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Jalaun News: हेल्प डेस्क नहीं, पूछताछ केंद्र पर एक कर्मचारी कम, ट्रेनें कब आएंगी कौन बताएगा

Sun, 14 Jan 2024 01:40 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2024 01:40 PM IST
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No help desk, one less employee at the inquiry center, who will tell when the trains will come?
उरई। कोहरे में ट्रेनें रिकॉर्ड तोड़ देर से पहुंच रही हैं।
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कई तो दूसरे दिन आ पा रही हैं। ऐसे में यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर जो इंतजाम होने चाहिए, नहीं किए गए। न ही हेल्प डेस्क है और पूछताछ क्लर्क तक में एक पद रिक्त चल रहा है। इस वजह से रात के आठ घंटे तो यात्रियों को सिर्फ असुविधा के साथ ठंड काटनी पड़ती है।

शनिवार की सुबह पड़ताल में रेलवे स्टेशन की हकीकत देखी तो यात्रियों की परेशानी के रूप में नतीजा सामने आया। रेलवे स्टेशन पर तीन शिफ्टों में पूछताछ केंद्र पर ड्यूटी लगाई जाती है। यहां रात 10 से सुबह छह बजे तक तैनात रहने वाला कर्मचारी ही नहीं था। पूछने पर पता चला कि सिर्फ दो कर्मचारी हैं, इसलिए रात में उस आठ घंटे की एक शिफ्ट को रिक्त कर दिया गया है। रात में स्टाफ की यह समस्या दिखाकर उच्चधिकारियों और जिम्मेदारों से तो छिप जाते हैं, लेकिन रात में कर्मचारी कम होने की वजह से यात्रियों को परेशानी होती है। पेश है शशि शेखर दुबे और आसिफ खान की रिपोर्ट...
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भीषण सर्दी और ट्रेन के आने का सही समय पता न चल पाने की वजह से कई यात्री रात भर इंतजार के बाद सुबह ठंड से बचते हुए सो गए। कोई जमीन पर तो कोई कुर्सियों पर ही बैठा रहा। समस्या इस बात की थी कि प्रतीक्षालय भीतर से भी दोनों ओर से खुला था, जिस वजह से ठंड से यात्री परेशान थे।
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सर्दी से बचाव के लिए रेलवे प्रशासन ने झांसी मंडल के ग्वालियर समेत कई स्टेशनों पर हेल्प डेस्क बना दी। जिससे यात्रियों को ट्रेनों के निरस्तीकरण के अलावा ट्रेनों की लेटलतीफी व अन्य दिक्कतों के बारे में जानकारी मिल सके, लेकिन उरई में इस तरह की व्यवस्था न होने से यात्रियों को दिक्कत हो रही हैं।


अमृत भारत योजना के तहत उरई रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य चल रहा है। जिसकी वजह से प्रथम श्रेणी वेटिंग रूम यात्रियों के लिए पिछले करीब आठ माह से बंद कर दिया गया है। इससे यात्रियों को दिक्कत होती है। इस भीषण सर्दी में यात्रियों को टीनशेड के नीचे बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है।


रेलवे स्टेशन का पूछताछ केंद्र रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक खाली रहता है। जिसकी वजह से रात में आने वाले यात्रियों को ट्रेनों की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है। यही नहीं पहले मैनुअल स्टीकर में ट्रेनों की लोकेशन दर्शाई जाती थी। जिससे कम पढ़ा लिखा व्यक्ति भी ट्रेनों की जानकारी कर लेता था। अब कोड में स्टेशन दर्शाए जाते हैं। जिससे लोगों को ट्रेन के बारे में जानकारी करने में दिक्कत आती है।


कोलकाता निवासी सुभाष सरकार ने बताया कि वह गुरसरायं स्थित वाटर प्लांट में काम करते हैं। उनकी मां की तबियत खराब है। उन्हें घर जाना था। इसके लिए कोलकाता जाने वाली बैरकपुर एक्सप्रेस जाने के लिए यहां पहुंचे। पता चला कि ट्रेन निरस्त है। दूसरी किसी ट्रेन की जानकारी नहीं मिल रही है। कैसे घर तक पहुंचेंगे, समझ नहीं आ रहा है।

गोरखपुर की गायत्री देवी तीन सदस्यीय परिवार के साथ जमरेही गांव आईं थीं। उनका गोरखपुर जाने वाली ट्रेन नंबर 15090 में रिजर्वेशन था। ट्रेन का समय 2.35 बजे का है। रात के नौ बज रहे है, अब तक ट्रेन नहीं आई है। सर्दी के मारे कंपकंपा रहे हैं। अभी चाय मंगाई है। ट्रेनों की लेटलतीफी यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब है।

उरई रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत काम चल रहा है। जिसकी वजह से फिलहाल कुछ समस्याएं हो रही हैं। काम तेजी से हो रहा है। जल्द काम पूरा होने के बाद यात्रियों को सहूलियत होगी। अन्य जो समस्याएं हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। -मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी मंडल

उरई। कोहरे का असर रेल संचालन पर पड़ रहा है। हालत यह है कि ट्रेन अब घंटों नहीं दिन के हिसाब से चल रही है। शनिवार को ग्वालियर से बरौनी और बरौनी से ग्वालियर जाने वाली छपरा मेल, अहमदाबाद से दरभंगा जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस और गोरखपुर से मुंबई जाने वाली गोरखपुर एक्सप्रेस समेत चार ट्रेनें रद रहीं।

इसके अलावा गोरखपुर से मुंबई जाने वाली संत कबीरनगर एक्सप्रेस ढाई घंटा, गोरखपुर से मुंबई जाने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस तीन घंटा, बनारस से अहमदाबाज जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस सात घंटा 53 मिनट, यशवंतपुर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन दो घंटा 53 मिनट, पनवेल से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन 10 घंटा देरी से आई। कानपुर से झांसी मेमू भी दो घंटे देरी से पहुंची। हैदराबाद से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन भी अपने निर्धारित समय से पांच घंटा देरी से आई। लखनऊ से मुंबई जाने वाली पुष्पक भी ढाई घंटे देरी से आई।
वहीं, सिकंदराबाद से गोरखपुर जाने वाली शुक्रवार की 7.45 बजे आने वाली ट्रेन शनिवार की दोपहर 2.47 बजे उरई पहुंची। यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से करीब 19 घंटा देरी से आई। इस ट्रेन में सवार यात्री सिद्धार्थनगर निवासी संजय ने बताया कि वह कार पेंटर हैं। वह जनरल कोच में यात्रा कर रहे है। सीट भी नहीं मिली है और ट्रेन भी दिन के हिसाब से लेट हो रही है। गोरखपुर निवासी आनंद के मुताबिक, जनरल कोच की यात्रा वैसे भी कठिन होती है। अब ट्रेन की लेटलतीफी ने मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। जहां भी ट्रेन खड़ी हो जाती है, वह लोग उतरकर प्लेटफार्म पर टहल लेते है। पता नहीं कब तक पहुंचेगी।



सर्दी के कारण लगातार और घंटों लेट हो रहीं ट्रेनों के चक्कर में यात्री अपने सही समय पर गंतव्य तक ही नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में उसका सफर करना ही बेकार साबित हो रहा है। शनिवार को इस समस्या से परेशान 19 यात्रियों ने अपने टिकट निरस्त करा दिए। पीआरओ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि ट्रेनें मौसम के कारण लेट हो रही हैं। कोहरा समाप्त होने के बाद लेटलतीफी दूर हो जाएगी।
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