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Jalaun News: आदेशों को अधिकारी दिखा रहे ठेंगा, नहीं उठ रहे सीयूजी नंबर
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उरई। जिले के कुछ अधिकारी सीएम के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। उन्हें जो सरकारी नंबर दिए गए हैं, कुछ अधिकारी उन्हें बंद किए हैं तो कुछ अधिकारी उसे उठाना ही नहीं मुनासिब समझते हैं। लोगों का कहना है कि तीन दिन से फोन लगा लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का कोई जवाब नहीं मिलता है। इससे लोग मन मारकर बैठ रहे हैं। गुरुवार को अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो जनपद के पांच एसडीएम में से कालपी एसडीएम ने फोन उठाया। बाकी दो का नंबर बंद था, जबकि दो लोगों ने फोन उठाया ही नहीं।
सीएम के आदेश के बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने सभी अधिकारियों को जनता से संवाद स्थापित करवाने के लिए सरकारी नंबर (सीयूजी) उठाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अधिकतर अधिकारी इन नंबरों को उठाना मुनासिब ही नहीं समझते तो लोगों की समस्याओं का निराकरण कहां से करेंगे।
गुरुवार को जब अमर उजाला की टीम ने नंबरों के नहीं उठाने की सच्चाई जाननी चाही तो मामला सही पाया गया। सबसे पहले साढ़े दस बजे कोंच एसडीएम ज्योति सिंह का फोन लगाया गया। जो बंद था। इसके बाद उरई एसडीएम नेहा ब्याडव्याल का मोबाइल भी बंद बता रहा था। जालौन एसडीएम विनय कुमार मौर्या का फोन नहीं उठा और पांच घंटे बाद वापस भी नहीं किया गया। इसके बाद माधौगढ़ एसडीएम राकेश कुमार का फोन भी नहीं उठा। कालपी एसडीएम मनोज कुमार सिंह का फोन लगाते ही दो घंटी पर ही उठ गया। उनसे जानकारी ली गई और फोन को काट दिया गया।
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इसके बाद लगातार विवादों से सुर्खियों में रहने वाली ईओ कोंच मोनिका उमराव का फोन लगाया जो पांच बार लगाने के बाद भी नहीं उठा। न हीं उन्होंने नंबर को दोबारा लौटाना मुनासिब समझा। फिर एट ईओ गौरव पटेल का फोन लगाया गया, जो नहीं उठा।
लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों का जनता से सीधा जुड़ाव होता है और वह बड़े पदों पर बैठे हैं, लेकिन जब वह ही फोन नहीं उठाएंगे तो अन्य से क्या उम्मीद की जा सकती है। लोगों का कहना है कि प्रतिदिन की यही समस्या बनी हुई है। जनता फोन लगाती रहती है, अधिकारी जानबूझकर उनका फोन नहीं उठाते हैं। इससे लोग भटकने को मजबूर हो जाते हैं।
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सीएम के आदेश के बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने सभी अधिकारियों को जनता से संवाद स्थापित करवाने के लिए सरकारी नंबर (सीयूजी) उठाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अधिकतर अधिकारी इन नंबरों को उठाना मुनासिब ही नहीं समझते तो लोगों की समस्याओं का निराकरण कहां से करेंगे।
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गुरुवार को जब अमर उजाला की टीम ने नंबरों के नहीं उठाने की सच्चाई जाननी चाही तो मामला सही पाया गया। सबसे पहले साढ़े दस बजे कोंच एसडीएम ज्योति सिंह का फोन लगाया गया। जो बंद था। इसके बाद उरई एसडीएम नेहा ब्याडव्याल का मोबाइल भी बंद बता रहा था। जालौन एसडीएम विनय कुमार मौर्या का फोन नहीं उठा और पांच घंटे बाद वापस भी नहीं किया गया। इसके बाद माधौगढ़ एसडीएम राकेश कुमार का फोन भी नहीं उठा। कालपी एसडीएम मनोज कुमार सिंह का फोन लगाते ही दो घंटी पर ही उठ गया। उनसे जानकारी ली गई और फोन को काट दिया गया।
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इसके बाद लगातार विवादों से सुर्खियों में रहने वाली ईओ कोंच मोनिका उमराव का फोन लगाया जो पांच बार लगाने के बाद भी नहीं उठा। न हीं उन्होंने नंबर को दोबारा लौटाना मुनासिब समझा। फिर एट ईओ गौरव पटेल का फोन लगाया गया, जो नहीं उठा।
लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों का जनता से सीधा जुड़ाव होता है और वह बड़े पदों पर बैठे हैं, लेकिन जब वह ही फोन नहीं उठाएंगे तो अन्य से क्या उम्मीद की जा सकती है। लोगों का कहना है कि प्रतिदिन की यही समस्या बनी हुई है। जनता फोन लगाती रहती है, अधिकारी जानबूझकर उनका फोन नहीं उठाते हैं। इससे लोग भटकने को मजबूर हो जाते हैं।