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दोहरे हत्याकांड में पिता-पुत्र को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 20 Dec 2016 11:02 PM IST
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पुरानी रंजिश में मां-बेटे को दिनदहाडे़ गोली मारकर मौत के घाट उतारने के मामले में दोष सिद्ध होने पर एएसजे/एफटीसी के जज नरेंद्र कुमार तृतीय ने अभियुक्त पिता पुत्र को आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा होने पर पीड़ित पक्ष ने खुशी जताई है। 14 नवंबर 2013 की सुबह करीब नौ बजे आटा थान व कस्बा निवासी प्रेमशंकर का
पुत्र अजय तिवारी (18)घर के दरवाजे पर खड़ा था और मां शिवदेवी झाड़ू लगा रही थी। पिता प्रेमशंकर डाक बांटने ड्यूटी पर जा रहे थे। वह घर से चंद कदम दूर निकले ही थे कि उन्हें फायरिंग की आवाज सुनाई दी। इस पर वह वापस घर आए। उन्हाेंने देखा कि हमलावर कैलाश शंकर तिवारी हाथ मेें तमंचा लिए व उसका पुत्र अनूप तिवारी अपने पिता की
लाइसेंसी बंदूक लिए उनके दरवाजे से भाग रहे थे। इन लोगों ने उसके पुत्र व पत्नी को गोली मार दी थी। यह देख प्रेमशंकर सहम गया और वहीं छिप गया। उधर, हमलावर फायरिंग करते हुए भाग निकले। इसके बाद प्रेमशंकर ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर जब तक पुलिस पहुंची तब तक मां-बेटे की मौत हो चुकी थी। प्रेमशंकर की तहरीर पर हमलावर कैलाश शंकर
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तिवारी व उसके पुत्र अनूप तिवारी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्जकर पुलिस ने आरोपियाें को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही हत्या में प्रयुक्त लाइसेेंसी एकनाली बंदूक व तमंचा बरामद कर उन्हें जेल भेज दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई एएसजे/एफटीसी जज नरेंद्र कुमार तृतीय ने दोनाें
पक्षाें के गवाहाें व अधिवक्ताओं की जिरह सुनने के बाद आरोपी पिता पुत्र पर दोष सिद्ध हो जाने पर उन्हें आजीवन कारावास व 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता भगवती प्रसाद तिवारी ने की।
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पुत्र अजय तिवारी (18)घर के दरवाजे पर खड़ा था और मां शिवदेवी झाड़ू लगा रही थी। पिता प्रेमशंकर डाक बांटने ड्यूटी पर जा रहे थे। वह घर से चंद कदम दूर निकले ही थे कि उन्हें फायरिंग की आवाज सुनाई दी। इस पर वह वापस घर आए। उन्हाेंने देखा कि हमलावर कैलाश शंकर तिवारी हाथ मेें तमंचा लिए व उसका पुत्र अनूप तिवारी अपने पिता की
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लाइसेंसी बंदूक लिए उनके दरवाजे से भाग रहे थे। इन लोगों ने उसके पुत्र व पत्नी को गोली मार दी थी। यह देख प्रेमशंकर सहम गया और वहीं छिप गया। उधर, हमलावर फायरिंग करते हुए भाग निकले। इसके बाद प्रेमशंकर ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर जब तक पुलिस पहुंची तब तक मां-बेटे की मौत हो चुकी थी। प्रेमशंकर की तहरीर पर हमलावर कैलाश शंकर
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तिवारी व उसके पुत्र अनूप तिवारी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्जकर पुलिस ने आरोपियाें को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही हत्या में प्रयुक्त लाइसेेंसी एकनाली बंदूक व तमंचा बरामद कर उन्हें जेल भेज दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई एएसजे/एफटीसी जज नरेंद्र कुमार तृतीय ने दोनाें
पक्षाें के गवाहाें व अधिवक्ताओं की जिरह सुनने के बाद आरोपी पिता पुत्र पर दोष सिद्ध हो जाने पर उन्हें आजीवन कारावास व 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता भगवती प्रसाद तिवारी ने की।