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चेयरमैन से लेकर विधायक तक बनीं महिला कांग्रेसी
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उरई। यूं तो आजादी के बाद से ही लोकसभा व विधानसभा चुनावों में महिला कांग्रेसियों की हिस्सेदारी काफी कम रही है। हालांकि जब-जब महिलाओं को पार्टी ने अवसर दिया उन्होंने जीत भी दर्ज कराई है। चेयरमैन से लेकर विधायक तक की कुर्सी पर कांग्रेस की महिला नेता पहुंची है। इस बार 2022 के विधान सभा चुनाव के लिए पार्टी प्रभारी प्रियंका वाड्रा गांधी ने 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का निर्णय लिया है। इससे महिला कांग्रेसियों में काफी उत्साह भी है। महिलाएं पार्टी का पूरा सम्मान बढ़ाने का काम करेंगी।
कांग्रेस में महिलाओं की ताकत का अंदाजा लगाने के लिए बहुत पीछे जाने की आवश्यकता भी नहीं है। बीते 2012 के ही विधानसभा चुनाव पर नजर डाल ली जाए तो जिले की तीन सीटों में सिर्फ एक सीट कालपी से कांग्रेस की उम्मीदवार उमाकांती थी। जिनके सामने भाजपा के कद्दावर नेता स्वतंत्र देव सिंह लड़ रहे थे। उस वक्त सरकार भले ही समाजवादी पार्टी की बनी पर कालपी से जीत का परचम उमाकांती ने ही उठाया। इसके बाद 2017 के पालिका चुनाव में कोंच सीट से कांग्रेस ने महिला उम्मीदवार सरिता आनंद अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया और सरिता ने भाजपा की लहर के बावजूद जीत कांग्रेस के खाते में डाल दी। फिर 2021 के जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में कैलिया सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी उर्मिला खाबरी सोनकर ने भाजपा के दिग्गज नेता शंभू दयाल को शिकस्त दी। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में उर्मिला को दूसरे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा। इससे पूर्व 2012 में उरई नगर पालिका सीट से प्रभा राजेश और कोंच विधानसभा सीट से सुशीला वर्मा को भी पार्टी ने टिकट देकर लड़ाया पर सफलता नहीं मिली। लिहाजा कहना गलत न होगा कि विपरीत परिस्तिथियों में भी कांग्रेस की महिला नेताओं ने जीत दर्ज करने का करिश्मा कर दिखाया है। वर्तमान में जिले में जिला मंहिला कांग्रेस कमेटी गठित है, जिसमें 22 पदाधिकारी है। ऐसे में तय है कि जनपद की किसी भी एक सीट पर तो महिला नेता का चुनावी मैदान में आना तय है। महिला कमेटी की जिलाध्यक्षा शकुंतला देवी और पार्टी के जिलाध्यक्ष दीपांशु समाधिया दोनों का कहना है कि महिलाएं किसी से कम नहीं है, पार्टी जिसे भी अवसर देगी, उसे भारी मतों से जीत भी दिलाई जाएगी।
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कांग्रेस में महिलाओं की ताकत का अंदाजा लगाने के लिए बहुत पीछे जाने की आवश्यकता भी नहीं है। बीते 2012 के ही विधानसभा चुनाव पर नजर डाल ली जाए तो जिले की तीन सीटों में सिर्फ एक सीट कालपी से कांग्रेस की उम्मीदवार उमाकांती थी। जिनके सामने भाजपा के कद्दावर नेता स्वतंत्र देव सिंह लड़ रहे थे। उस वक्त सरकार भले ही समाजवादी पार्टी की बनी पर कालपी से जीत का परचम उमाकांती ने ही उठाया। इसके बाद 2017 के पालिका चुनाव में कोंच सीट से कांग्रेस ने महिला उम्मीदवार सरिता आनंद अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया और सरिता ने भाजपा की लहर के बावजूद जीत कांग्रेस के खाते में डाल दी। फिर 2021 के जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में कैलिया सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी उर्मिला खाबरी सोनकर ने भाजपा के दिग्गज नेता शंभू दयाल को शिकस्त दी। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में उर्मिला को दूसरे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा। इससे पूर्व 2012 में उरई नगर पालिका सीट से प्रभा राजेश और कोंच विधानसभा सीट से सुशीला वर्मा को भी पार्टी ने टिकट देकर लड़ाया पर सफलता नहीं मिली। लिहाजा कहना गलत न होगा कि विपरीत परिस्तिथियों में भी कांग्रेस की महिला नेताओं ने जीत दर्ज करने का करिश्मा कर दिखाया है। वर्तमान में जिले में जिला मंहिला कांग्रेस कमेटी गठित है, जिसमें 22 पदाधिकारी है। ऐसे में तय है कि जनपद की किसी भी एक सीट पर तो महिला नेता का चुनावी मैदान में आना तय है। महिला कमेटी की जिलाध्यक्षा शकुंतला देवी और पार्टी के जिलाध्यक्ष दीपांशु समाधिया दोनों का कहना है कि महिलाएं किसी से कम नहीं है, पार्टी जिसे भी अवसर देगी, उसे भारी मतों से जीत भी दिलाई जाएगी।
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