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पहल: बुजुर्ग सिखा रहे बच्चों को दिवारी नृत्य
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कोंच। संरक्षण के अभाव में लुप्त प्राय होती जा रही दिवारी नृत्य की लोक संस्कृति को बचाने और लोक परंपराओं को जीवित रखने की पहल नगर में की गई है। मां श्यामा देवी दिवारी नृत्य नामक संस्था ने भगत सिंह नगर में टीम बनाई है. जिसमें शामिल बुजुर्ग प्रशिक्षकों ने बच्चों को बुधवार की रात से अभ्यास कराना भी शुरू कर दिया है।
इस पारंपरिक दिवारी नृत्य में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी भाग ले रहे हैं। करीब 15 सदस्यीय टीम एक साथ रहकर ढोलक की थाप पर नृत्य का अभ्यास कराती है। बच्चे हाथों में लकड़ी के डंडे और लाठियां लेकर पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हैं। इसे देखने के लिए रोजाना आसपास के लोग जुटते हैं। यह नृत्य परंपरा दशहरा से शुरू होकर दिवाली तक चलती है।
इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नंदू चिकवा बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। टीम के संरक्षक किशोरी लाल कुशवाहा हैं। इसके साथ त्यागी मास्टर, किशोरी लाल उर्फ पप्पू वर्मा, किशन लाल, कमलेश कुशवाहा, चंद्रभान अहिरवार, भवानी शंकर भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिवारी नृत्य बुंदेलखंड की आत्मा है, इस तरह की पहल समाज में लोक संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाती हैं। ऐसे निशुल्क कार्यक्रम की वह तारीफ करते हैं जो हमारी आने वाली पीढ़ी को दिवारी नृत्य के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
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इस पारंपरिक दिवारी नृत्य में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी भाग ले रहे हैं। करीब 15 सदस्यीय टीम एक साथ रहकर ढोलक की थाप पर नृत्य का अभ्यास कराती है। बच्चे हाथों में लकड़ी के डंडे और लाठियां लेकर पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हैं। इसे देखने के लिए रोजाना आसपास के लोग जुटते हैं। यह नृत्य परंपरा दशहरा से शुरू होकर दिवाली तक चलती है।
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इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नंदू चिकवा बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। टीम के संरक्षक किशोरी लाल कुशवाहा हैं। इसके साथ त्यागी मास्टर, किशोरी लाल उर्फ पप्पू वर्मा, किशन लाल, कमलेश कुशवाहा, चंद्रभान अहिरवार, भवानी शंकर भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिवारी नृत्य बुंदेलखंड की आत्मा है, इस तरह की पहल समाज में लोक संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाती हैं। ऐसे निशुल्क कार्यक्रम की वह तारीफ करते हैं जो हमारी आने वाली पीढ़ी को दिवारी नृत्य के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
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