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Jalaun News: महिला मेठ पर एफआईआर के निर्देश, मौके पर नहीं मिला कोई काम
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माधौगढ़। तहसील क्षेत्र के ग्राम सोप्ता में चकबंध निर्माण में कागजों पर फर्जी हाजिरी दर्ज कर मनरेगा कार्य दिखाने के मामले में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। बीडीओ की गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने बिना मजदूरों की मौजूदगी के एमएमएस (मस्टर रोल हाजिरी) किए जाने की पुष्टि की है। बीडीओ ने ग्राम सचिव विवेक गौड़ को महिला मेठ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि ग्राम सोप्ता में शैलेंद्र सिंह के खेत से छोटे मुन्ना के खेत तक चकबंध निर्माण कार्य कराया जाना दर्शाया गया था। अभिलेखों में 88 मजदूरों के कार्यरत होने का उल्लेख किया गया। आरोप है कि पंचायत कर्मी द्वारा दो महिलाओं के बंगाल चुनाव संबंधी टीवी स्क्रीनशॉट का उपयोग कर एमएमएस दर्ज किया गया। एक पुरुष मजदूर के नाम पर फर्जी आधार कार्ड लगाया गया। इस मामले को बुधवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ संदीप मिश्रा ने अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनोज वर्मा, जेई एमआई विपिन कुमार और एडीओ आईएसबी नौशाद अली की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर मौके पर जांच के निर्देश दिए थे। जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि न तो चकबंध निर्माण कार्य चल रहा था और न ही वहां कोई मजदूर कार्यरत मिला।
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जांच में सामने आया कि पंचायत मित्र के हड़ताल पर होने के दौरान महिला मेठ वंदना देवी ने घर बैठे फर्जी तरीके से एमएमएस दर्ज की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया महिला मेठ को दोषी ठहराते हुए रिपोर्ट बीडीओ को सौंप दी।
बीडीओ संदीप मिश्रा ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर महिला मेठ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सघन जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
वहीं समाजसेवी अरविंद सिंह और शिवबालक सिंह ने आरोप लगाया कि ब्लॉक माधौगढ़ के गांवों में फर्जी चकबंध निर्माण और फर्जी मजदूरों के खातों में भुगतान भेजे जाने की शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं। उनका कहना है कि प्रधानाचार्य, प्रबंधक, अध्यापक और बुजुर्गों के नाम पर भी फर्जी जॉब कार्ड बनाकर भुगतान किए जाने की शिकायतें दी गईं, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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गौरतलब है कि ग्राम सोप्ता में शैलेंद्र सिंह के खेत से छोटे मुन्ना के खेत तक चकबंध निर्माण कार्य कराया जाना दर्शाया गया था। अभिलेखों में 88 मजदूरों के कार्यरत होने का उल्लेख किया गया। आरोप है कि पंचायत कर्मी द्वारा दो महिलाओं के बंगाल चुनाव संबंधी टीवी स्क्रीनशॉट का उपयोग कर एमएमएस दर्ज किया गया। एक पुरुष मजदूर के नाम पर फर्जी आधार कार्ड लगाया गया। इस मामले को बुधवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
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मामले को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ संदीप मिश्रा ने अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनोज वर्मा, जेई एमआई विपिन कुमार और एडीओ आईएसबी नौशाद अली की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर मौके पर जांच के निर्देश दिए थे। जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि न तो चकबंध निर्माण कार्य चल रहा था और न ही वहां कोई मजदूर कार्यरत मिला।
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जांच में सामने आया कि पंचायत मित्र के हड़ताल पर होने के दौरान महिला मेठ वंदना देवी ने घर बैठे फर्जी तरीके से एमएमएस दर्ज की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया महिला मेठ को दोषी ठहराते हुए रिपोर्ट बीडीओ को सौंप दी।
बीडीओ संदीप मिश्रा ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर महिला मेठ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सघन जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
वहीं समाजसेवी अरविंद सिंह और शिवबालक सिंह ने आरोप लगाया कि ब्लॉक माधौगढ़ के गांवों में फर्जी चकबंध निर्माण और फर्जी मजदूरों के खातों में भुगतान भेजे जाने की शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं। उनका कहना है कि प्रधानाचार्य, प्रबंधक, अध्यापक और बुजुर्गों के नाम पर भी फर्जी जॉब कार्ड बनाकर भुगतान किए जाने की शिकायतें दी गईं, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।