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Jalaun News: न बिजली, न पानी, न सड़क और सालों से यही हाल बेधड़क
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उरई। शहर में करीब एक दर्जन नई बस्तियां तो बस गईं, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची। दुश्वारियों के बीच 20 हजार की आबादी जीवन यापन कर रही है। कहीं बिजली के लिए अलग से बांस लगाने पड़े तो कहीं खंभे डालकर अस्थाई सड़क बनाईं गईं। इन समस्याओं के बीच कई बार लोगों ने आवाज भी उठाई। जिम्मेदारों ने सुनवाई करने में आनाकानी कर दी। जिससे समस्या बढ़ती चली गई। खास बात यह है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आवास और आना-जाना इन बस्तियों के पास से रहता है। उसके बाद भी सालों से इन समस्याओं पर गौर नहीं किया गया।
कोंच रोड पर लॉ कॉलेज के पास पटेल नगर के नाम से वर्ष 2017 में एक नई बस्ती बसना शुरू हुई। करीब 250 घर हैं, जिसमें करीब डेढ़ हजार की आबादी रहती है। 20 से 50 मीटर तक लंबी 10 गलियां कच्ची हैं। नाली भी नहीं है। घरों का पानी खाली प्लॉटों में भर रहा है। 20 प्लाटों में पानी कई सालों से भरा है। बिजली के खंभे नहीं है। 500 मीटर तक लंबी केबल डालकर लोगों को बिजली सप्लाई घर तक लानी पड़ रही है। आसपास कुछ खंभे लगे हैं, लेकिन लाइन नहीं है, तार भी नहीं पड़े हैं। पानी के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है।
करसान रोड पर मंसूराबाद नाम से मोहल्ला है, उसके एक हिस्से में वर्ष 2014 के करीब से एक नई बस्ती बसना शुरू हुई थी। अब तक करीब 500 घर बस चुके हैं, जिसमें करीब ढाई हजार की आबादी रहती है। एक भी गली में सड़क नहीं बनी है। न ही कोई नाली का निर्माण हुआ। कच्ची सड़क पर खंभा और ईंट-पत्थर रखकर लोग निकलते हैं। 15 खाली प्लाटों व पांच सड़कों पर पानी भरा है। घरों में भी बारिश का पानी आ जाता है। पांच गलियों में बिजली के खंभे नहीं है। 300 मीटर दूर से केबल डालकर बिजली चलाई जा रही है। पानी के लिए कोई हैंडपंप भी नहीं है।
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सुशील नगर के पिछले इलाके में 300 घरों की आबादी बसी है। मोहल्ले में कोई ट्रांसफार्मर और खंभा नहीं है। यहां रह रहे परिवार करीब 600 मीटर दूर से केबल डालकर बिजली चला रहे हैं। कच्ची सड़कें हैं, बारिश दुश्वारियां बनती है। हैंडपंप और नलकूप नहीं है। बांस से बांधकर 100 से अधिक केबल डली हैं। बांस भी कई जगह पर टूटे हैं, दुर्घटनाएं होने का खतरा रहता है।
दूसरी बस्तियों में लगे बिजली के खंभों तक केबल डालकर बिजली चलाने को मजबूर इन बस्तियों के लोगों को कई बार केबल टूटने की फजीहत भी झेलनी पड़ती है।
करसान रोड निवासी मोहम्मद आजाद ने बताया कि दो साल पहले तक पानी की निकासी कुछ स्थानों पर हो जाती थी, लेकिन निर्माण के समय नाले को ऊंचा करवा दिया गया। जिससे घरों में पानी आने लगा है। घरों में सीलन और चटकन भी हो रही है।
मंसूराबाद निवासी शादाब ने बताया कि मोहल्ले में न ही पानी की निकासी हो रही और न पानी के लिए कोई व्यवस्था है। सड़क का निर्माण पांच से छह सालों से नहीं हुआ है। जिससे पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
सुशील नगर निवासी रामकिशोर गोस्वामी ने बताया कि आठ साल पहले घर बनवाया था। बिजली कनेक्शन तो मिल गया। बिजली के खंभे नहीं पहुंचे। मोहल्ले से 500 मीटर दूरी तक केबल डालनी पड़ रही है।
सुशील नगर निवासी अवधेश कुशवाहा ने बताया कि सड़क को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं। निर्माण सात सालों में नहीं हो सका। सड़क आज तक नहीं बन सकी। खाली प्लाटों में पानी भरा है। जिससे बीमारी फैल रही हैं।
शहर की नई बस्तियों की ओर पूर्व पालिकाध्यक्ष ने कोई ध्यान नहीं दिया। बजट का भी आभाव है। इस पर काम करने के लिए योजना तैयार की जा रही है। पानी और सड़क पर प्राथमिकता के साथ काम होगा।
मंसूराबाद में पेयजल लाइन को लेकर काम हुआ है। बस्तियों में सड़कें नहीं बनीं हैं। वहां काम कराया जाएगा। इन बस्तियों का सर्वे कर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का काम होगा। जो विकास नहीं हुआ है, वह कराया जाएगा।
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कोंच रोड पर लॉ कॉलेज के पास पटेल नगर के नाम से वर्ष 2017 में एक नई बस्ती बसना शुरू हुई। करीब 250 घर हैं, जिसमें करीब डेढ़ हजार की आबादी रहती है। 20 से 50 मीटर तक लंबी 10 गलियां कच्ची हैं। नाली भी नहीं है। घरों का पानी खाली प्लॉटों में भर रहा है। 20 प्लाटों में पानी कई सालों से भरा है। बिजली के खंभे नहीं है। 500 मीटर तक लंबी केबल डालकर लोगों को बिजली सप्लाई घर तक लानी पड़ रही है। आसपास कुछ खंभे लगे हैं, लेकिन लाइन नहीं है, तार भी नहीं पड़े हैं। पानी के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है।
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करसान रोड पर मंसूराबाद नाम से मोहल्ला है, उसके एक हिस्से में वर्ष 2014 के करीब से एक नई बस्ती बसना शुरू हुई थी। अब तक करीब 500 घर बस चुके हैं, जिसमें करीब ढाई हजार की आबादी रहती है। एक भी गली में सड़क नहीं बनी है। न ही कोई नाली का निर्माण हुआ। कच्ची सड़क पर खंभा और ईंट-पत्थर रखकर लोग निकलते हैं। 15 खाली प्लाटों व पांच सड़कों पर पानी भरा है। घरों में भी बारिश का पानी आ जाता है। पांच गलियों में बिजली के खंभे नहीं है। 300 मीटर दूर से केबल डालकर बिजली चलाई जा रही है। पानी के लिए कोई हैंडपंप भी नहीं है।
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सुशील नगर के पिछले इलाके में 300 घरों की आबादी बसी है। मोहल्ले में कोई ट्रांसफार्मर और खंभा नहीं है। यहां रह रहे परिवार करीब 600 मीटर दूर से केबल डालकर बिजली चला रहे हैं। कच्ची सड़कें हैं, बारिश दुश्वारियां बनती है। हैंडपंप और नलकूप नहीं है। बांस से बांधकर 100 से अधिक केबल डली हैं। बांस भी कई जगह पर टूटे हैं, दुर्घटनाएं होने का खतरा रहता है।
दूसरी बस्तियों में लगे बिजली के खंभों तक केबल डालकर बिजली चलाने को मजबूर इन बस्तियों के लोगों को कई बार केबल टूटने की फजीहत भी झेलनी पड़ती है।
करसान रोड निवासी मोहम्मद आजाद ने बताया कि दो साल पहले तक पानी की निकासी कुछ स्थानों पर हो जाती थी, लेकिन निर्माण के समय नाले को ऊंचा करवा दिया गया। जिससे घरों में पानी आने लगा है। घरों में सीलन और चटकन भी हो रही है।
मंसूराबाद निवासी शादाब ने बताया कि मोहल्ले में न ही पानी की निकासी हो रही और न पानी के लिए कोई व्यवस्था है। सड़क का निर्माण पांच से छह सालों से नहीं हुआ है। जिससे पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
सुशील नगर निवासी रामकिशोर गोस्वामी ने बताया कि आठ साल पहले घर बनवाया था। बिजली कनेक्शन तो मिल गया। बिजली के खंभे नहीं पहुंचे। मोहल्ले से 500 मीटर दूरी तक केबल डालनी पड़ रही है।
सुशील नगर निवासी अवधेश कुशवाहा ने बताया कि सड़क को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं। निर्माण सात सालों में नहीं हो सका। सड़क आज तक नहीं बन सकी। खाली प्लाटों में पानी भरा है। जिससे बीमारी फैल रही हैं।
शहर की नई बस्तियों की ओर पूर्व पालिकाध्यक्ष ने कोई ध्यान नहीं दिया। बजट का भी आभाव है। इस पर काम करने के लिए योजना तैयार की जा रही है। पानी और सड़क पर प्राथमिकता के साथ काम होगा।
मंसूराबाद में पेयजल लाइन को लेकर काम हुआ है। बस्तियों में सड़कें नहीं बनीं हैं। वहां काम कराया जाएगा। इन बस्तियों का सर्वे कर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का काम होगा। जो विकास नहीं हुआ है, वह कराया जाएगा।