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सच्चाई की राह पर चलने वाला नहीं होता परेशान-मारुफ मिया
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तकरीर सुनते अकीकत मंद
- फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद (जालौन)। ग्यारहवी शरीफ के पवित्र माह में आयोजित जलसे में गंज मुरादाबाद, उन्नाव से आए सज्जादानशीं मारूफ मियां ने तकरीर करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए। इस्लाम में प्यार, मुहब्बत का पैगाम देकर दिलों का जीतना चाहिए। इस समय देश में जो माहौल बन रहा है। वह देशहित में नहीं है।
जलसे का आयोजन मुहम्मदाबाद में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक जैनुल आब्दीन के आवास पर किया गया। जिसमें जिक्र गौसे आजम मनाया गया। शुक्रवार रात ग्यारहवी शरीफ में तकरीर हुई। जिसमें मारूफ मियां ने कहा कि हमें देशहित में शांति का पैगाम देना चाहिए। अगर किसी का विरोध करना है तो शांति के साथ करें। आगजनी व नुकसान कर देश का नुकसान न करें। इस्लाम इसका संदेश नहीं देता है।
रहमानिया मस्जिद के इमाम इकराम रजा ने कहा कि बड़े पीर साहब बचपन में जब घर से निकल रहे थे, तभी उनकी मां ने चालीस अशर्फी उनकी बांह में बांध दी थी और कहा था कि बेटा कोई मुसीबत आए पर झूठ न बोलना, रास्ते में उन्हें डाकू मिले। जो सबको लूट रहे थे, तभी एक डाकू का नजर उन पर पड़ी तो बड़े पीर साहब ने साफ बता दिया कि उनके पास चालीस अशर्फी है। इससे डाकुओं का हृदय परिवर्तन हो गया। जिसमें बाहर से आए मौलानाओं ने बड़े पीर साहब गौसे आजम पर प्रकाश डाला। इमाम अंसार रजा, इकराम रजा ने फातिहा पढ़ी। इस दौरान हाजी अहमद एनुल आब्दीन, उम्मेद अली, नियामत उल्ला, शमसाद हुसैन, ताहिर हुसैन, असलम, अल्ताफ, मल्लू खान, हनीफ खान, मकसूद आदि रहे।
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जलसे का आयोजन मुहम्मदाबाद में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक जैनुल आब्दीन के आवास पर किया गया। जिसमें जिक्र गौसे आजम मनाया गया। शुक्रवार रात ग्यारहवी शरीफ में तकरीर हुई। जिसमें मारूफ मियां ने कहा कि हमें देशहित में शांति का पैगाम देना चाहिए। अगर किसी का विरोध करना है तो शांति के साथ करें। आगजनी व नुकसान कर देश का नुकसान न करें। इस्लाम इसका संदेश नहीं देता है।
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रहमानिया मस्जिद के इमाम इकराम रजा ने कहा कि बड़े पीर साहब बचपन में जब घर से निकल रहे थे, तभी उनकी मां ने चालीस अशर्फी उनकी बांह में बांध दी थी और कहा था कि बेटा कोई मुसीबत आए पर झूठ न बोलना, रास्ते में उन्हें डाकू मिले। जो सबको लूट रहे थे, तभी एक डाकू का नजर उन पर पड़ी तो बड़े पीर साहब ने साफ बता दिया कि उनके पास चालीस अशर्फी है। इससे डाकुओं का हृदय परिवर्तन हो गया। जिसमें बाहर से आए मौलानाओं ने बड़े पीर साहब गौसे आजम पर प्रकाश डाला। इमाम अंसार रजा, इकराम रजा ने फातिहा पढ़ी। इस दौरान हाजी अहमद एनुल आब्दीन, उम्मेद अली, नियामत उल्ला, शमसाद हुसैन, ताहिर हुसैन, असलम, अल्ताफ, मल्लू खान, हनीफ खान, मकसूद आदि रहे।

तकरीर करते सज्जादा नशीन मारूफ मियां- फोटो : ORAI
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