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गोबर व गोमूत्र से बनाई खाद, बढ़ाई उपज
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जैविक खाद से तैयार फल दिखाता किसान रामशंकर
- फोटो : ORAI
आटा (जालौन)। जहां एक ओर जिले में अन्ना समस्या को लेकर हायतौबा मची है तो दूसरी ओर जिले के प्रगतिशील किसान ने इस समस्या में अवसर तलाश इसे न सिर्फ आय का मुख्य जरिया बनाया बल्कि जैविक खेती कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने। प्रगतिशील किसान रामशंकर ने गांव के करीब एक दर्जन अन्ना जानवरों को बांध लिया है। जिससे न सिर्फ गांव में अन्ना समस्या खत्म हुई, बल्कि गोवंशों के गोमूत्र व गोबर से पारंपरिक विधि से जैविक खाद बनाकर अपनी उपज बढ़ाई।
ग्राम अकबरपुर इटौरा निवासी रामशंकर गुप्ता ने अपने परिश्रम और सोच से यह बता दिया कि अगर थोड़ा सा प्रयास किया जाए तो न सिर्फ जिले से अन्ना समस्या को समाप्त किया जा सकता है, बल्कि खेती की उपज भी बढ़ाई जा सकती है। रामशंकर ने घर में करीब एक दर्जन अन्ना जानवरों को बांध लिया है वह न सिर्फ इन गायों की सेवा करते है बल्कि इन गायों के गोमूत्र व गोबर से खाद बना रहे है। उनका कहना है वह दो वर्षों से गोबर व गोमूत्र की खाद बनाकर खेती कर रहे है। जिससे उनके खेत की उर्वरक क्षमता काफी बढ़ी है।
वहीं जैविक खेती कर उन्होंने बिना रासायनिक प्रयोग के सब्जियों के साथ-साथ गेहूं व चना भी पैदा किया। उनका कहना है कि जैविक खेती की वजह से उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता है। कई लोग पहले से ही पैसा दे जाते हैं कि फसल वहीं लेंगे, इससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है और वह मेहनत व लगन से इस काम को सुचारु रूप कर रहे है। उनका कहना है कि उनकी खेती को देख गांव के कई किसान भी प्रेरित हो रहे है और उनसे जैविक खेती के विषय में जानकारी करने आते है।
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छोटे भाई की बीमारी से मिली जैविक खाद की प्रेरणा
आधुनिक दौर में खेती में रासायनिक खाद का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है, जो बीमारियों की मुख्य वजह मानी जा रही है। किसान रामशंकर ने बताया कि दो साल पहले उनके भाई को हृदयरोग की बीमारी हुई थी, जिसका अभी भी इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान डाक्टरों ने भाई दयाशंकर को सेहत को ध्यान में रखते हुए जैविक सब्जियों के उपयोग की सलाह दी थी, जिसके बाद उन्होंने जैविक खेती का मन बना लिया था।
जैविक खेती से उगाए कई वैरायटी के फल
किसान रामशंकर ने जैविक खाद से पारंपरिक खेती के साथ-साथ करीब दो बीघा में फलों की खेती भी शुरू की। जिसमें उन्होंने केला, पपीता, अनार, आम, अमरूद, नीबू, मौसंबी आदि की कई वैरायटी उगाई है। जिसे देखने के लिए क्षेत्र के कई किसान उनके खेत पर पहुंचते है और उनकी मेहनत देख दंग रह जाते है। इसके साथ साथ उन्होंने खेतों की मेड़ों को भी उपयोग में लेते हुए छायादार पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि पौधों न सिर्फ छाया मिलती है बल्कि मिट्टी का कटाव भी रुकता है।
एक बीघा की खाद बनाने के प्रयोग में आती है यह सामग्री
रामशंकर ने बताया दो साल से 40 बीघा खेती बगैर खाद डाले कर रहे हैं और अन्य किसानों से ज्यादा पैदावार करते है। एक बीघा में 10 किलो गोबर, 10 लीटर गाय का मूत्र, 200 लीटर पानी, एक किलो गुड़, एक किलो बेसन, 250 ग्राम मिट्टी आदि का उपयोग करते हैं।
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ग्राम अकबरपुर इटौरा निवासी रामशंकर गुप्ता ने अपने परिश्रम और सोच से यह बता दिया कि अगर थोड़ा सा प्रयास किया जाए तो न सिर्फ जिले से अन्ना समस्या को समाप्त किया जा सकता है, बल्कि खेती की उपज भी बढ़ाई जा सकती है। रामशंकर ने घर में करीब एक दर्जन अन्ना जानवरों को बांध लिया है वह न सिर्फ इन गायों की सेवा करते है बल्कि इन गायों के गोमूत्र व गोबर से खाद बना रहे है। उनका कहना है वह दो वर्षों से गोबर व गोमूत्र की खाद बनाकर खेती कर रहे है। जिससे उनके खेत की उर्वरक क्षमता काफी बढ़ी है।
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वहीं जैविक खेती कर उन्होंने बिना रासायनिक प्रयोग के सब्जियों के साथ-साथ गेहूं व चना भी पैदा किया। उनका कहना है कि जैविक खेती की वजह से उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता है। कई लोग पहले से ही पैसा दे जाते हैं कि फसल वहीं लेंगे, इससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है और वह मेहनत व लगन से इस काम को सुचारु रूप कर रहे है। उनका कहना है कि उनकी खेती को देख गांव के कई किसान भी प्रेरित हो रहे है और उनसे जैविक खेती के विषय में जानकारी करने आते है।
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छोटे भाई की बीमारी से मिली जैविक खाद की प्रेरणा
आधुनिक दौर में खेती में रासायनिक खाद का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है, जो बीमारियों की मुख्य वजह मानी जा रही है। किसान रामशंकर ने बताया कि दो साल पहले उनके भाई को हृदयरोग की बीमारी हुई थी, जिसका अभी भी इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान डाक्टरों ने भाई दयाशंकर को सेहत को ध्यान में रखते हुए जैविक सब्जियों के उपयोग की सलाह दी थी, जिसके बाद उन्होंने जैविक खेती का मन बना लिया था।
जैविक खेती से उगाए कई वैरायटी के फल
किसान रामशंकर ने जैविक खाद से पारंपरिक खेती के साथ-साथ करीब दो बीघा में फलों की खेती भी शुरू की। जिसमें उन्होंने केला, पपीता, अनार, आम, अमरूद, नीबू, मौसंबी आदि की कई वैरायटी उगाई है। जिसे देखने के लिए क्षेत्र के कई किसान उनके खेत पर पहुंचते है और उनकी मेहनत देख दंग रह जाते है। इसके साथ साथ उन्होंने खेतों की मेड़ों को भी उपयोग में लेते हुए छायादार पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि पौधों न सिर्फ छाया मिलती है बल्कि मिट्टी का कटाव भी रुकता है।
एक बीघा की खाद बनाने के प्रयोग में आती है यह सामग्री
रामशंकर ने बताया दो साल से 40 बीघा खेती बगैर खाद डाले कर रहे हैं और अन्य किसानों से ज्यादा पैदावार करते है। एक बीघा में 10 किलो गोबर, 10 लीटर गाय का मूत्र, 200 लीटर पानी, एक किलो गुड़, एक किलो बेसन, 250 ग्राम मिट्टी आदि का उपयोग करते हैं।

गोवंश की सेवा करता किसान राम शंकर- फोटो : ORAI