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रेशम उत्पादन ने बढ़ाई कमाई
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Sat, 16 Jan 2016 11:12 PM IST
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जिले में रेशम उत्पादन की रफ्तार धीरे-धीरे ही सही, लेकिन बढ़ने लगी है।
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रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए विभागीय जो दावे किए गए उन पर काम
हुआ। इसका असर यह रहा है कि आठ वर्र्षों में 104 किलोग्राम रेशम उत्पादन से
3000 किलो ग्राम रेशम उत्पादित होने लगा। इस काम में लगे किसानों की कमाई
भी बढ़ी है। रेशम कीट पालन के लिए
पहले साल विभागीय अधिकारियों को बड़ी मशक्कत के बाद 90 किसान मिले, लेकिन इसके बाद तो संख्या बढ़ती गई। आज जिले भर में 550 किसान रेशम के जरिए मुनाफा कमा रहे हैं। बताते चलें कि यहां पर रेशम कीट पालन और रेशम उत्पादन के अवसर कम नहीं हैं। बस जरूरत है जागरूकता की। रेशम विभाग की ओर से किसानोें को इस काम के
माध्यम से मुनाफा कमाने का तरीका समझाया गया और जागरूक किया गया। इसका परिणाम ये रहा कि किसान रेशम विभाग से जुड़ते चले गए। आज पूरे जिले में 550 किसान अंडी की फसल तैयार करके दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं। वर्ष 2007-08 में पहली मर्तबा रेशम कीट पालन के लिए किसानों को जागरूक किया गया। उस समय 90 किसान ही इस काम
से जुड़ पाए और 104 किलोग्राम रेशम उत्पादित हो पाया। इसके बाद हर वर्ष किसानों की संख्या में इजाफा होता गया और रेशम उत्पादन बढ़ता गया। पूरे जिले में 45 क्विंटल रेशम उत्पादन का लक्ष्य अब विभाग के पास है। विभाग अब भी किसानों को कमाई का जरिया बताकर इस दिशा में लोगों को प्रेरित कर रहा है। इससे रेशम कीट पालन उद्योग को और बढ़ाया जा सके।
अच्छा भाव मिले तो बढ़े रुझान
रेशम उत्पादन के लिए तो अवसर हैं लेकिन यहां पर इसकी बिक्री न होने से किसानों को पर्याप्त मुनाफा नहीं हो पाता है। किसान राम सिंह का कहना है कि यहीं से अच्छे भाव में रेशम खरीदा जाने लगे तो किसानों को फायदा होगा। किसान कीट पालन के लिए आगे भी आएंगे।
आल इन वन पद्धति पर हो रहा काम
रेशम विभाग में आल इन वन पद्धति पर काम चल रहा है। स्टाफ के नाम पर एक अधिकारी भर हैं। चपरासी, क्लर्क, इंस्पेक्टर, प्रदर्शक, एकाउंटेंट पद तो हैं पर किसी की तैनाती नहीं है। फाइलों को सुरक्षित रखने से लेकर सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह जिला रेशम अधिकारी के हवाले है। ऐसे में भी रेशम उत्पादन के लिए किसानों को प्ररित किया जा रहा है तो कह सकते हैं कि व्यवस्थाएं दुरुस्त हों तो रेशम उत्पादन को और बढ़ावा मिल सकता है।
रेशम उत्पादन के साथ बढे़ कीट पालक
वर्ष कीट पालक रेशम किलोग्राम में
2007-08 90 104
2008-09 145 168
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2009-10 165 245
2010-11 300 385
2011-12 400 1900
2012-13 450 2550
2013-14 512 3000
2014-15 530 4000
(वर्ष 15 -16 में 4500 किलोग्राम रेशम उत्पादन का लक्ष्य है जिसकी अपेक्षा तकरीबन 2100 किलो ग्राम रेशम उत्पादन कराया जा चुका है। पूरे जिले में इस वर्ष 500 किसान रेशम उत्पादन कर रहे है।)
वर्जन
रेशम कीट पालन के लिए किसानों को जागरूक करने का जो प्रयास किया उसमें सफलता मिल रही है। किसान रेशम कीट पालन के लिए आगे आने लगे है। मौजूदा वित्तीय वर्ष तकरीबन 20 क्विंटल रेशम का उत्पादन किया जा चुका है। स्टाफ की कमी से कार्य प्रभावित हो रहा है। -डीपी सविता, जिला रेशम अधिकारी
पहले साल विभागीय अधिकारियों को बड़ी मशक्कत के बाद 90 किसान मिले, लेकिन इसके बाद तो संख्या बढ़ती गई। आज जिले भर में 550 किसान रेशम के जरिए मुनाफा कमा रहे हैं। बताते चलें कि यहां पर रेशम कीट पालन और रेशम उत्पादन के अवसर कम नहीं हैं। बस जरूरत है जागरूकता की। रेशम विभाग की ओर से किसानोें को इस काम के
माध्यम से मुनाफा कमाने का तरीका समझाया गया और जागरूक किया गया। इसका परिणाम ये रहा कि किसान रेशम विभाग से जुड़ते चले गए। आज पूरे जिले में 550 किसान अंडी की फसल तैयार करके दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं। वर्ष 2007-08 में पहली मर्तबा रेशम कीट पालन के लिए किसानों को जागरूक किया गया। उस समय 90 किसान ही इस काम
से जुड़ पाए और 104 किलोग्राम रेशम उत्पादित हो पाया। इसके बाद हर वर्ष किसानों की संख्या में इजाफा होता गया और रेशम उत्पादन बढ़ता गया। पूरे जिले में 45 क्विंटल रेशम उत्पादन का लक्ष्य अब विभाग के पास है। विभाग अब भी किसानों को कमाई का जरिया बताकर इस दिशा में लोगों को प्रेरित कर रहा है। इससे रेशम कीट पालन उद्योग को और बढ़ाया जा सके।
अच्छा भाव मिले तो बढ़े रुझान
रेशम उत्पादन के लिए तो अवसर हैं लेकिन यहां पर इसकी बिक्री न होने से किसानों को पर्याप्त मुनाफा नहीं हो पाता है। किसान राम सिंह का कहना है कि यहीं से अच्छे भाव में रेशम खरीदा जाने लगे तो किसानों को फायदा होगा। किसान कीट पालन के लिए आगे भी आएंगे।
आल इन वन पद्धति पर हो रहा काम
रेशम विभाग में आल इन वन पद्धति पर काम चल रहा है। स्टाफ के नाम पर एक अधिकारी भर हैं। चपरासी, क्लर्क, इंस्पेक्टर, प्रदर्शक, एकाउंटेंट पद तो हैं पर किसी की तैनाती नहीं है। फाइलों को सुरक्षित रखने से लेकर सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह जिला रेशम अधिकारी के हवाले है। ऐसे में भी रेशम उत्पादन के लिए किसानों को प्ररित किया जा रहा है तो कह सकते हैं कि व्यवस्थाएं दुरुस्त हों तो रेशम उत्पादन को और बढ़ावा मिल सकता है।
रेशम उत्पादन के साथ बढे़ कीट पालक
वर्ष कीट पालक रेशम किलोग्राम में
2007-08 90 104
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2008-09 145 168
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2009-10 165 245
2010-11 300 385
2011-12 400 1900
2012-13 450 2550
2013-14 512 3000
2014-15 530 4000
(वर्ष 15 -16 में 4500 किलोग्राम रेशम उत्पादन का लक्ष्य है जिसकी अपेक्षा तकरीबन 2100 किलो ग्राम रेशम उत्पादन कराया जा चुका है। पूरे जिले में इस वर्ष 500 किसान रेशम उत्पादन कर रहे है।)
वर्जन
रेशम कीट पालन के लिए किसानों को जागरूक करने का जो प्रयास किया उसमें सफलता मिल रही है। किसान रेशम कीट पालन के लिए आगे आने लगे है। मौजूदा वित्तीय वर्ष तकरीबन 20 क्विंटल रेशम का उत्पादन किया जा चुका है। स्टाफ की कमी से कार्य प्रभावित हो रहा है। -डीपी सविता, जिला रेशम अधिकारी