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Jalaun News: सर्वे में तिल बन गया ज्वार तो कहीं परती

Fri, 23 Oct 2026 01:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 01:15 AM IST
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In the survey, what was recorded as sesame turned out to be sorghum in some places, while in others, it was classified as fallow land.
फोटो - 10 रामबाबू पटेल। - फोटो : Samvad
आटा/कोंच। खेतों में तिल की फसल बोने के बाद भी किसानों को सरकारी सहायता के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कहीं तिल के स्थान पर ज्वार तो कहीं खेत को परती दर्ज कर दिया गया है। खसरा और ऑनलाइन रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण किसानों के सामने फसल नुकसान का मुआवजा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ पाने का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने सर्वे में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोबारा जांच और अभिलेखों में सुधार की मांग की है।
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कालपी तहसील के अकबरपुर इटौरा गांव में बारिश से तिल की फसल बर्बाद होने के बाद कराए गए सर्वे में खेतों में ज्वार दर्ज कर दी गई। वहीं, कुछ किसानों के खेतों में यूकेलिप्टस के पौधे लगे होने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में तिल की फसल दर्ज है। किसानों का कहना है कि गलत प्रविष्टियों के चलते उन्हें सरकारी सहायता मिलने में परेशानी हो रही है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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अकबरपुर इटौरा निवासी किसान जगदीश प्रसाद ने बताया कि उन्होंने साढ़े तीन बीघा खेत में तिल बोई थी। बारिश से फसल खराब हो गई, लेकिन नुकसान के सर्वे के बाद खसरे में तिल के स्थान पर ज्वार की फसल दर्ज मिली। इससे मुआवजे का लाभ मिलने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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आठ बीघा में तिल की फसल बर्बाद

अकबरपुर इटौरा निवासी अखिलेश द्विवेदी ने बताया कि दो खेतों में पांच और तीन बीघा में तिल की बोआई की थी। लगातार बारिश से फसल खराब हो गई। सर्वे के बाद खसरे में ज्वार दर्ज होने से हैरान हैं। कर्मचारियों ने सही तरीके से सर्वे नहीं किया, जिससे मुआवजे के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।

1500 यूकेलिप्टस के पौधे, रिकॉर्ड में तिल

अकबरपुर इटौरा निवासी श्वेता गुप्ता ने बताया कि उनके खेत में करीब 1500 यूकेलिप्टस के पौधे लगे हैं। इसके बावजूद खसरे और ऑनलाइन रिकॉर्ड में तिल की फसल दर्ज है। अभिलेखों में गलत प्रविष्टि से सरकारी सहायता और मुआवजा मिलने में परेशानी हो रही है।

सात बीघा में बोई तिल, जमीन परती दर्ज

अंडा गांव निवासी रामबाबू पटेल ने बताया कि अंडा मौजे में उनके सात बीघा खेत में तिल की फसल बोई गई थी, लेकिन खसरे में जमीन परती दर्ज कर दी गई। इससे सरकारी सहायता मिलने में दिक्कत आ रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिलने की भी चिंता है।

दस बीघा खेत में भी गड़बड़ी


अंडा गांव निवासी किसान रामजी ने बताया कि उन्होंने दस बीघा खेत में तिल की फसल बोई थी, लेकिन खसरे में लेखपाल ने जमीन परती दर्ज कर दी। गलत प्रविष्टि के कारण सरकारी सहायता मिलने में परेशानी हो रही है। खेत में बोई गई वास्तविक फसल का ब्योरा अभिलेखों में दर्ज किया जाए, ताकि योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।

अप्रैल में भी उठी थी शिकायत

किसानों के अनुसार, फसल सर्वे में अनियमितता का मामला अप्रैल में भी सामने आया था। उस समय भी गलत प्रविष्टियों की शिकायत की गई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। किसानों ने प्रशासन से खसरा और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच कराकर वास्तविक फसल दर्ज करने तथा पात्र किसानों को मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग की है।

सैटेलाइट सर्वे में लोकेशन का अंतर

सर्वे से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि सैटेलाइट के माध्यम से सर्वे किए जाने के कारण लोकेशन में अंतर आया है। वहीं, किसानों का कहना है कि सर्वे में हुई गड़बड़ी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। अब उन्हें प्रशासन से जांच कराने और अभिलेखों में सुधार की उम्मीद है।





वर्जन
कुछ स्थानों में इस तरीके से गड़बड़ी की जानकारी मिली है। इस समस्या का समाधान कराया जा रहा है, इससे किसानों को किसी प्रकार की समस्या न हो। - विनय कुमार मौर्य, एसडीएम।

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।- फोटो : Samvad

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।- फोटो : Samvad

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।- फोटो : Samvad

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।- फोटो : Samvad

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।

फोटो - 10 रामबाबू पटेल।- फोटो : Samvad

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