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Jalaun News: महिला अस्पताल में शिशु के साथ मां होंगी और सुरक्षित
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उरई। महिला अस्पताल में प्रसव के बाद जच्चा की सुरक्षा अब और बढ़ जाएगी। अस्पताल में हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) यानि उच्च निर्भरता इकाई स्थापित हो गई है।
इस यूनिट में पांच बेड हैं, जो कि अत्याधुनिक मल्टी पैरामीटर युक्त हैं। प्रसव ऑपरेशन के बाद कम से कम छह घंटे तक महिला की इसी बेड पर मॉनिटरिंग होगी। मशीन के द्वारा महिला की हृदय गति, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन सैचुरेशन और पल्स रेट की रिपोर्ट हर पल डाक्टर को मिलती रहेगी। इसके लिए यूनिट में एक स्टाफ नर्स भी मौजूद रहेगी, जो इस पर निगरानी रखेगी। ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ने पर हर बेड के लिए एक सिलिंडर रिजर्व किया गया है।
महिला अस्पताल में एक महीने में 50 से 70 प्रसव होते हैं। एक दिन में कभी शून्य से पांच तक ऑपरेशन के केस आ जाते हैं। प्रभारी एनस्थीसिया डॉ. पवन कुमार बनाए गए हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रभाकर ने बताया कि ऑपरेशन के बाद छह घंटे तक मरीज की स्थिति संवेदनशील होती है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान बेहोश करने के लिए दी जाने वाली दवाओं के साथ कुछ अन्य दवाएं भी दी जाती हैं। जिनका असर बॉडी पर होता है। ऑपरेशन के बाद ये दवाएं चार से छह घंटे तक बॉडी में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
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इस दौरान मरीज को ब्लड प्रेशर, सांस संबंधित दिक्कत, हृदय गति या पल्स रेट संबंधित दिक्कत होने की आशंका रहती है। पहले जब यह यूनिट नहीं थी, मैनुअली नर्स को बार-बार मरीज के पास जाकर उसकी जांच करनी पड़ती थी। कई बार देरी से महिला मरीज की स्थिति का पता चल पाता था। लेकिन अब एचडीयू के आने से यह समस्या खत्म हो जाएगी। पूरे छह घंटे तक हर मरीज की निगरानी मशीन से होगी। उसके बाद यदि वह सामान्य स्थिति में है तो उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा, नहीं तो स्थिति सामान्य होने तक उसे इसी यूनिट में रखा जाएगा।
उमरारखेड़ा की चंद्रमुखी ने कहा कि हमारे कई रिश्तेदार महिला अस्पताल में भर्ती हुए। ऑपरेशन के बाद उन्हें काफी परेशानी होती थी। कई बार, वह अपनी बात सही समय पर नहीं बता पाती थीं। मशीन के बारे में बताया जा रहा है कि अब यह समस्या नहीं होगी।
रामनगर की पूनम ने कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज और देखभाल की कमी को लेकर कई लोग अफवाह फैलाते हैं। ऐसी यूनिट होगी तो कैसे महिलाओं को खतरा हो सकता है। इस मशीन के बारे में हमें जो बताया गया। वह जानकारी अपने गांव में भी लोगों को बताउंगी।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा ने बताया कि यूनिट बनकर तैयार हो चुकी है। जो थोड़ी बहुत कमियां थीं, उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। शुक्रवार को जिले के प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति अस्पताल का निरीक्षण करेंगे, उनसे ही इस यूनिट के उद्घाटन का अनुरोध किया जाएगा।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रभाकर ने बताया कि ऑपरेशन से महिलाएं काफी घबराती हैं। कई बार ऑपरेशन के बाद उनका यह डर उनकी तबीयत पर दिखने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि उन्हें अच्छी देखभाल मिले। मैनुअली देखभाल ठीक से नहीं हो पाती है। अत्याधुनिक मशीन के जरिए सटीक मॉनिटरिंग हो सकेगी।
उरई। जिला चिकित्सालय में लगभग पांच साल से रिक्त चल रहे सर्जन के पद पर डॉ. आदिल अंसारी को तैनाती मिली है। उन्होंने ज्वाइन भी कर लिया है। सीएमएस डॉ. अविनेश कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में सर्जन के दो पद हैं, जिसमें एक पर डॉ. केपी सिंह की तैनाती थी। दोनों पदों पर सर्जन की तैनाती होने से सर्जिकल मरीजों को नहीं भटकना पड़ेगा।
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इस यूनिट में पांच बेड हैं, जो कि अत्याधुनिक मल्टी पैरामीटर युक्त हैं। प्रसव ऑपरेशन के बाद कम से कम छह घंटे तक महिला की इसी बेड पर मॉनिटरिंग होगी। मशीन के द्वारा महिला की हृदय गति, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन सैचुरेशन और पल्स रेट की रिपोर्ट हर पल डाक्टर को मिलती रहेगी। इसके लिए यूनिट में एक स्टाफ नर्स भी मौजूद रहेगी, जो इस पर निगरानी रखेगी। ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ने पर हर बेड के लिए एक सिलिंडर रिजर्व किया गया है।
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महिला अस्पताल में एक महीने में 50 से 70 प्रसव होते हैं। एक दिन में कभी शून्य से पांच तक ऑपरेशन के केस आ जाते हैं। प्रभारी एनस्थीसिया डॉ. पवन कुमार बनाए गए हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रभाकर ने बताया कि ऑपरेशन के बाद छह घंटे तक मरीज की स्थिति संवेदनशील होती है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान बेहोश करने के लिए दी जाने वाली दवाओं के साथ कुछ अन्य दवाएं भी दी जाती हैं। जिनका असर बॉडी पर होता है। ऑपरेशन के बाद ये दवाएं चार से छह घंटे तक बॉडी में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
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इस दौरान मरीज को ब्लड प्रेशर, सांस संबंधित दिक्कत, हृदय गति या पल्स रेट संबंधित दिक्कत होने की आशंका रहती है। पहले जब यह यूनिट नहीं थी, मैनुअली नर्स को बार-बार मरीज के पास जाकर उसकी जांच करनी पड़ती थी। कई बार देरी से महिला मरीज की स्थिति का पता चल पाता था। लेकिन अब एचडीयू के आने से यह समस्या खत्म हो जाएगी। पूरे छह घंटे तक हर मरीज की निगरानी मशीन से होगी। उसके बाद यदि वह सामान्य स्थिति में है तो उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा, नहीं तो स्थिति सामान्य होने तक उसे इसी यूनिट में रखा जाएगा।
उमरारखेड़ा की चंद्रमुखी ने कहा कि हमारे कई रिश्तेदार महिला अस्पताल में भर्ती हुए। ऑपरेशन के बाद उन्हें काफी परेशानी होती थी। कई बार, वह अपनी बात सही समय पर नहीं बता पाती थीं। मशीन के बारे में बताया जा रहा है कि अब यह समस्या नहीं होगी।
रामनगर की पूनम ने कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज और देखभाल की कमी को लेकर कई लोग अफवाह फैलाते हैं। ऐसी यूनिट होगी तो कैसे महिलाओं को खतरा हो सकता है। इस मशीन के बारे में हमें जो बताया गया। वह जानकारी अपने गांव में भी लोगों को बताउंगी।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा ने बताया कि यूनिट बनकर तैयार हो चुकी है। जो थोड़ी बहुत कमियां थीं, उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। शुक्रवार को जिले के प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति अस्पताल का निरीक्षण करेंगे, उनसे ही इस यूनिट के उद्घाटन का अनुरोध किया जाएगा।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रभाकर ने बताया कि ऑपरेशन से महिलाएं काफी घबराती हैं। कई बार ऑपरेशन के बाद उनका यह डर उनकी तबीयत पर दिखने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि उन्हें अच्छी देखभाल मिले। मैनुअली देखभाल ठीक से नहीं हो पाती है। अत्याधुनिक मशीन के जरिए सटीक मॉनिटरिंग हो सकेगी।
उरई। जिला चिकित्सालय में लगभग पांच साल से रिक्त चल रहे सर्जन के पद पर डॉ. आदिल अंसारी को तैनाती मिली है। उन्होंने ज्वाइन भी कर लिया है। सीएमएस डॉ. अविनेश कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में सर्जन के दो पद हैं, जिसमें एक पर डॉ. केपी सिंह की तैनाती थी। दोनों पदों पर सर्जन की तैनाती होने से सर्जिकल मरीजों को नहीं भटकना पड़ेगा।