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पैर गंवाया पर हौसला नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, जालौन
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:17 PM IST
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मंदिर के बाहर बालू को तसला में भरता विकलांग छेटेलाल
- फोटो : अमर उजाला
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मेहनत पर विश्वास करना तो कोई मगरौल गांव के छोटेलाल से सीखे। जिसने सड़क दुर्घटना में एक पैर गंवाया लेकिन हौसला नहीं। हादसे के बाद उसने खुद को असहाय नहीं समझा और मेहनत के दम पर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है। बच्चों को अच्छी तालीम भी दिला रहा है।
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1999 में पैर गंवाने वाले छोटेलाल को 2012 से विकलांग पेंशन भी मिलना बंद हो गई। जॉब कार्ड तक नहीं बना। सरकारी उपेक्षा का शिकार छोटेलाल इसके बाद भी अपने परिवार को दो वक्त की रोटी दे रहा है। छोटेलाल का कहना है कि आदमी को अपने पर विश्वास रखना चाहिए, कठिन समय में विश्वास ही काम आता है। उसने पैर गंवाया है, हौसला नहीं।
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कालपी तहसील क्षेत्र के मगरौल गांव निवासी छोटेलाल गरीबी के बीच भी खुश था लेकिन उसकी इन खुशियों को नवंबर 1999 को ग्रहण लग गया और एक सड़क दुर्घटना में उसका एक पैर कट गया। लंबे समय तक उपचार चला और काफी पैसा भी खर्च हुआ। किसी तरह वह बैसाखी के सहारे चलने लगा।
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छोटेलाल ने जयपुर जाकर निशुल्क कृत्रिम पैर लगवाया। उसे विकलांग पेंशन भी मिलने लगी। इससे उसकी गृहस्थी की गाड़ी फिर आगे बढ़ी। लेकिन वर्ष 2012 से विकलांग पेंशन भी मिलना बंद हो गई। उसने इसकी शिकायत अधिकारियों से की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
गांव में उसका जॉब कार्ड भी नहीं बना। इसी वजह से अब वह कालपी में रह कर मजदूरी कर रहा है। रविवार को वह कालपी रोड स्थित एक मंदिर में वह काम करता दिखा। उसने बताया कि वह सरकार की पेंशन योजना बंद हो जाने से मायूस है। एक बेटी की शादी हो चुकी है, अब दूसरी बेटी और बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए प्रयासरत है।