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Jalaun News: शिकायत करने पर डॉक्टर ने इलाज से किया इन्कार, मरीज का हंगामा
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रामपुरा। सीएचसी रामपुरा में मरीज द्वारा ऑनलाइन शिकायत करने से नाराज डॉक्टर ने इलाज करने से इंकार कर दिया। इससे मरीज ने हंगामा करना शुरू कर दिया। मरीज ने आरोप है कि बाहर से बोतल लाने को दबाव बनाया, फिर बाद में अस्पताल से ही बोतल लगाई गई।
सीएचसी में बुधवार को ग्राम मई निवासी मयंक राजावत बुखार आने पर इलाज कराने सीएचसी पहुंचे। वहां डॉक्टर ने इलाज के लिए बोतल बाहर से लाने के लिए कहा। इस पर उन्होंने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा दी। हालांकि बाद में मरीज को अस्पताल के अंदर से ही बोतल लगाकर इलाज किया गया। गुरुवार को जब मयंक इलाज के लिए फिर अस्पताल पहुंचे तो ड्यूटी पर तैनात डॉ. अरुण जादौन ने उससे शिकायत वापस लेने के लिए कहा।
मयंक का आरोप है कि डॉक्टर ने कहा कि वह तभी इलाज करेंगे, जब वह अपनी ऑनलाइन शिकायत वापस से लेगा। इस पर मयंक ने सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रदीप राजपूत से शिकायत की। सीएचसी प्रभारी के कहने पर मरीज का इलाज किया गया। इलाज के दौरान अस्पताल में बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने के कारण अंधेरे में मोबाइल की रोशनी में मरीज को बोतल लगाई गई। मरीज के परिजनों ने मरीजों के कमरे में बिजली न आने पर नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद अस्पताल का जनरेटर चालू किया गया। तब जाकर अस्पताल में रोशनी हो सकी। अस्पताल स्टाफ के रवैये से मरीजों में नाराजगी है।
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मयंक का कहना है कि वह अस्पताल की अव्यवस्था व डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर उच्चाधिकारियों से शिकायत करेगा। वहीं, डॉ अरुण जादौन का कहना है कि उन्होंने मरीज का ठीक से इलाज किया था। जब उससे कहा कि पूरा इलाज हो रहा है तो शिकायत क्यों कर रहे है तो बिफर गया। आरोप सही नहीं है।
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सीएचसी में बुधवार को ग्राम मई निवासी मयंक राजावत बुखार आने पर इलाज कराने सीएचसी पहुंचे। वहां डॉक्टर ने इलाज के लिए बोतल बाहर से लाने के लिए कहा। इस पर उन्होंने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा दी। हालांकि बाद में मरीज को अस्पताल के अंदर से ही बोतल लगाकर इलाज किया गया। गुरुवार को जब मयंक इलाज के लिए फिर अस्पताल पहुंचे तो ड्यूटी पर तैनात डॉ. अरुण जादौन ने उससे शिकायत वापस लेने के लिए कहा।
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मयंक का आरोप है कि डॉक्टर ने कहा कि वह तभी इलाज करेंगे, जब वह अपनी ऑनलाइन शिकायत वापस से लेगा। इस पर मयंक ने सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रदीप राजपूत से शिकायत की। सीएचसी प्रभारी के कहने पर मरीज का इलाज किया गया। इलाज के दौरान अस्पताल में बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने के कारण अंधेरे में मोबाइल की रोशनी में मरीज को बोतल लगाई गई। मरीज के परिजनों ने मरीजों के कमरे में बिजली न आने पर नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद अस्पताल का जनरेटर चालू किया गया। तब जाकर अस्पताल में रोशनी हो सकी। अस्पताल स्टाफ के रवैये से मरीजों में नाराजगी है।
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मयंक का कहना है कि वह अस्पताल की अव्यवस्था व डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर उच्चाधिकारियों से शिकायत करेगा। वहीं, डॉ अरुण जादौन का कहना है कि उन्होंने मरीज का ठीक से इलाज किया था। जब उससे कहा कि पूरा इलाज हो रहा है तो शिकायत क्यों कर रहे है तो बिफर गया। आरोप सही नहीं है।