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मलंगा नाला घोटाला: डीएम ने दिया जांच का आदेश
Sat, 25 May 2024 12:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sat, 25 May 2024 12:30 AM IST
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उरई। जिस बुंदेलखंड में पानी की व्यवस्था ठीक करने के लिए करोड़ों रुपये का बजट केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी हुआ। वह बजट जालौन की बेतवा नहर विभाग में हेराफेरी की भेंट चढ़ गया। बेतवा नदी की ब्रांच मलंगा नाले में 34 लाख रुपये के टेंडर के बाद बिना काम कराए पैसा हजम करने का मामला सिर्फ बानगी भर है।
पानी के इस खेल में अभी कई और परतें खुलनी बाकी हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में छोटे टेंडर जारी कर धन की बंदरबांट की खबर छपने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। वहीं, जांच की आंच में मामले में लिप्त कई और अफसरों के पसीने छूटने लगे हैं।
मलंगा नाला में सिल्ट सफाई के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान पर बेतवा नहर विभाग की वित्तीय अनियमितताओं पर डीएम राजेश कुमार पांडेय ने पूरे मामले की हकीकत परखने के लिए सीडीओ स्तर पर जांच बैठा दी है। सीडीओ स्तर पर पांच सदस्यों की टीम बनेगी, जो लगातार सात दिन इस पूरे मामले की जांच करेगी। उसके बाद रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
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बेतवा नदी की ब्रांच मलंगा नाला किसानों की जमीनों की सिंचाई के लिए जीवनदायी बना हुआ है। यह बेतवा ब्रांच का नाला जालौन से औरैया की तरफ गया है। इस नाले के जरिए किसान अपने खेतों में सिंचाई करते हैं। इस नाले की सफाई के लिए नहर विभाग ने जनवरी माह में कई टुकड़ों में टेंडर किए। फरवरी माह में सफाई के लिए बजट पास भी हो गया। टेंडर के बाद मार्च में भुगतान भी हो गया। लेकिन मौके पर किसी भी प्रकार का कोई काम नहीं किया गया।
जब इसकी शिकायत की गई तो अमर उजाला की संवाद न्यूज एजेंसी ने गुरुवार को तीन जगहों पर पड़ताल की। जिन स्थानों पर करीब 34 लाख से काम नहर विभाग होना बता रहा है। उस पड़ताल को शुक्रवार के अंक में प्रकाशित किया। पड़ताल के बाद डीएम ने मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी।
घोटाले की कई परतें अभी खुलना बाकी
बेतवा नहर के मलंगा नाले की सिल्ट सफाई के लिए करीब 11 टेंडर किए गए। चार टेंडर एक साथ हुए। सात टेंडर अलग हुए। जो चार टेंडर हुए हैं। उनमें से तीन जगहों पर पड़ताल की गई। वहां पर कोई काम नहीं मिला। बाकी एक जगह पर काम करवाने में विभागीय खानापूर्ति की शिकायत है। वहां पर भी मानकों को दरकिनार कर कोई काम नहीं हुआ। वहीं जो सात टेंडर हुए हैं। उनमें भी गड़बड़ी की बात की जा रही है। इस घोटाले में अभी कई परतें अभी खुलना बाकी हैं। जो जांच के दौरान जल्द ही सामने आ जाएंगी।
अगर हुआ काम तो कैसे उगे पेड़-पौधे
नहर विभाग ने अपनी तरफ से दावा किया था कि उसने काम कराया है। अगर इन स्थानों पर काम हुआ है तो इतने जल्दी पेड़ पौधे और झाड़ियां कैसे उग आई हैं। इस संबंध में जब वन विभाग की डीएफओ प्रदीप कुमार से बात की गई। जब उन्हेें मौके की फोटो दिखाई गई तो उन्होंने बताया कि पेड़ के तने से उसकी उम्र पता चल जाती है। जो पेड़-पौधे नाले में लगे हुए हैं। पेड़ों की उम्र दो साल से ज्यादा है तो वहीं पौधे भी एक साल से ज्यादा पुराने दिखते हैं। बोले, दो से तीन महीने में यह पेड़-पौधे इतने बड़े नहीं हो सकते हैं। नाले के किनारे लगे एक पौध को पेड़ बनने में चार से पांच महीने लग जाते हैं। उसके बाद उनमें तना आता है। जो उसकी उम्र बताता है।
वर्जन -
प्रकरण संज्ञान में आया है। जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नामित किया गया है।सीडीओ द्वारा कमेटी बना कर जांच की जा रही है। जांच की रिपोर्ट सात दिन के अंदर प्रेषित करने को कहा गया है। -राजेश पांडेय, जिलाधिकारी
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पानी के इस खेल में अभी कई और परतें खुलनी बाकी हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में छोटे टेंडर जारी कर धन की बंदरबांट की खबर छपने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। वहीं, जांच की आंच में मामले में लिप्त कई और अफसरों के पसीने छूटने लगे हैं।
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मलंगा नाला में सिल्ट सफाई के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान पर बेतवा नहर विभाग की वित्तीय अनियमितताओं पर डीएम राजेश कुमार पांडेय ने पूरे मामले की हकीकत परखने के लिए सीडीओ स्तर पर जांच बैठा दी है। सीडीओ स्तर पर पांच सदस्यों की टीम बनेगी, जो लगातार सात दिन इस पूरे मामले की जांच करेगी। उसके बाद रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
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बेतवा नदी की ब्रांच मलंगा नाला किसानों की जमीनों की सिंचाई के लिए जीवनदायी बना हुआ है। यह बेतवा ब्रांच का नाला जालौन से औरैया की तरफ गया है। इस नाले के जरिए किसान अपने खेतों में सिंचाई करते हैं। इस नाले की सफाई के लिए नहर विभाग ने जनवरी माह में कई टुकड़ों में टेंडर किए। फरवरी माह में सफाई के लिए बजट पास भी हो गया। टेंडर के बाद मार्च में भुगतान भी हो गया। लेकिन मौके पर किसी भी प्रकार का कोई काम नहीं किया गया।
जब इसकी शिकायत की गई तो अमर उजाला की संवाद न्यूज एजेंसी ने गुरुवार को तीन जगहों पर पड़ताल की। जिन स्थानों पर करीब 34 लाख से काम नहर विभाग होना बता रहा है। उस पड़ताल को शुक्रवार के अंक में प्रकाशित किया। पड़ताल के बाद डीएम ने मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी।
घोटाले की कई परतें अभी खुलना बाकी
बेतवा नहर के मलंगा नाले की सिल्ट सफाई के लिए करीब 11 टेंडर किए गए। चार टेंडर एक साथ हुए। सात टेंडर अलग हुए। जो चार टेंडर हुए हैं। उनमें से तीन जगहों पर पड़ताल की गई। वहां पर कोई काम नहीं मिला। बाकी एक जगह पर काम करवाने में विभागीय खानापूर्ति की शिकायत है। वहां पर भी मानकों को दरकिनार कर कोई काम नहीं हुआ। वहीं जो सात टेंडर हुए हैं। उनमें भी गड़बड़ी की बात की जा रही है। इस घोटाले में अभी कई परतें अभी खुलना बाकी हैं। जो जांच के दौरान जल्द ही सामने आ जाएंगी।
अगर हुआ काम तो कैसे उगे पेड़-पौधे
नहर विभाग ने अपनी तरफ से दावा किया था कि उसने काम कराया है। अगर इन स्थानों पर काम हुआ है तो इतने जल्दी पेड़ पौधे और झाड़ियां कैसे उग आई हैं। इस संबंध में जब वन विभाग की डीएफओ प्रदीप कुमार से बात की गई। जब उन्हेें मौके की फोटो दिखाई गई तो उन्होंने बताया कि पेड़ के तने से उसकी उम्र पता चल जाती है। जो पेड़-पौधे नाले में लगे हुए हैं। पेड़ों की उम्र दो साल से ज्यादा है तो वहीं पौधे भी एक साल से ज्यादा पुराने दिखते हैं। बोले, दो से तीन महीने में यह पेड़-पौधे इतने बड़े नहीं हो सकते हैं। नाले के किनारे लगे एक पौध को पेड़ बनने में चार से पांच महीने लग जाते हैं। उसके बाद उनमें तना आता है। जो उसकी उम्र बताता है।
वर्जन -
प्रकरण संज्ञान में आया है। जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नामित किया गया है।सीडीओ द्वारा कमेटी बना कर जांच की जा रही है। जांच की रिपोर्ट सात दिन के अंदर प्रेषित करने को कहा गया है। -राजेश पांडेय, जिलाधिकारी