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सिर्फ हेलमेट के चालान, खतरों पर नहीं कोई ध्यान

Wed, 27 Nov 2019 07:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 27 Nov 2019 07:12 PM IST
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Only helmet invoices, no attention to dangers
शहीद भगत सिंह चौराहे पर लगा वाहनों का जाम - फोटो : ORAI
हर साल की तरह इस साल का भी यातायात माह सिर्फ भाषणों व गोष्ठियों तक ही निपट गया। इस बार के यातायात माह में एक बात जरूर खास रही और वह था हेलमेट का चालान, आदमी घर से दूध, दवा या फिर सब्जी लेने भी बिना हेलमेट निकला तो उसे पांच सौ रुपये का चालान नहीं तो सिपाहियों की सौ दो रुपये में ही मुठ्ठी तो गर्म जरूर करनी पड़ी।
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वैसे तो इस बार सीट बेल्ट पर भी जोर रहा, लेकिन ज्यादातर गाड़ियों में विधायक, अध्यक्ष, प्रदेश सरकार आदि लिखा होने के कारण इनके चालान की संख्या कम ही रही।
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हैरत की बात तो यह है कि शहर के सबसे व्यस्त चौराहे शहीद भगत सिंह पर जहां सुबह से ही होमगार्ड व सिपाही झांकी की तरह सज जाते हैं, वहीं से पूरे दिन ई रिक्शा, आटो, लोडर और टेंपो ओवरलोड होकर निकलते हैं, लेकिन पुलिस का निशाना सिर्फ बिना हेलमेट बाइक सवार ही होता है।
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ओवरलोड वाहनों में कोई बांस बल्ली लादे हो या फिर लोहे की सरिया, इन गाड़ियों को कहीं पर भी कोई रोकटोक इस बार भी नहीं देखने को मिली। यही हाल जाम का भी रहा, पूरे माह भर शहीद भगत सिंह चौराहा, राठ रोड स्थित मंदिर वाला तिराहा, जिला परिषद रोड, कालपी बस स्टैंड सभी जगहों पर रोजाना सुबह शाम का जाम लोगों की परेशानी का कारण बना रहा।
चौराहों व बाजारों के अतिक्रमण पर भी पुलिस का कोई डंडा नहीं चला और न ही नगर पालिका का बुलडोजर गरजा, लिहाजा बजरिया, अस्पताल रोड, माहिल तालाब, घंटाघर, डीवीसी रोड पर तो लोगों का पैदल चलना दूभर बना रहा।
यातायात माह के दौरान ही सबसे पहले डकोर थाना क्षेत्र में ओवरलोड आटो में सवार हाईस्कूल की छात्रा ने अपनी जान गंवाई, ठीक कुछ दिन बाद कदौरा में भी ओवरलोड आटो में आगे बैठी छात्रा को सड़क पर गिरकर अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। फिर भी पुलिस ओवर लोडिंग की अनदेखी करती रही।
यातायात माह के दौरान स्कूली वाहनों पर शिकंजा कसने की बात तो अधिकारियों ने की, लेकिन शिकंजा कहीं दिखाई नहीं दिया। शहर, कस्बा हो या ग्रामीण इलाके सभी जगह से स्कूली और प्राइवेट वाहन बच्चों को भूसे की तरह गाड़ियों में भरते रहे और पुलिस के सामने से गुजरते भी रहे।

शहर में कहीं पर भी किसी भी भारी वाहन के लिए कोई नो इंट्री नहीं है। दिन हो या रात, सुबह हो या शाम कहीं ट्रैक्टर तो कहीं टूरिस्ट बसें और कहीं कहीं पालिका की कूड़ा गाड़ी ही भीड़ के बीच जाम का कारण बनी साफ नजर आती है। पालिका की कूड़ा गाड़ी तो मानो बाजार में जाम लगाने ही सुबह पीक आवर्स में कूड़ा बटोरने को निकलती है।
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