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Jalaun News: बागवानी करके फलों को बांट देते हैं, इमरान
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आटा। कहते हैं परिश्रम का फल मीठा होता है, लेकिन उस मीठे फल के स्वाद से आई प्रसन्नता को मासूमों के चेहरे से पाने की अनोखी ललक जिले के एक महाविद्यालय के प्रबंधक में देखने को मिली है।
वह दो बीघा में अलग-अलग फलों की बागवानी करते हैं। जब पेड़ों में फल आ जाते हैं तो उन फलों को बच्चों में बांटकर मासूमों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम कर रहे हैं।
बीजापुर मार्ग पर स्थित मोहतरमा जैनब महाविद्यालय के प्रबंधक इमरान अहमद बताते हैं कि उन्हें बागवानी की प्रेरणा कोविड काल से मिली। जब यातायात पूरी तरह से थम गया था और फैक्ट्रियां बंद थी। इससे पर्यावरण की जो तस्वीर सामने आई थी, वह एक शुद्ध और स्पष्ट थी। एक तरफ सुंदर दिखता पर्यावरण था तो दूसरी तरफ तमाम मासूमों की मुस्कान खत्म हो रही थी। कई बच्चों को कोरोना के कारण यतीम होते देखा। उसी दिन से यह सोच लिया था कि पर्यावरण और बच्चों में मुस्कान लाने के लिए कुछ करूंगा। महाविद्यालय का प्रबंधक हूँ।
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इस कार्य में काफी समय जाता है, इसलिए महाविद्यालय परिसर में ही बागवानी की योजना बनाई। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय परिसर में दो बीघा भूमि में फलों के 300 से अधिक पौधों को लगाकर एक बाग तैयार किया। प्रतिदिन चार से पांच घंटे उस वातावरण में रहकर पेड़ों की देखभाल करते हैं। जब वे बड़े होकर फल देते हैं तो उन्हें महाविद्यालय और आसपास के बच्चों को शिक्षा का संकल्प लेकर उन्हें बांट देते हैं।
ग्रीन मैन के नाम से क्षेत्र में पहचान बना चुके इमरान अहमद उन्नाव, लखनऊ, मलिहाबाद, भिवाड़ी राजस्थान, सहारनपुर से पौधे लेकर आए। उनकी बगिया में सुपर भगवा अनार के 11 पेड़, अंजीर के दो छोटी इलायची के चार, बालाजी नींबू के 70 पौधे हैं। इसके साथ ही रेड एप्पल बेर के 70, कंकड़ नींबू, अमरूद ताईबान पिंक के सात, हिसार सफेदा अमरूद के सात, जैतून के दो, सीताफल के तीन, संतरा 35, मौसम्मी के 35, 12 महीने सीजन के आम के पांच पांच और 20 दशहरी के पेड़ हैं। उन्होंने बताया कि वह खुद ही उनकी देखभाल करते हैं, जिससे उनको कोई नुकसान न हो।
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वह दो बीघा में अलग-अलग फलों की बागवानी करते हैं। जब पेड़ों में फल आ जाते हैं तो उन फलों को बच्चों में बांटकर मासूमों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम कर रहे हैं।
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बीजापुर मार्ग पर स्थित मोहतरमा जैनब महाविद्यालय के प्रबंधक इमरान अहमद बताते हैं कि उन्हें बागवानी की प्रेरणा कोविड काल से मिली। जब यातायात पूरी तरह से थम गया था और फैक्ट्रियां बंद थी। इससे पर्यावरण की जो तस्वीर सामने आई थी, वह एक शुद्ध और स्पष्ट थी। एक तरफ सुंदर दिखता पर्यावरण था तो दूसरी तरफ तमाम मासूमों की मुस्कान खत्म हो रही थी। कई बच्चों को कोरोना के कारण यतीम होते देखा। उसी दिन से यह सोच लिया था कि पर्यावरण और बच्चों में मुस्कान लाने के लिए कुछ करूंगा। महाविद्यालय का प्रबंधक हूँ।
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इस कार्य में काफी समय जाता है, इसलिए महाविद्यालय परिसर में ही बागवानी की योजना बनाई। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय परिसर में दो बीघा भूमि में फलों के 300 से अधिक पौधों को लगाकर एक बाग तैयार किया। प्रतिदिन चार से पांच घंटे उस वातावरण में रहकर पेड़ों की देखभाल करते हैं। जब वे बड़े होकर फल देते हैं तो उन्हें महाविद्यालय और आसपास के बच्चों को शिक्षा का संकल्प लेकर उन्हें बांट देते हैं।
ग्रीन मैन के नाम से क्षेत्र में पहचान बना चुके इमरान अहमद उन्नाव, लखनऊ, मलिहाबाद, भिवाड़ी राजस्थान, सहारनपुर से पौधे लेकर आए। उनकी बगिया में सुपर भगवा अनार के 11 पेड़, अंजीर के दो छोटी इलायची के चार, बालाजी नींबू के 70 पौधे हैं। इसके साथ ही रेड एप्पल बेर के 70, कंकड़ नींबू, अमरूद ताईबान पिंक के सात, हिसार सफेदा अमरूद के सात, जैतून के दो, सीताफल के तीन, संतरा 35, मौसम्मी के 35, 12 महीने सीजन के आम के पांच पांच और 20 दशहरी के पेड़ हैं। उन्होंने बताया कि वह खुद ही उनकी देखभाल करते हैं, जिससे उनको कोई नुकसान न हो।