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Jalaun News: कार्यालय पर ताला, जन्म प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे लाभार्थी
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फोटो - 05 कमरा बंद होने के बाद खड़े लाभार्थी। संवाद
- फोटो : सोमवार को आसमान में छाई रही काली घटाओं का नजारा। संवाद
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उरई। जिला महिला अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए महीनों से चक्कर काट रहे लाभार्थियों का सोमवार को सब्र टूट गया। जननी सुरक्षा योजना से संबंधित कक्ष संख्या 29 पर ताला लटका मिला। दूर-दराज से आए लोगों को बैरंग लौटना पड़ा, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ गया।
एट निवासी रविंद्र कुमार के बेटे का जन्म जुलाई 2020 में हुआ था, पर प्रमाण पत्र में त्रुटि आज तक ठीक नहीं हुई। गोरा करनपुर निवासी प्रीति की बेटी का जन्म 25 सितंबर 2025 को हुआ लेकिन छह महीने बाद भी प्रमाण पत्र नहीं बन सका। सोनम पत्नी इकबाल को वर्ष 2022 में बच्चों के जन्म के बाद भी जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिला। उन्हें जन्म प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया गया।
जखोली निवासी धर्मेंद्र के बच्चे का प्रमाण पत्र आठ साल बाद भी नहीं बन पाया है। कोंच के जहीर की पत्नी रुखसार ने अस्पताल में बेटी को जन्म दिया, पर प्रमाण पत्र नहीं मिला। सोमवार को कक्ष संख्या 29 बंद मिलने से लोगों की नाराजगी और बढ़ गई। लाभार्थियों का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही से उन्हें परेशान होना पड़ रहा है।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके पाल ने बताया कि लिपिक मुलायम सिंह जननी सुरक्षा योजना का कार्य देखते हैं। संभवतः वह किसी कार्य से सीएमओ कार्यालय गए होंगे, इसलिए कक्ष बंद था। उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र बनने में हो रही देरी के मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। साथ ही व्यवस्था में सुधार करने की बात कही।
इधर, लाभार्थियों ने मांग की है कि जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े लंबित मामलों की तत्काल जांच हो। उनका जल्द समाधान कराया जाए। इससे लोगों को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार एक ओर जन्म प्रमाण पत्र को जरूरी दस्तावेज बता रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की लापरवाही से लोग परेशान हैं।
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एट निवासी रविंद्र कुमार के बेटे का जन्म जुलाई 2020 में हुआ था, पर प्रमाण पत्र में त्रुटि आज तक ठीक नहीं हुई। गोरा करनपुर निवासी प्रीति की बेटी का जन्म 25 सितंबर 2025 को हुआ लेकिन छह महीने बाद भी प्रमाण पत्र नहीं बन सका। सोनम पत्नी इकबाल को वर्ष 2022 में बच्चों के जन्म के बाद भी जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिला। उन्हें जन्म प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया गया।
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जखोली निवासी धर्मेंद्र के बच्चे का प्रमाण पत्र आठ साल बाद भी नहीं बन पाया है। कोंच के जहीर की पत्नी रुखसार ने अस्पताल में बेटी को जन्म दिया, पर प्रमाण पत्र नहीं मिला। सोमवार को कक्ष संख्या 29 बंद मिलने से लोगों की नाराजगी और बढ़ गई। लाभार्थियों का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही से उन्हें परेशान होना पड़ रहा है।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके पाल ने बताया कि लिपिक मुलायम सिंह जननी सुरक्षा योजना का कार्य देखते हैं। संभवतः वह किसी कार्य से सीएमओ कार्यालय गए होंगे, इसलिए कक्ष बंद था। उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र बनने में हो रही देरी के मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। साथ ही व्यवस्था में सुधार करने की बात कही।
इधर, लाभार्थियों ने मांग की है कि जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े लंबित मामलों की तत्काल जांच हो। उनका जल्द समाधान कराया जाए। इससे लोगों को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार एक ओर जन्म प्रमाण पत्र को जरूरी दस्तावेज बता रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की लापरवाही से लोग परेशान हैं।