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केरोसिन घोटाले के आरोपी कोटेदारों को नोटिस
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कालपी में कोटेदारों से पूछताछ करते आर्थिक अपराध शाखा के सीओ
- फोटो : ORAI
कालपी (जालौन)। वर्ष 2007-08 में हुए सरकारी मिट्टी के तेल के घोटाले का मामला एक फिर गरमा गया है। घोटाले के प्रकरण में दर्ज अभियोग के विवेचनाधिकारी अपराध अनुसंधान शाखा के क्षेत्राधिकारी((कानपुर) ने शनिवार को नगर में आकर आरोपी कोटेदारों से पूछताछ की और उन्हें अपने बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भी दिया। जिससे केरोसिन घोटाले के आरोपियों में खलबली मची है।
बता दें कि वर्ष 2007 व 2008 में सूखा राहत योजना का केरोसिन आयल शासन से थोक डीलरों को एक लाख लीटर आवंटित हुआ था, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी केरोसिन उपभोक्ताओं को न बांटकर उसे बाजार में बेच दिया गया था। इसकी शिकायत पर जांच हुई और घोटाले का मामला सत्य पाया गया था।
जिस पर तत्कालीन एसडीएम इंद्रपाल उत्तम, तत्कालीन जिलापूर्ति अधिकारी आरपी शंखवार, थोक डीलरों व कोटेदारों सहित 191 नामजद लोगों के खिलाफ ईओडब्ल्यू कानपुर थाने में धारा 420,467, 468,471,120 बी व 3-7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करके विवेचना शुरू की गई थी। उक्त प्रकरण में विवेचक एवं ईओडब्ल्यू के क्षेत्राधिकारी (कानपुर) सोहराब आलम की टीम शनिवार को कालपी तहसील पहुंची। क्षेत्राधिकारी ने करीब 150 कोटेदारों को तलब कर नोटिस थमाए और दस दिन के अंदर बयान दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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वहीं आरोपी कोटेदारों का कहना है कि उन्हें किसी भी योजना के अंतर्गत अतिरिक्त मिट्टी का तेल वर्ष 2007 व 2008 में डीलरों के माध्यम से नहीं दिया गया। शासनादेश के तहत वे सिर्फ तीन वर्षों तक के ही रजिस्टर एवं अभिलेख रख सकते हैं। पिछले अभिलेख उनके पास नही है। इस संबंध में कोटेदार शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। उधर ईओडब्ल्यू की टीम के आने की भनक सुनकर केरोसिन डिपो के डीलर भूमिगत हो गए। वहीं जांच के लिए पहुंचे सीओ सोहराब का कहना है कि यह शासन से जुड़ा मामला है, लिहाजा ज्यादा कुछ नहीं बताया जा सकता है। फिलहाल जल्द से जल्द कोटेदारों के बयान लेने का प्रयास किया जा रहा है।
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बता दें कि वर्ष 2007 व 2008 में सूखा राहत योजना का केरोसिन आयल शासन से थोक डीलरों को एक लाख लीटर आवंटित हुआ था, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी केरोसिन उपभोक्ताओं को न बांटकर उसे बाजार में बेच दिया गया था। इसकी शिकायत पर जांच हुई और घोटाले का मामला सत्य पाया गया था।
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जिस पर तत्कालीन एसडीएम इंद्रपाल उत्तम, तत्कालीन जिलापूर्ति अधिकारी आरपी शंखवार, थोक डीलरों व कोटेदारों सहित 191 नामजद लोगों के खिलाफ ईओडब्ल्यू कानपुर थाने में धारा 420,467, 468,471,120 बी व 3-7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करके विवेचना शुरू की गई थी। उक्त प्रकरण में विवेचक एवं ईओडब्ल्यू के क्षेत्राधिकारी (कानपुर) सोहराब आलम की टीम शनिवार को कालपी तहसील पहुंची। क्षेत्राधिकारी ने करीब 150 कोटेदारों को तलब कर नोटिस थमाए और दस दिन के अंदर बयान दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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वहीं आरोपी कोटेदारों का कहना है कि उन्हें किसी भी योजना के अंतर्गत अतिरिक्त मिट्टी का तेल वर्ष 2007 व 2008 में डीलरों के माध्यम से नहीं दिया गया। शासनादेश के तहत वे सिर्फ तीन वर्षों तक के ही रजिस्टर एवं अभिलेख रख सकते हैं। पिछले अभिलेख उनके पास नही है। इस संबंध में कोटेदार शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। उधर ईओडब्ल्यू की टीम के आने की भनक सुनकर केरोसिन डिपो के डीलर भूमिगत हो गए। वहीं जांच के लिए पहुंचे सीओ सोहराब का कहना है कि यह शासन से जुड़ा मामला है, लिहाजा ज्यादा कुछ नहीं बताया जा सकता है। फिलहाल जल्द से जल्द कोटेदारों के बयान लेने का प्रयास किया जा रहा है।