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Jalaun News: पालिका के टेंडर-भुगतान जांच के घेरे में
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उरई। नगर पालिका परिषद उरई में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच तेज हो गई है। जांच अधिकारी एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही ने तीसरी बार पत्र जारी कर नगर पालिका प्रशासन से पिछले तीन वर्षों के आय-व्यय, विकास कार्यों, टेंडर और भुगतान से संबंधित सभी अभिलेख दस दिन के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद अब तक जांच टीम को मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
नगर पालिका के कई सभासदों ने अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपकर मामले की जांच की मांग की थी। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच की जिम्मेदारी एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही को सौंपी गई थी।
जांच अधिकारी ने पहले छह जुलाई को पत्र भेजकर पिछले तीन वर्षों के आय-व्यय, निविदाओं, भुगतान और विकास कार्यों से जुड़े अभिलेख मांगे थे। आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इसके बाद दोबारा पत्र भेजा गया, लेकिन तब भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। अब तीसरी बार पत्र जारी कर दस दिन के भीतर सभी अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन कार्यों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
नगर पालिका में कराए गए कई कार्य जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। इनमें रामकुंड के सुंदरीकरण, विभिन्न तालाबों के सौंदर्यीकरण, घंटाघर से जुड़े कार्यों और एलईडी बल्बों की खरीद से संबंधित खर्चों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ सामग्री चहेते ठेकेदारों और फर्मों से बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर खरीदी गई, जिससे नगर पालिका को आर्थिक नुकसान पहुंचा।
इसके अलावा रैन बसेरा निर्माण और उसके संचालन पर किए गए खर्च भी जांच के दायरे में हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस मामले में पहले भी जांच के दौरान कुछ भुगतानों पर रोक लगाई गई थी और अब फिर से इसकी जांच की मांग उठ रही है।
कई वार्डों में नालियों पर पुलिया और लोहे की जाली लगाए बिना ही भुगतान किए जाने की शिकायत भी सभासदों ने जांच अधिकारी से की है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर कार्य अधूरे रहे, जबकि भुगतान पूर्ण कार्य दिखाकर कर दिया गया।
सड़कों के निर्माण और मरम्मत कार्यों को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पिछले तीन वर्षों के अभिलेखों और भुगतानों की निष्पक्ष जांच कराई गई तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
सभासदों का आरोप है कि अभिलेख उपलब्ध कराने में हो रही देरी भी कई सवाल खड़े कर रही है। उनका कहना है कि यदि सभी दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए जाएं तो जांच जल्द पूरी हो सकती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।
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नगर पालिका के कई सभासदों ने अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपकर मामले की जांच की मांग की थी। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच की जिम्मेदारी एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही को सौंपी गई थी।
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जांच अधिकारी ने पहले छह जुलाई को पत्र भेजकर पिछले तीन वर्षों के आय-व्यय, निविदाओं, भुगतान और विकास कार्यों से जुड़े अभिलेख मांगे थे। आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इसके बाद दोबारा पत्र भेजा गया, लेकिन तब भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। अब तीसरी बार पत्र जारी कर दस दिन के भीतर सभी अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन कार्यों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
नगर पालिका में कराए गए कई कार्य जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। इनमें रामकुंड के सुंदरीकरण, विभिन्न तालाबों के सौंदर्यीकरण, घंटाघर से जुड़े कार्यों और एलईडी बल्बों की खरीद से संबंधित खर्चों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ सामग्री चहेते ठेकेदारों और फर्मों से बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर खरीदी गई, जिससे नगर पालिका को आर्थिक नुकसान पहुंचा।
इसके अलावा रैन बसेरा निर्माण और उसके संचालन पर किए गए खर्च भी जांच के दायरे में हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस मामले में पहले भी जांच के दौरान कुछ भुगतानों पर रोक लगाई गई थी और अब फिर से इसकी जांच की मांग उठ रही है।
कई वार्डों में नालियों पर पुलिया और लोहे की जाली लगाए बिना ही भुगतान किए जाने की शिकायत भी सभासदों ने जांच अधिकारी से की है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर कार्य अधूरे रहे, जबकि भुगतान पूर्ण कार्य दिखाकर कर दिया गया।
सड़कों के निर्माण और मरम्मत कार्यों को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पिछले तीन वर्षों के अभिलेखों और भुगतानों की निष्पक्ष जांच कराई गई तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
सभासदों का आरोप है कि अभिलेख उपलब्ध कराने में हो रही देरी भी कई सवाल खड़े कर रही है। उनका कहना है कि यदि सभी दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए जाएं तो जांच जल्द पूरी हो सकती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।