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कृषि कानूनों की वापसी पर किसान संगठन खुश
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किसान कानून बिल किसान कानून बिल वापस लेने की घोषणा पर खुशी जताते भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्री?
- फोटो : ORAI
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उरई। प्रधानमंत्री द्वारा तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा पर किसान संगठन खुश हैं। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार ने कहा कि संसद में ही इन तीनों कानूनों को जल्द रद्द किया जाए।
चौधरी चरण सिंह इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में भाकियू कार्यकर्ताओं ने कानून कानूनों की वापसी पर मिठाई बांटकर खुशी जताई। बलराम लंबरदार ने कहा कि अभी किसानों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। किसानों की मांगें एमएसपी को कानूनीजामा पहनाने, बिजली की दरें अन्य राज्यों के समान करने, पराली जलाने के अधिनियम को समाप्त करने की मांग की गई। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक कर किसानों की समस्याओं को निपटाने का काम किया जाए।
उधर, कृषि कानूनों को वापस लेने की पीएम मोदी की घोषणा पर गल्ला मंडी उरई में जाकर किसानों का माला डालकर एव मिठाई खिलाकर सपाइयों ने खुशी जताई। सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष महेश द्विवेदी, अनुरुद्ध द्विवेदी ने कहा कि यह आधी-अधूरी खुशी है। इस दौरान अध्यक्ष पम्मी सेठ, अतुल गुप्ता, प्रेमकिशोर, सत्यप्रकाश, अशोक, रमजानी, बाबूलाल आदि मौजूद रहे। उधर, किसान संघर्ष मोर्चा की बैठक में भी कानून वापसी की घोषणा पर खुशी जताई गई। मोर्चा संयोजक कामरेड कैलाश पाठक, प्रदीप दीक्षित, रेहान सिद्दीकी, गिरेंद्र सिंह, शफीकुर्रहमान कश्पी, राजकुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।
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कानूनों की वापसी किसानों की जीत
कृषि कानून वापस लेने की घोषणा करने पर स्वराज इंडिया पार्टी के जिलाध्यक्ष पंकज सहाय ने हर्ष जताया और इसे किसानों की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि तीनों कानून किसानों के लिए अहितकारी थे। जिसमें 700 के करीब किसानों की मौत भी हो चुकी है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विवश होकर उन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया गया है।
कानूनों को वापस लेने की घोषणा छलावा
कोंच संवाद के अनुसार शुक्रवार को वरिष्ठ सपा नेता व नगर के प्रमुख समाजसेवी अनिल वैद ने पीएम की घोषणा को लेकर कहा कि यह सिर्फ छलावा है। यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार के पतन व सपा के सत्ता में आने की स्थिति बनती देख प्रधानमंत्री ने यूपी में सरकार बचाने की आखिरी कोशिश की है। किसान इनके झांसे में आने वाला नहीं है। पत्रकार वार्ता में सपा व्यापार सभा के जिलाध्यक्ष मनोज, हरिश्चंद्र तिवारी, कृष्णबिहारी कुशवाहा भी मौजूद रहे।
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चौधरी चरण सिंह इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में भाकियू कार्यकर्ताओं ने कानून कानूनों की वापसी पर मिठाई बांटकर खुशी जताई। बलराम लंबरदार ने कहा कि अभी किसानों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। किसानों की मांगें एमएसपी को कानूनीजामा पहनाने, बिजली की दरें अन्य राज्यों के समान करने, पराली जलाने के अधिनियम को समाप्त करने की मांग की गई। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक कर किसानों की समस्याओं को निपटाने का काम किया जाए।
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उधर, कृषि कानूनों को वापस लेने की पीएम मोदी की घोषणा पर गल्ला मंडी उरई में जाकर किसानों का माला डालकर एव मिठाई खिलाकर सपाइयों ने खुशी जताई। सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष महेश द्विवेदी, अनुरुद्ध द्विवेदी ने कहा कि यह आधी-अधूरी खुशी है। इस दौरान अध्यक्ष पम्मी सेठ, अतुल गुप्ता, प्रेमकिशोर, सत्यप्रकाश, अशोक, रमजानी, बाबूलाल आदि मौजूद रहे। उधर, किसान संघर्ष मोर्चा की बैठक में भी कानून वापसी की घोषणा पर खुशी जताई गई। मोर्चा संयोजक कामरेड कैलाश पाठक, प्रदीप दीक्षित, रेहान सिद्दीकी, गिरेंद्र सिंह, शफीकुर्रहमान कश्पी, राजकुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।
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कानूनों की वापसी किसानों की जीत
कृषि कानून वापस लेने की घोषणा करने पर स्वराज इंडिया पार्टी के जिलाध्यक्ष पंकज सहाय ने हर्ष जताया और इसे किसानों की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि तीनों कानून किसानों के लिए अहितकारी थे। जिसमें 700 के करीब किसानों की मौत भी हो चुकी है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विवश होकर उन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया गया है।
कानूनों को वापस लेने की घोषणा छलावा
कोंच संवाद के अनुसार शुक्रवार को वरिष्ठ सपा नेता व नगर के प्रमुख समाजसेवी अनिल वैद ने पीएम की घोषणा को लेकर कहा कि यह सिर्फ छलावा है। यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार के पतन व सपा के सत्ता में आने की स्थिति बनती देख प्रधानमंत्री ने यूपी में सरकार बचाने की आखिरी कोशिश की है। किसान इनके झांसे में आने वाला नहीं है। पत्रकार वार्ता में सपा व्यापार सभा के जिलाध्यक्ष मनोज, हरिश्चंद्र तिवारी, कृष्णबिहारी कुशवाहा भी मौजूद रहे।