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Jalaun News: टिनशेड के नीचे बैठे मरीजों ने घंटों डॉक्टर का किया इंतजार बिना इलाज लौटे
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कदौरा। कस्बे के सीएचसी में बुधवार को स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक और उदाहरण देखने को मिला। अस्पताल में डॉक्टर और चिकित्सा स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण मरीज घंटों टिनशेड के नीचे बैठे रहे, उन्हें न तो उपचार मिला और न ही कोई संतोषजनक जवाब।
सर्पदंश, बुखार, डायरिया और कुत्ते के काटने जैसे गंभीर मामलों वाले मरीज अस्पताल परिसर में इलाज की आस लिए घंटों इंतजार करते रहे। हरचंदपुर निवासी मजदूर ओमकार, जो सर्पदंश का शिकार हुआ था को बिना किसी जांच के सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इससे उसके परिजनों में आक्रोश व्याप्त हो गया। किसानों की चल रही धान रोपाई के समय अचानक जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहीं, ककरऊ निवासी रामबालक की पुत्री नव्या जिसे कुत्ते ने काट लिया था वह भी उपचार के लिए घंटों इंतजार में बैठी रही।
अस्पताल परिसर के टिनशेड के नीचे अभिभावक अपने बीमार बच्चों को गोद में लिए डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे। नाका ग्राम निवासी भानसिंह बेटी को इंजेक्शन लगवाने लाए थे परंतु डॉक्टर के न आने से वे घंटों वहीं बैठे रहे। कई मरीजों को तो प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाया। क्षेत्रीय लोगों में आशीष, बाबू, पवन का कहना है कि डॉक्टरों की समय से अनुपस्थिति यहां आम बात हो गई है। मरीजों को न तो उचित जानकारी दी जाती है और न ही संतोषजनक उपचार। सबसे अधिक परेशानी उस गरीब तबके को होती है जो दिनभर की मजदूरी गंवा कर इलाज की उम्मीद में सीएचसी पहुंचते हैं, लेकिन निराश लौटते हैं।
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महिला मरीजों के परिजन रामप्रसाद और गोपाल ने बताया कि प्रसव के मामलों में चिकित्सक मामूली जटिलता या संसाधनों की कमी बताकर अधिकतर महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। अक्सर बच्चा उल्टा है या उलझा हुआ है जैसी बातें कहकर भय का माहौल बना दिया जाता है।
वर्जन-
मैं स्वयं उरई जरूरी मीटिंग में था, बाकि स्टाफ अस्पताल में था। जानकारी हुई है इसकी जांच कराई जाएगी।
विनोद कुमार, सीएचसी चिकित्सा अधीक्षक
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सर्पदंश, बुखार, डायरिया और कुत्ते के काटने जैसे गंभीर मामलों वाले मरीज अस्पताल परिसर में इलाज की आस लिए घंटों इंतजार करते रहे। हरचंदपुर निवासी मजदूर ओमकार, जो सर्पदंश का शिकार हुआ था को बिना किसी जांच के सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इससे उसके परिजनों में आक्रोश व्याप्त हो गया। किसानों की चल रही धान रोपाई के समय अचानक जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहीं, ककरऊ निवासी रामबालक की पुत्री नव्या जिसे कुत्ते ने काट लिया था वह भी उपचार के लिए घंटों इंतजार में बैठी रही।
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अस्पताल परिसर के टिनशेड के नीचे अभिभावक अपने बीमार बच्चों को गोद में लिए डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे। नाका ग्राम निवासी भानसिंह बेटी को इंजेक्शन लगवाने लाए थे परंतु डॉक्टर के न आने से वे घंटों वहीं बैठे रहे। कई मरीजों को तो प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाया। क्षेत्रीय लोगों में आशीष, बाबू, पवन का कहना है कि डॉक्टरों की समय से अनुपस्थिति यहां आम बात हो गई है। मरीजों को न तो उचित जानकारी दी जाती है और न ही संतोषजनक उपचार। सबसे अधिक परेशानी उस गरीब तबके को होती है जो दिनभर की मजदूरी गंवा कर इलाज की उम्मीद में सीएचसी पहुंचते हैं, लेकिन निराश लौटते हैं।
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महिला मरीजों के परिजन रामप्रसाद और गोपाल ने बताया कि प्रसव के मामलों में चिकित्सक मामूली जटिलता या संसाधनों की कमी बताकर अधिकतर महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। अक्सर बच्चा उल्टा है या उलझा हुआ है जैसी बातें कहकर भय का माहौल बना दिया जाता है।
वर्जन-
मैं स्वयं उरई जरूरी मीटिंग में था, बाकि स्टाफ अस्पताल में था। जानकारी हुई है इसकी जांच कराई जाएगी।
विनोद कुमार, सीएचसी चिकित्सा अधीक्षक