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प्रीमियम 1037 रुपये, क्लेम मिला नौ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:01 PM IST
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खेती
- फोटो : ब्यूरो
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फसल बीमा योजना के तहत बीते वर्ष रबी फसल का बीमा कराने वाले किसानों के साथ कंपनी ने मजाक कर दिया है है। हालत ये है कि फसल को बीमित कराने के लिए जमा किए प्रीमियम से भी कम क्लेम की धनराशि मिली है। चिल्ली और बड़ेरा गांव के 13 किसानों में से किसी के खाते में आठ और नौ रुपये तो किसी के खाते में 17 रुपये ही आए हैं। इससे
किसान मायूस हैं और आक्रोशित भी। इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की गई है। वर्ष 2015-16 में किसानों ने रबी फसल का संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। आईसीआईसीआई लोमबार्ड बीमा कंपनी ने प्रीमियम लेकर फसल को बीमित कर तो दिया लेकिन जब क्लेम देने की बारी आई तो किसानों को नियम कायदे के नाम पर भद्दा
मजाक करने पर उतर आई। डकोर ब्लाक क्षेत्र के चिल्ली व बड़ेरा गांव के 13 किसानों के साथ तो फसल बीमा कंपनी पूरी तरह से मजाक कर दिया। बीमा कंपनी की ओर से की गई गड़बड़ी की शिकायत जिलाधिकारी संदीप कौर से भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार ने की। शिकायती पत्र के साथ किसानों की सूची भी सौंपी है जिनके साथ मजाक
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हुआ है। बता दें चिल्ली गांव के किसान अनिल कुमार ने गेहूं की फसल का बीमा कराया था। प्रीमियम 4001 रुपये दिया था और क्लेम 33 रुपये मिला है। इसी प्रकार संतोष कुमार ने 3723 रुपये प्रीमियम दिया और क्लेम 31 रुपये मिंला। अवध किशोर ने गेहूं की फसल के लिए 6235 रुपये प्रीमियम जमा किया, क्लेम 52 रुपये मिला। वीरसिंह व राजरानी ने 985 रुपये
प्रीमियम दिया था और क्लेम आठ-आठ रुपये मिला। माता प्रसाद व देवप्रसाद को 2079 प्रीमियम के सापेक्ष 17 रुपये क्लेम के रूप मे मिले। डकोर ब्लाक क्षेत्र के बड़ेरा गांव के किसान भोलाराम ने 3941 रुपये प्रीमियम देकर गेहूं की फसल को बीमित कराया था और जब नुकसान हुआ तो क्लेम में 33 रुपये दिए गए। इसी प्रकार मंशाराम ने भी 3946 रुपये प्रीमियम
जमा किया और क्लेम 33 रुपये मिला। रामबाबू ने 3941 प्रीमिय दिया था और क्लेम मिला 33 रुपये, मोहम्मद जमील ने 4139 रुपये प्रीमिय दिया और क्लेम 35 रुपये मिला। भगवती ने 1037 रुपये दिया था, क्लेम नौ रुपये मिला। छदामी को 2109 रुपये प्रीमिय देने के बाद क्लेम 18 रुपये मिले।
अन्याय कर रही है बीमा कंपनी
भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार ने कहा कि किसानों के साथ फसल बीमा कंपनी न्याय नहीं कर रही है। किस मानक के आधार पर क्लेम दिया जा रहा है यह किसी को समझ नहीं आ रहा। इस पूरे मामले को जिला प्रशासन के समक्ष रखा है। किसानों को उचित क्लेम न मिला तो आंदोलन किया जाएगा। भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष साहब
सिंह चौहान ने कहा कि किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। दैवी आपदा पीड़ित किसानों को जब मदद की जरूरत है उस वक्त बीमा कंपनी उनका मजाक उड़ा रही है। क्लेम की प्रक्रिया समझ से परे है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द इस मामले को लेकर बीमा कंपनी पर कार्रवाई करें।
अब बदल गई कंपनी, बदल गया नाम
फसल का बीमा करने वाली कंपनी भी बदल गई और योजना का नाम भी बदल गया। वर्ष 2015-16 में संसोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना थी और आईसीआईसीआई लोमबार्ड बीमा कंपनी फसलका बीमा करती थी। अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नाम हो गया और एआईसी बीमा कंपनी बीमा कर रही है। इसमें ऋणी व गैर ऋणी किसान खरीफ व रवी फसल को बीमित कराने के लिए प्रीमियम जमा करते है।
बोले जिम्मेदार
फसल का बीमा कराने वाले किसानों के खाते में आठ और नौ रुपये क्लेम के रूप में पहुंचे है तो इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। फसल बीमा कंपनी की ओर से किस आधार पर क्लेम दिया गया इसकी पड़ताल कराई जाएगी। इसके बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसानों को उनका पूरा हक मिलेगा।
अनिल कुमार पाठक
उपकृषि निदेशक व नोडल अधिकारी फसल बीमा जालौन
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किसान मायूस हैं और आक्रोशित भी। इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की गई है। वर्ष 2015-16 में किसानों ने रबी फसल का संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। आईसीआईसीआई लोमबार्ड बीमा कंपनी ने प्रीमियम लेकर फसल को बीमित कर तो दिया लेकिन जब क्लेम देने की बारी आई तो किसानों को नियम कायदे के नाम पर भद्दा
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मजाक करने पर उतर आई। डकोर ब्लाक क्षेत्र के चिल्ली व बड़ेरा गांव के 13 किसानों के साथ तो फसल बीमा कंपनी पूरी तरह से मजाक कर दिया। बीमा कंपनी की ओर से की गई गड़बड़ी की शिकायत जिलाधिकारी संदीप कौर से भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार ने की। शिकायती पत्र के साथ किसानों की सूची भी सौंपी है जिनके साथ मजाक
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हुआ है। बता दें चिल्ली गांव के किसान अनिल कुमार ने गेहूं की फसल का बीमा कराया था। प्रीमियम 4001 रुपये दिया था और क्लेम 33 रुपये मिला है। इसी प्रकार संतोष कुमार ने 3723 रुपये प्रीमियम दिया और क्लेम 31 रुपये मिंला। अवध किशोर ने गेहूं की फसल के लिए 6235 रुपये प्रीमियम जमा किया, क्लेम 52 रुपये मिला। वीरसिंह व राजरानी ने 985 रुपये
प्रीमियम दिया था और क्लेम आठ-आठ रुपये मिला। माता प्रसाद व देवप्रसाद को 2079 प्रीमियम के सापेक्ष 17 रुपये क्लेम के रूप मे मिले। डकोर ब्लाक क्षेत्र के बड़ेरा गांव के किसान भोलाराम ने 3941 रुपये प्रीमियम देकर गेहूं की फसल को बीमित कराया था और जब नुकसान हुआ तो क्लेम में 33 रुपये दिए गए। इसी प्रकार मंशाराम ने भी 3946 रुपये प्रीमियम
जमा किया और क्लेम 33 रुपये मिला। रामबाबू ने 3941 प्रीमिय दिया था और क्लेम मिला 33 रुपये, मोहम्मद जमील ने 4139 रुपये प्रीमिय दिया और क्लेम 35 रुपये मिला। भगवती ने 1037 रुपये दिया था, क्लेम नौ रुपये मिला। छदामी को 2109 रुपये प्रीमिय देने के बाद क्लेम 18 रुपये मिले।
अन्याय कर रही है बीमा कंपनी
भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार ने कहा कि किसानों के साथ फसल बीमा कंपनी न्याय नहीं कर रही है। किस मानक के आधार पर क्लेम दिया जा रहा है यह किसी को समझ नहीं आ रहा। इस पूरे मामले को जिला प्रशासन के समक्ष रखा है। किसानों को उचित क्लेम न मिला तो आंदोलन किया जाएगा। भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष साहब
सिंह चौहान ने कहा कि किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। दैवी आपदा पीड़ित किसानों को जब मदद की जरूरत है उस वक्त बीमा कंपनी उनका मजाक उड़ा रही है। क्लेम की प्रक्रिया समझ से परे है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द इस मामले को लेकर बीमा कंपनी पर कार्रवाई करें।
अब बदल गई कंपनी, बदल गया नाम
फसल का बीमा करने वाली कंपनी भी बदल गई और योजना का नाम भी बदल गया। वर्ष 2015-16 में संसोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना थी और आईसीआईसीआई लोमबार्ड बीमा कंपनी फसलका बीमा करती थी। अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नाम हो गया और एआईसी बीमा कंपनी बीमा कर रही है। इसमें ऋणी व गैर ऋणी किसान खरीफ व रवी फसल को बीमित कराने के लिए प्रीमियम जमा करते है।
बोले जिम्मेदार
फसल का बीमा कराने वाले किसानों के खाते में आठ और नौ रुपये क्लेम के रूप में पहुंचे है तो इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। फसल बीमा कंपनी की ओर से किस आधार पर क्लेम दिया गया इसकी पड़ताल कराई जाएगी। इसके बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसानों को उनका पूरा हक मिलेगा।
अनिल कुमार पाठक
उपकृषि निदेशक व नोडल अधिकारी फसल बीमा जालौन