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बिचौलियों के नंबर से जारी टोक न के आवेदन होंगे निरस्त
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उरई। कृषि यंत्रों में मिल रही छूट का लाभ लेने के लिए कई बिचौलियों ने अपने मोबाइल नंबर से योजनाओं में आवेदन कर दिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने ऐसे आवेदनों को चिह्नित कर जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद फर्जी आवेदनों को निरस्त किया जाएगा। कृषि उप निदेशक आर के तिवारी ने बताया कि योजनाओं में जो टोकन जनरेट हुए हैं, और वह किसानों के नहीं है, उन सभी आवेदनों को निरस्त किया जाएगा।
बता दें कि शासन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाए संचालित कर रही है। जिसमें एक कृषि यंत्रों में छूट से जुड़ी है। योजना के अंतर्गत किसानों को कृषि उपकरण जैस, टिलर, सीडल, हस्त चालित स्प्रैयर, रिजर, मल्टीक्राप थ्रेसर आदि की खरीद पर भारी छूट दी जा रही है। इस छूट में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसमें ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को शुरू किया गया था। जिसमें किसान किसी भी जनसुविधा केंद्र से आवेदन कर अपना टोकन जनरेट कर सकता है। टोकन मिलने के बाद ही किसान को योजनाओं का लाभ दिया जा सकेगा, लेकिन शिकायतें आ रही है कि कई बिचौलियों ने इस योजनाओं में सेंध लगा दी है। जिससे इन योजनाओं का लाभ किसानों की जगह बिचौलियों को मिल रहा है। इस बिचौलियों पर शिंकाजा कसने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने सख्त कदम उठाए है। कृषि उप निदेशक आरके तिवारी ने बताया कि जिन योजनाओं में टोकन सीधे किसान के मोबाइल नंबर नहीं जनरेट हुए है उन सभी आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा।
डीलरों पर भी कसा जाएगा सिंकजा
कृषि उप निदेशक ने बताया कि शिकायतें मिल रही है, कि कुछ डीलर कृषि यंत्रों में मिल रही छूट का लाभ लेने के लिए फर्जी आईडी लगकार अपने मोबाइल नंबर से टोकन जनरेट कर लेते है, जिससे छूट का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे डीलरों को चेतावनी के साथ साथ गोपनीय जांच भी कराई जा रही है, जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर डाल कर योजना में छूट के लिए टोकन प्राप्त किया है। जांच रिपोर्ट के बाद सभी डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि शासन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाए संचालित कर रही है। जिसमें एक कृषि यंत्रों में छूट से जुड़ी है। योजना के अंतर्गत किसानों को कृषि उपकरण जैस, टिलर, सीडल, हस्त चालित स्प्रैयर, रिजर, मल्टीक्राप थ्रेसर आदि की खरीद पर भारी छूट दी जा रही है। इस छूट में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसमें ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को शुरू किया गया था। जिसमें किसान किसी भी जनसुविधा केंद्र से आवेदन कर अपना टोकन जनरेट कर सकता है। टोकन मिलने के बाद ही किसान को योजनाओं का लाभ दिया जा सकेगा, लेकिन शिकायतें आ रही है कि कई बिचौलियों ने इस योजनाओं में सेंध लगा दी है। जिससे इन योजनाओं का लाभ किसानों की जगह बिचौलियों को मिल रहा है। इस बिचौलियों पर शिंकाजा कसने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने सख्त कदम उठाए है। कृषि उप निदेशक आरके तिवारी ने बताया कि जिन योजनाओं में टोकन सीधे किसान के मोबाइल नंबर नहीं जनरेट हुए है उन सभी आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा।
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डीलरों पर भी कसा जाएगा सिंकजा
कृषि उप निदेशक ने बताया कि शिकायतें मिल रही है, कि कुछ डीलर कृषि यंत्रों में मिल रही छूट का लाभ लेने के लिए फर्जी आईडी लगकार अपने मोबाइल नंबर से टोकन जनरेट कर लेते है, जिससे छूट का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे डीलरों को चेतावनी के साथ साथ गोपनीय जांच भी कराई जा रही है, जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर डाल कर योजना में छूट के लिए टोकन प्राप्त किया है। जांच रिपोर्ट के बाद सभी डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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