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ओलावृष्टि से मिला दर्द, मुआवजे के मरहम का इंतजार

Sun, 22 Dec 2019 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Dec 2019 12:12 AM IST
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Pain received from hail storm, awaiting compensation ointment
ओलो और बारिश से खेतों में बर्बाद फसल - फोटो : ORAI
उरई। पिछले सप्ताह हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों की लाखों की फसल बर्बाद हो गई। हैरत की बात तो यह है कि मटर, मसूर व चने की बर्बाद फसलों का हिसाब रखने वाला भी कोई नहीं है। पहले लेखपालों की हड़ताल हो गई, फिर ठंड का प्रकोप बढ़ा तो गोशाला में मवेशियों की मौतें होने लगी और अब सीएए के विरोध ने प्रशासन का ध्यान बर्बाद फसलों से हटा रखा है।
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ओलों से खराब हुई फसलों के बीच खड़ा किसान सोच रहा है कि कोई आएगा और उनके नुकसान का सर्वे करेगा तो शायद कुछ न कुछ मुआवजा हाथ लग जाए, जिससे अगली फसल के लिए हिम्मत बंध सके। कई किसानों की फसलों की बर्बादी की स्थिति यह है कि पूरे के पूरे खेत की फसलें जमीन पर लेट गई है और किसानों को खेत बखेरना पड़ रहा है। वहीं कुछ किसानों की फसलों खासतौर पर मटर पर ऐसी मार पड़ी है कि न तो नुकसान की ही श्रेणी में आ रहे हैं और न ही मंडियों में मटर के पूरे दाम ही मिल पा रहे हैं। ऐसे में भी किसानों के आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है।
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एडीएम प्रमिल कुमार का कहना है कि सर्वे का काम चल रहा है, जिसके पूरा होते ही नुकसान की भरपाई का भी प्रयास किया जाएगा। कोंच स्थित पनयारा गांव निवासी महिला किसान राममूर्ति ने बताया कि 30 बीघा के खेत में इस बार मटर की बोई थी, फसल भी अच्छी हुई थी लेकिन तोड़ने से पहले ही ओले तड़तड़ा पड़े, पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो गई। कुछ भी नहीं बचा। मुहम्मदाबाद के किसान जाबिद के मुताबिक अब तो सिर्फ मुआवजे की ही आस है, वह भी यदि समय पर मिल जाए तो काम आ जाएगा, जिससे किसान अगली फसल के लिए कुछ तो तैयारी कर सकेगा, वर्ना यह तो गई अगली फसल के वक्त भी कुछ हाथ न आएगा।
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60 से 100 फीसदी तक फसल का नुकसान हुआ
बारिश और ओलों का सबसे अधिक असर कोंच क्षेत्र में ही हुआ। यहां के पयनारा, कैथी, मनोरी, दिरावटी और सिमिरिया गांवों में तो फसलों को सौ प्रतिशत नुकसान हुआ है। किसानों ने मटर, मसूर, चना जो कुछ भी बोया था, उसमें कुछ भी काटने और बेचने लायक ही नहीं बचा। बर्बाद फसलों को देख अभी तक किसान सिर पकड़े बैठा है। उसे फसलों के सर्वे का इंतजार है। इसी तरह बरोदा, भदारी, चमरसेना, पड़री, विरगुआ, ताहरपुरा व अंडा आदि गांवों में नुकसान करीब 60 से 70 फीसदी तक हुआ है। इसमें मटर, मसूर के साथ साथ हाल ही में बोई गई गेहूं की फसल भी शामिल है। उजड़ी फसलों की स्थिति यह है कि उसे कोई औने पौने दामों पर भी लेने को तैयार नहीं है। कई किसानों ने तो अपने खेतों को अगली फसलों के लिए बखरेना शुरू कर दिया है। संवाद
मिट्टी में मिली फसलें, मटर टुकड़े-टुकड़े
एट क्षेत्र में भी सप्ताह भर पूर्व हुई बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को खासा नुकसान हुआ है। कई गांवों में तो ओलों की मार से मटर की फसल मिट्टी में मिल सी गई है। क्षेत्र के बर्ध, खरुसा, दौलतपुरा, धगुंवा, हरदोई, अकोढ़ी आदि गांवों में ओलों से सबसे अधिक नुकसान हुआ है। मटर की फसल टुकड़े टुकड़े होकर बिखर सी गई है। मजबूरी में किसानों को खेतों की बखराई शुरू करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि शुरुआत में अधिकारी आए थे और सर्वे की बात कह गए थे लेकिन अभी तक सर्वे तो हुआ नहीं, नुकसान की भरपाई कब होगी पता नहीं। दौलतपुरा के किसान राजा भैया ने बताया कि किसानों ने कर्ज लेकर मटर बोई और सब बर्बाद हो गया। बर्ध के किसान देवेंद्र का कहना है कि मुआवजा हाथ न आया तो अगली फसल भी बोना मुश्किल हो जाएगा। संवाद

30 रुपये की मटर बिक रही 10 रुपये के रेट
डकोर ब्लाक के बड़ा गांव, चिल्ली, रिनियां, मुहम्मदाबाद, मकरेछा, डकोर, कुसमिलिया आदि में बीते दिनों हुई बारिश व ओलावृष्टि से मटर के साथ मसूर और चने की भी फसल खराब हो गई। सबसे अधिक दिक्कत मटर बोने वाले किसानों को हुई है क्योंकि फसल एकदम तैयार थी और मटर की तुड़ाई ही चल रही थी कि बारिश व ओले मुसीबत बनकर गिरने लगे। स्थिति यह है कि जो मटर ओले गिरने से पहले 30 से 35 रुपये किलो के रेट से बिक रही थी, उसी मटर की फली क्षतिग्रस्त होने से दाम सीधे 10 से 12 रुपये किलो पर पहुंच गए हैं, वह भी व्यापारी नाम मुंह सिकोड़कर खरीद रहा है। किसान महिपाल सिंह, जैनुल आबदीन, फूल सिंह, रावेंद्र आदि का कहना है कि अगली फसल भी तो करनी है, इसलिए जो मिल रहा है वह लेना मजबूरी बन गया है। संवाद

ओलो से डकोर क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुई मटर की फली

ओलो से डकोर क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुई मटर की फली- फोटो : ORAI

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