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हर हर महादेव, बम भोले के जयकारों से गुंजायमान रहे शिवालय
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जालौन में नर्मदेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना करती युवतियां।
- फोटो : ORAI
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उरई/जालौन। सावन के तीसरे सोमवार को नगर के सभी शिव मंदिरों पर शिव भक्तों का सुबह से ही तांता लगा रहा। महादेव एवं बम भोले के जयकारों से पूरा नगर गुंजायमान रहा। औरैया रोड स्थित प्राचीन नर्मदेश्वर शिव मंदिर पर शिव भक्तों की पूरे दिन भीड़ उमड़ी रही।
सावन के महीने में सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। शिवभक्त शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा के अलावा दूध, शहद, गंगाजल से महाकाल का अभिषेक कर पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न कर रहे हैं। नगर में स्थित नर्मदेश्वर शिव मंदिर में पूरे सावन के महीने में शिव भक्तों की भीड़ आती रहती है। बताया जाता है कि इस मंदिर में शिवलिंग को नर्मदा नदी से प्राप्त किया गया था। इसीलिए इस मंदिर का नाम नर्मदेश्वर महादेव रखा गया है। इस मंदिर का निर्माण लगभग आधी सदी पूर्व किया गया था। बाद में इसका जीर्णोद्धार भी हुआ। उधर, संस्कृत महाविद्यालय में रुद्राभिषेक आदि चलते रहे।
जलाभिषेक कर पूजन किया
कोंच संवाद के अनुसार शिव मंदिरों में बम-बम भोले की स्वर लहरियां भोर से ही सुनाई देने लगीं थीं। भक्तों ने आशुतोष भगवान शिव का जलाभिषेक कर आक धतूरा, बेलपत्र और पुष्प चढ़ा कर पूजन किया। तीसरे सोमवार को नगर व क्षेत्र के शिवालयों में भारी भीड़ जुटी। भोर से ही शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नगर के बाहरी इलाकों में अवस्थित शिव मंदिरों झलेश्वर व पठेश्वर में भी श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे। नगर के बीचों बीच चंदकुआं स्थित भूतेश्वर मंदिर पर सुबह से ही महिलाओं का तांता जलाभिषेक के लिए शुरू हो गया था। भगवान मारकंडेश्वर महाराज के मंदिर में भी भक्त श्रद्धाल उनकी पूजा में लीन दिखे। नईबस्ती स्थित सिद्घेश्वर मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर (नायक के मठ) में भी शिवभक्तों की भारी भीड़ रही। गुप्तेश्वर, बक्सेश्वर, पीपलेश्वर, यादवेश्वर आदि शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़ में महिलाओं की संख्या ज्यादा रही।
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सावन के महीने में सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। शिवभक्त शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा के अलावा दूध, शहद, गंगाजल से महाकाल का अभिषेक कर पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न कर रहे हैं। नगर में स्थित नर्मदेश्वर शिव मंदिर में पूरे सावन के महीने में शिव भक्तों की भीड़ आती रहती है। बताया जाता है कि इस मंदिर में शिवलिंग को नर्मदा नदी से प्राप्त किया गया था। इसीलिए इस मंदिर का नाम नर्मदेश्वर महादेव रखा गया है। इस मंदिर का निर्माण लगभग आधी सदी पूर्व किया गया था। बाद में इसका जीर्णोद्धार भी हुआ। उधर, संस्कृत महाविद्यालय में रुद्राभिषेक आदि चलते रहे।
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जलाभिषेक कर पूजन किया
कोंच संवाद के अनुसार शिव मंदिरों में बम-बम भोले की स्वर लहरियां भोर से ही सुनाई देने लगीं थीं। भक्तों ने आशुतोष भगवान शिव का जलाभिषेक कर आक धतूरा, बेलपत्र और पुष्प चढ़ा कर पूजन किया। तीसरे सोमवार को नगर व क्षेत्र के शिवालयों में भारी भीड़ जुटी। भोर से ही शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नगर के बाहरी इलाकों में अवस्थित शिव मंदिरों झलेश्वर व पठेश्वर में भी श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे। नगर के बीचों बीच चंदकुआं स्थित भूतेश्वर मंदिर पर सुबह से ही महिलाओं का तांता जलाभिषेक के लिए शुरू हो गया था। भगवान मारकंडेश्वर महाराज के मंदिर में भी भक्त श्रद्धाल उनकी पूजा में लीन दिखे। नईबस्ती स्थित सिद्घेश्वर मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर (नायक के मठ) में भी शिवभक्तों की भारी भीड़ रही। गुप्तेश्वर, बक्सेश्वर, पीपलेश्वर, यादवेश्वर आदि शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़ में महिलाओं की संख्या ज्यादा रही।
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