{"_id":"5fa04f918ebc3e9ba3266214","slug":"other-orai-news-knp5920895196","type":"story","status":"publish","title_hn":"र घर जाकर टीबी रोगी खोज अभियान शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
र घर जाकर टीबी रोगी खोज अभियान शुरू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उरई (जालौन)। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सोमवार से दस दिवसीय सघन सक्रिय टीबी खोज अभियान शुरू हुआ। इस मौके पर सीएमओ डॉ. अल्पना बरतारिया ने कहा कि टीबी घातक बीमारी है और नियमित इलाज से ही ठीक हो सकती है। टीबी रोगी अपने आसपास के लोगों में बीमारी फैलाता है। इसके लिए भारत सरकार ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत का संकल्प लिया है। उसी के तहत यह अभियान चलाया जा रहा जो 11 नवंबर तक चलेगा।
अपने कार्यालय से अभियान की शुरुआत करते हुए मीडिया वर्कशाप में बताया कि जिले की कुल संख्या में 1.81 लाख जनसंख्या को लक्षित करके अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए 37,478 घरों में 73 टीमें जाएंगी। टीमों के पर्यवेक्षण के लिए 16 पर्यवेक्षक और नौ नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं।
क्षय रोगी खोजने वाली टीम को 150 रुपये रोजाना की दर से भुगतान भी किया जाएगा। यही नहीं रोगी खोजने पर प्रति रोगी दो सौ रुपये भी दिए जाएंगे, जबकि अभियान में लगे सुपरवाइजर को तीन सौ रुपये रोजाना भुगतान किया जाएगा।
विज्ञापन
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. सुग्रीव बाबू ने बताया कि अबकी अभियान में संभावित क्षय रोगियों की टीबी जांच के साथ ट्रूनेट से कोरोना संबंधी जांच भी होगी। यदि टीबी रोगी मिलता है तो उसकी पंजीकरण कर अगले दिन से ही इलाज शुरू कर दिया जाएगा। यही नहीं पूरी प्रक्रिया आनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगी। कहा कि कोरोना के दौर में टीबी और कोरोना के लक्षण लगभग सामान हैं। ऐसे में बिना किसी लापरवाही के व्यक्ति को अपनी जांच करानी चाहिए। वर्कशाप में एसीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश, कोविड एल 1 हास्पिटल के प्रभारी डॉ. संजीव प्रभाकर, आलोक मिश्रा आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
अपने कार्यालय से अभियान की शुरुआत करते हुए मीडिया वर्कशाप में बताया कि जिले की कुल संख्या में 1.81 लाख जनसंख्या को लक्षित करके अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए 37,478 घरों में 73 टीमें जाएंगी। टीमों के पर्यवेक्षण के लिए 16 पर्यवेक्षक और नौ नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं।
विज्ञापन
क्षय रोगी खोजने वाली टीम को 150 रुपये रोजाना की दर से भुगतान भी किया जाएगा। यही नहीं रोगी खोजने पर प्रति रोगी दो सौ रुपये भी दिए जाएंगे, जबकि अभियान में लगे सुपरवाइजर को तीन सौ रुपये रोजाना भुगतान किया जाएगा।
विज्ञापन
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. सुग्रीव बाबू ने बताया कि अबकी अभियान में संभावित क्षय रोगियों की टीबी जांच के साथ ट्रूनेट से कोरोना संबंधी जांच भी होगी। यदि टीबी रोगी मिलता है तो उसकी पंजीकरण कर अगले दिन से ही इलाज शुरू कर दिया जाएगा। यही नहीं पूरी प्रक्रिया आनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगी। कहा कि कोरोना के दौर में टीबी और कोरोना के लक्षण लगभग सामान हैं। ऐसे में बिना किसी लापरवाही के व्यक्ति को अपनी जांच करानी चाहिए। वर्कशाप में एसीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश, कोविड एल 1 हास्पिटल के प्रभारी डॉ. संजीव प्रभाकर, आलोक मिश्रा आदि मौजूद थे।