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योजनाए फाइलों में अटकीं, कुम्हारी कला भटकी

Mon, 09 Nov 2020 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2020 11:48 PM IST
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उरई (जालौन)। कुम्हार बाहुल्य गांव को कुम्हारी कला क्लस्टर भी बनाना था। कुम्हार बाहुल गांव/क्षेत्र में कुम्हारी कला से जुड़े लोगों को मिट्टी के लिए तालाबों के पट्टे, आधुनिक चाक, प्रशिक्षण, बैंकों से आर्थिक सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर कुम्हारी का परंपरागत काम करने वाले परिवारों के युवाओं को उनके पारंपरिक काम में ही रोजगार देना था। क्लस्टर पर 10 से 25 लाख रुपये तक खर्च करने की व्यवस्था है लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से योजना कागजों तक सिमट कर रह गई है। योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन करने वाले लोगों ने अपना समय और दौड़भाग में कुछ पैसा भी खर्च किया लेकिन कोई लाभ न मिलने से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
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योजनाओं का हाल
माटी कला योजना : इस योजना में वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुम्हारी कला से जुड़े 2000 से अधिक लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 75 लोगों का ट्रेनिंग के लिए चयन किया गया। ट्रेनिंग के बाद 15 लोगों ने अलग-अलग बैंकों में ऋण के लिए आवेदन किया। ऋण के लिए आवेदन किए डेढ़ वर्ष बीत चुका है लेकिन एक भी आवेदक को ऋण नहीं मिल पाया है। आवेदक को पांच लाख रुपये तक ऋण का प्रावधान है।
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तालाब पर पट्टा योजना: इस योजना में कुम्हारी कला से जुड़े लोगों को मिट्टी की व्यवस्था के लिए तालाबों के पट्टे दिए जाने हैं। माटी कला बोर्ड की ओर से संचालित इस योजना में जिले में करीब 117 लोगों को पटटे् दिए गए हैं। पट्टे का आवंटन तो कर दिया गया लेकिन ज्यादातर को तालाबों पर कब्जा नहीं मिल पाया है। इससे पट्टाधारक होने के बावजूद वह मिट्टी के लिए परेशान हो रहे हैं।
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टूल किट वितरण योजना : इस योजना के तहत पंजीकृत किसानों को इलेक्ट्रानिक चाक व अन्य उपकरण उपलब्ध कराकर कुम्हारी कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। वित्तीय वर्ष 18-19 व 19-20 में लगभग 200 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें केवल 40 लोगों को ही योजना का लाभ मिल पाया। 160 में ज्यादातर हाथ से चलने वाले चाक ही चला रहे हैं।
कुम्हार बाहुल गांव
जिले में प्रजापति समाज (कुम्हार) की आबादी लगभग दो लाख की है। रूरा, बंगरा, गोरा भूपका, औरेखी, सिमहारा, भंगा, गोहनी, मड़ोरी, गिगौरा, तरसोल, रामपुरा, टीहर, चाकी आदि गांव प्रजापति बाहुल हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
ट्रेनिंग पूरी करने वाले 15 लोगों के ऋण के लिए आवेदन बैंकों को भेजे गए थे। अभी तक एक को भी कर्ज नहीं मिल पाया है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। बैंकों से संपर्क कर जल्द से जल्द ऋण वितरण किया जाएगा। अन्य योजनाओं में भी कुम्हारी कला से जुड़े लोगों को लाभ दिलाया जाएगा। -आर के गौतम, जिला उद्योग केंद्र अधिकारी
आवेदकों में निराशा
श्याम करन प्रजापति ने बताया कि आवेदन के बाद प्रशिक्षण लिया। जुलाई में कर्ज के लिए प्रार्थनापत्र सिंडीकेट बैंक भेज दिया गया था। तब से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक ऋण स्वीकृत नहीं हुआ है। बैंक को सभी कागज उपलब्ध करा दिए हैं इसके बावजूद चक्कर लगवाए जा रहे हैं।

कुम्हारी कला से जुड़े कुंज बिहारी ने कहा कि कुम्हारों के लिए चलाई जा रहीं योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। अधिकारी चहेतों को ही लाभ दिलवाते हैं। इलेक्ट्रानिक चाक के दो साल से लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, अभी तक चाक नहीं दिया गया। देसी चाक से काम कर रहे हैं।
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