताल
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उरई। जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों की दशा खराब है। कहीं डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं फार्मासिस्ट अस्पताल चला रहे। कहीं डॉक्टर है तो वह समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे। इससे मरीजों को अस्पतालों का लाभ नहीं मिल रहा। जिले के कई आयुर्वेदिक अस्पतालों की बुधवार को पड़ताल कराई गई तो कहीं डॉक्टर नदारद मिले तो कहीं फार्मासिस्ट अस्पताल संचालित करते पाए गए।
कुइयां गांव के आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात डॉक्टर मनीष सचान अक्सर गायब रहते हैं। कुइया गांव के ग्रामीण निर्दोष, राहुल राजपूत ने बताया कि डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं। वह मुख्यालय पर ही डटे रहते हैं। फार्मासिस्ट ने बताया कि डॉक्टर सुबह आधे घंटे के लिए आए थे। फिर चले गए। ग्रामीणों का कहना है कि फार्मासिस्ट के भरोसे ही यह अस्पताल चल रहा है। डॉक्टर साहब औपचारिकता निभा रहे हैं।
फार्मासिस्ट के हवाले मंगरौल का अस्पताल
कालपी। ग्राम मंगरौल के आयुर्वेदिक अस्पताल फार्मासिस्ट विमल कुमार के हवाले है। फार्मासिस्ट बताते है कि उनकी वैसे तो ड्यूटी कदौरा क्षेत्र के ग्राम भेडी में हैं, लेकिन उन्हें यहां अटैच किया गया है। वह हफ्ते में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को आते हैं। बाकी दिन अपनी तैनाती स्थल पर रहते है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 15 वर्ष से किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इससे इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है। वहीं, कालपी नगर के आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात डॉक्टर पूर्णिमा चटर्जी ने बताया कि यहां दिन में 30 से 40 मरीज आते हैं। यहां फार्मासिस्ट, स्वीपर तक नहीं हैं।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल
आटा। अकबरपुर इटौरा स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल की हालत खस्ताहाल है। यहां पर डॉक्टर की तैनाती होने के बाद भी, चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी मरीजों का इलाज कर दवाइयां दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि डॉक्टर साहब कई दिनों से अस्पताल नहीं आ रहे। अकबरपुर के आयुर्वेदिक अस्पताल में रोजाना 10-15 मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं। मरीजों को चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी चंद्रभान देखकर दवाइयां दे रहे हैं। बुधवार को सात मरीज इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे उनको चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ने इलाज कर दवाइयां दीं। ग्रामीण देवेंद्र कुमार, दीपेंद्र, प्रीतम ने बताया कि डॉक्टर साहब महीने में एक दो बार ही आते हैं। इनका अस्पताल न आने का रवैया कई महीनों से चल रहा है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर प्रखर चौबे ने बताया कि हमारी ड्यूटी तीन दिन के लिए उरई बघौरा में लगी है। इसलिए वहां पर ड्यूटी करने जा रहे हैं। गुरुवार से शनिवार तक ड्यूटी के लिए अकबरपुर इटौरा में रहेंगे।
ऊमरी के अस्पताल में लटक रहा ताला
ऊमरी। आयुर्वेदिक अस्पताल ऊमरी में करीब 15 साल से डॉक्टर की तैनाती नहीं है। फार्मासिस्ट ब्रजमोहन की तैनाती है। वह भी कभी कभार ही आते हैं। करीब 11 बजे अस्पताल में ताला पड़ा था। ग्रामीण जितेंद्र कुमार, धर्मेंद्र, समरजीत ने बताया कि यहां अक्सर ताला पड़ा रहता है। इससे मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता। फार्मासिस्ट ने बताया कि वह आज काम से उरई आए हैं।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। फिर भी काम चलाया जा रहा है। अगर कहीं चिकित्सक नहीं पहुंच रहे हैं तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सत्येंद्र पटेल, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, जालौन
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कुइयां गांव के आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात डॉक्टर मनीष सचान अक्सर गायब रहते हैं। कुइया गांव के ग्रामीण निर्दोष, राहुल राजपूत ने बताया कि डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं। वह मुख्यालय पर ही डटे रहते हैं। फार्मासिस्ट ने बताया कि डॉक्टर सुबह आधे घंटे के लिए आए थे। फिर चले गए। ग्रामीणों का कहना है कि फार्मासिस्ट के भरोसे ही यह अस्पताल चल रहा है। डॉक्टर साहब औपचारिकता निभा रहे हैं।
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फार्मासिस्ट के हवाले मंगरौल का अस्पताल
कालपी। ग्राम मंगरौल के आयुर्वेदिक अस्पताल फार्मासिस्ट विमल कुमार के हवाले है। फार्मासिस्ट बताते है कि उनकी वैसे तो ड्यूटी कदौरा क्षेत्र के ग्राम भेडी में हैं, लेकिन उन्हें यहां अटैच किया गया है। वह हफ्ते में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को आते हैं। बाकी दिन अपनी तैनाती स्थल पर रहते है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 15 वर्ष से किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इससे इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है। वहीं, कालपी नगर के आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात डॉक्टर पूर्णिमा चटर्जी ने बताया कि यहां दिन में 30 से 40 मरीज आते हैं। यहां फार्मासिस्ट, स्वीपर तक नहीं हैं।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल
आटा। अकबरपुर इटौरा स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल की हालत खस्ताहाल है। यहां पर डॉक्टर की तैनाती होने के बाद भी, चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी मरीजों का इलाज कर दवाइयां दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि डॉक्टर साहब कई दिनों से अस्पताल नहीं आ रहे। अकबरपुर के आयुर्वेदिक अस्पताल में रोजाना 10-15 मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं। मरीजों को चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी चंद्रभान देखकर दवाइयां दे रहे हैं। बुधवार को सात मरीज इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे उनको चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ने इलाज कर दवाइयां दीं। ग्रामीण देवेंद्र कुमार, दीपेंद्र, प्रीतम ने बताया कि डॉक्टर साहब महीने में एक दो बार ही आते हैं। इनका अस्पताल न आने का रवैया कई महीनों से चल रहा है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर प्रखर चौबे ने बताया कि हमारी ड्यूटी तीन दिन के लिए उरई बघौरा में लगी है। इसलिए वहां पर ड्यूटी करने जा रहे हैं। गुरुवार से शनिवार तक ड्यूटी के लिए अकबरपुर इटौरा में रहेंगे।
ऊमरी के अस्पताल में लटक रहा ताला
ऊमरी। आयुर्वेदिक अस्पताल ऊमरी में करीब 15 साल से डॉक्टर की तैनाती नहीं है। फार्मासिस्ट ब्रजमोहन की तैनाती है। वह भी कभी कभार ही आते हैं। करीब 11 बजे अस्पताल में ताला पड़ा था। ग्रामीण जितेंद्र कुमार, धर्मेंद्र, समरजीत ने बताया कि यहां अक्सर ताला पड़ा रहता है। इससे मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता। फार्मासिस्ट ने बताया कि वह आज काम से उरई आए हैं।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। फिर भी काम चलाया जा रहा है। अगर कहीं चिकित्सक नहीं पहुंच रहे हैं तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सत्येंद्र पटेल, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, जालौन