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बीड़ी, सिगरेट की लत न केवल खुद व दूसरे के लिए भी नुकसानदेह
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उरई। स्मोकिंग के खिलाफ जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को नो स्मोकिंग डे मनाया जाता है। इस बार यह दिवस 9 मार्च को मनाया जाएगा। जिला अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण कक्ष के सलाहकार महेश कुमार का कहना है कि इस बार 360 लोगों की काउंसलिंग की गई। इसमें 37 लोगों ने नशे से मुक्ति भी पा ली। तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की जिला सलाहकार तृप्ति यादव का कहना है कि लगातार तंबाकू के खिलाफ जागरूकता को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तंबाकू नियंत्रण कक्ष में आने वाले कुछ मामले इस तरह रहे-
केस.1.
राठ निवासी 25 वर्षीय वाहन चालक को बीते चार वर्षों से सिगरेट लत लग गई थी। रोजाना करीब 20 सिगरेट पी लेता था। दोस्तों ने टोका, छोड़ना भी चाहा लेकिन सिगरेट की लत न छूटी। एक दिन उरई के रिश्तेदारों ने जिला अस्पताल के काउंसलिंग केंद्र में जाने की सलाह दी। वहां 8 सितंबर 2021 को आकर काउसंलिंग कराई। धीरे-धीरे सिगरेट की आदत छूट गई। पिछले पांच महीने से बिल्कुल सिगरेट नहीं पी रहा है और खुद को पहले से ज्यादा स्वस्थ महसूस कर रहा है।
केस.2.
सीएमओ कार्यालय में तैनात चालक सुरेश (46) ने बताया कि पहले वह गुटखा खाता था। दिक्कत होने पर गले का ऑपरेशन हुआ। इसके बाद गुटखा छोड़ दिया और बीड़ी की लत लग गई। रोजाना 20 बीड़ी का सेवन करने लगे। एक दिन जिला अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण कक्ष पहुंचे। 25 सितंबर 2021 से इलाज लिया। अब कोई धूम्रपान नहीं करते हैं।
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केस.3.
इंदिरानगर निवासी 42 वर्षीय मजदूर पिछले 10 साल से बीड़ी का लती था। हर दिन 20 से ज्यादा बीड़ी पी जाता था। इस नशे को लेकर घर में अक्सर कलह होती थी। पांच सदस्यीय परिवार का खर्च दिहाड़ी मजदूरी से चलाना मुश्किल हो गया था। जिला अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण कक्ष में 5 अक्टूबर 2021 को पहुंचे। काउंसलिंग के बाद बीड़ी का सेवन छोड़ दिया।
ठान ले तो लत भी छूट सकती है
एनसीडी के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यह सभी जानते है कि ध्रूमपान नुकसानदेह है। यह मनुष्य के शरीर में हजारों रसायनों को छोड़ता है। इसका असर फेफेड़ों के साथ दिल व शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई सालों से ध्रूमपान करने वालों को नशा छोड़ना मुश्किल हो जाता है। हालांकि यदि मन में ठान लिया जाए तो सिगरेट छोड़ी जा सकती है।
यह नियम अपनाए तो छोड़ सकते हैं स्मोकिंग
-सबसे पहले खुद से वादा करना होगा कि हम सिगरेट छोड़ देंगे।
-ऐसी चीजों से दूर रहे जो आपको स्मोकिंग की याद दिलाए।
-जब सिगरेट या तंबाकू चबाने का मन करें तो दूसरी चीजों में मन लगाए।
-सिगरेट का विकल्प ढूंढ़े। कुछ ऐसी चीजें मुंह में रखे जो नुकसान न करें।
-स्मोकिंग का कारण तनाव होता है। इसलिए खुद को तनावमुक्त रखें।
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केस.1.
राठ निवासी 25 वर्षीय वाहन चालक को बीते चार वर्षों से सिगरेट लत लग गई थी। रोजाना करीब 20 सिगरेट पी लेता था। दोस्तों ने टोका, छोड़ना भी चाहा लेकिन सिगरेट की लत न छूटी। एक दिन उरई के रिश्तेदारों ने जिला अस्पताल के काउंसलिंग केंद्र में जाने की सलाह दी। वहां 8 सितंबर 2021 को आकर काउसंलिंग कराई। धीरे-धीरे सिगरेट की आदत छूट गई। पिछले पांच महीने से बिल्कुल सिगरेट नहीं पी रहा है और खुद को पहले से ज्यादा स्वस्थ महसूस कर रहा है।
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केस.2.
सीएमओ कार्यालय में तैनात चालक सुरेश (46) ने बताया कि पहले वह गुटखा खाता था। दिक्कत होने पर गले का ऑपरेशन हुआ। इसके बाद गुटखा छोड़ दिया और बीड़ी की लत लग गई। रोजाना 20 बीड़ी का सेवन करने लगे। एक दिन जिला अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण कक्ष पहुंचे। 25 सितंबर 2021 से इलाज लिया। अब कोई धूम्रपान नहीं करते हैं।
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केस.3.
इंदिरानगर निवासी 42 वर्षीय मजदूर पिछले 10 साल से बीड़ी का लती था। हर दिन 20 से ज्यादा बीड़ी पी जाता था। इस नशे को लेकर घर में अक्सर कलह होती थी। पांच सदस्यीय परिवार का खर्च दिहाड़ी मजदूरी से चलाना मुश्किल हो गया था। जिला अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण कक्ष में 5 अक्टूबर 2021 को पहुंचे। काउंसलिंग के बाद बीड़ी का सेवन छोड़ दिया।
ठान ले तो लत भी छूट सकती है
एनसीडी के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यह सभी जानते है कि ध्रूमपान नुकसानदेह है। यह मनुष्य के शरीर में हजारों रसायनों को छोड़ता है। इसका असर फेफेड़ों के साथ दिल व शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई सालों से ध्रूमपान करने वालों को नशा छोड़ना मुश्किल हो जाता है। हालांकि यदि मन में ठान लिया जाए तो सिगरेट छोड़ी जा सकती है।
यह नियम अपनाए तो छोड़ सकते हैं स्मोकिंग
-सबसे पहले खुद से वादा करना होगा कि हम सिगरेट छोड़ देंगे।
-ऐसी चीजों से दूर रहे जो आपको स्मोकिंग की याद दिलाए।
-जब सिगरेट या तंबाकू चबाने का मन करें तो दूसरी चीजों में मन लगाए।
-सिगरेट का विकल्प ढूंढ़े। कुछ ऐसी चीजें मुंह में रखे जो नुकसान न करें।
-स्मोकिंग का कारण तनाव होता है। इसलिए खुद को तनावमुक्त रखें।