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पोषण केंद्र खाली, जांच टीम ने जताई हैरानी
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 25 Oct 2016 10:59 PM IST
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महिला अस्पताल में जांच पड़ताल करती समिति की चेयरमेन व सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
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विधान मंडल की महिला एवं बाल विकास समिति केे सदस्यों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंच कर शासन की ओर से संचालित स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की हकीकत जानने के लिए जिला महिला व पुरुष अस्पताल का मंगलवार को देर रात निरीक्षण किया। इस दौरान अति कुपोषित बच्चों के समुचित इलाज केे लिए खोले गए पोषण केंद्र में एक भी बच्चा नहीं
मिला और न ही वहां कोई स्टाफ मौजूद था। महिला अस्पताल में भी डाक्टर की 24 घंटे ड्यूटी को लेकर टीम असहज हो गई। सीएमएस से जननी सुरक्षा केे तहत मार्च 2016 माह में प्रसव और प्रसूताओं को दी जाने वाली सहायता राशि की रिपोर्ट मांगी। जिला महिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को मुद्दा बनाकर 14 अक्तूबर से लगातार अमर उजाला में खबरें प्रकाशित
की जा रही हैं। इन खबरों को लेकर सीएमएस ने भी गंभीरता दिखाई और तमाम व्यवस्थाओं में सुधार किए। मंगलवार को जनपद आई विधान मंडल की बाल विकास समिति की चेयरमैन आशा किशोर के अलावा अनुसूचित समिति के सचिव सुरेंद्र प्रताप सिंह, सहायक समिति अधिकारी वाईबी सिंह, संदीप शर्मा, पवन कुमार सिंह एवं अन्य सदस्यों ने खबरों को संज्ञान में
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लेकर मंगलवार को देर रात 8.30 बजे जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां पर सबसे पहले लेबर रूम में गए, वहां की व्यवस्थाएं देखी। ड्यूटी पर डाक्टर पल्लवी यादव से पूछताछ की। इस दौरान डाक्टर और सीएमएस हड़बड़ाहट में नजर आई। बाद में सीएमएस ने अपनी बात रखी और बताया कि डाक्टर की ड्यूटी चौबीस घंटे की है। आन काल डाक्टर को
बुलाने की व्यवस्था है। समिति के सदस्यों ने मार्च 2016 माह में कराए गए प्रसव की रिपोर्ट तलब की। इसके अलावा अस्पताल में मौजूदा अभिलेखों को चेक किया। टीम निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं को देखकर असंतुष्ट नजर आई। इसके बाद जिला अस्पताल पहुंची। यहां पर अति कुपोषित बच्चों के उपचार केे लिए खोले गए पोषण केेंद्र को लेकर टीम ने नाराजगी
जताई। यहां पर एक भी बच्चा भर्ती नहीं मिली। वार्ड के सारे पलंग खाली थे। सीडीओ एसपी सिंह ने बताया कि डाक्टर की तैनाती नहीं हैं, जो भी बच्चे आते हैं, उनको उपचार दिया जाता है। जिला अस्पताल में तैनात डाक्टर उनका इलाज करते हैं। टीम के सदस्यों ने नाराजगी जताई और कहा कि एक ओर सरकार अति कुपोषण को दूर करने का प्रयास कर रहीं हैं, वहीं, दूसरी ओर यहां पर इतना अच्छा केंद्र बना है, फिर भी बच्चों को उपचार नहीं मिल पा रहा है।
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मिला और न ही वहां कोई स्टाफ मौजूद था। महिला अस्पताल में भी डाक्टर की 24 घंटे ड्यूटी को लेकर टीम असहज हो गई। सीएमएस से जननी सुरक्षा केे तहत मार्च 2016 माह में प्रसव और प्रसूताओं को दी जाने वाली सहायता राशि की रिपोर्ट मांगी। जिला महिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को मुद्दा बनाकर 14 अक्तूबर से लगातार अमर उजाला में खबरें प्रकाशित
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की जा रही हैं। इन खबरों को लेकर सीएमएस ने भी गंभीरता दिखाई और तमाम व्यवस्थाओं में सुधार किए। मंगलवार को जनपद आई विधान मंडल की बाल विकास समिति की चेयरमैन आशा किशोर के अलावा अनुसूचित समिति के सचिव सुरेंद्र प्रताप सिंह, सहायक समिति अधिकारी वाईबी सिंह, संदीप शर्मा, पवन कुमार सिंह एवं अन्य सदस्यों ने खबरों को संज्ञान में
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लेकर मंगलवार को देर रात 8.30 बजे जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां पर सबसे पहले लेबर रूम में गए, वहां की व्यवस्थाएं देखी। ड्यूटी पर डाक्टर पल्लवी यादव से पूछताछ की। इस दौरान डाक्टर और सीएमएस हड़बड़ाहट में नजर आई। बाद में सीएमएस ने अपनी बात रखी और बताया कि डाक्टर की ड्यूटी चौबीस घंटे की है। आन काल डाक्टर को
बुलाने की व्यवस्था है। समिति के सदस्यों ने मार्च 2016 माह में कराए गए प्रसव की रिपोर्ट तलब की। इसके अलावा अस्पताल में मौजूदा अभिलेखों को चेक किया। टीम निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं को देखकर असंतुष्ट नजर आई। इसके बाद जिला अस्पताल पहुंची। यहां पर अति कुपोषित बच्चों के उपचार केे लिए खोले गए पोषण केेंद्र को लेकर टीम ने नाराजगी
जताई। यहां पर एक भी बच्चा भर्ती नहीं मिली। वार्ड के सारे पलंग खाली थे। सीडीओ एसपी सिंह ने बताया कि डाक्टर की तैनाती नहीं हैं, जो भी बच्चे आते हैं, उनको उपचार दिया जाता है। जिला अस्पताल में तैनात डाक्टर उनका इलाज करते हैं। टीम के सदस्यों ने नाराजगी जताई और कहा कि एक ओर सरकार अति कुपोषण को दूर करने का प्रयास कर रहीं हैं, वहीं, दूसरी ओर यहां पर इतना अच्छा केंद्र बना है, फिर भी बच्चों को उपचार नहीं मिल पा रहा है।