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स्वास्थ्य सेवाएं चौपट, पब्लिक परेशान
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Mon, 07 Dec 2015 11:39 PM IST
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राजकीय मेडिकल कालेज उरई में हड़ताल के सातवे दिन भी ठेके पर कार्य कर रहे
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स्वीपर, वार्ड ब्वाय और अन्य कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रखीं।
साफ सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता के चलते कालेज प्रशासन ने भी
अस्पताल बंद रखा। इससे सोमवार को भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। इस
दौरान हड़ताली कर्मियों ने अस्पताल प्रबंधन और प्रदेश सरकार के खिलाफ
नारेबाजी भी की।
जालौन का राजकीय मेडिकल कालेज शासन की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। कालेज प्रबंधन की ओर से वित्तीय वर्ष 15-16 के लिए शासन को दवाओं और अन्य सुविधाओं के लिए दो करोड़ का बजट प्रस्ताव भेजा गया था। शासन ने अब तक महज तीन लाख रुपये ही उपलब्ध करवाए हैं। इससे अस्पताल में उपचार समेत अन्य सभी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। कर्मचारियों
को पिछले नौ महीनों से मानदेय तक नहीं मिल पा रहा है जिससे उन्होंने अस्पताल में हड़ताल कर दी है।
गौरतलब है कि राजकीय मेडिकल कालेज में ठेके पर स्वीपर, वार्डब्वाय और गार्ड रखे गए हैं। इन कर्मचारियों को हर्ष इंटर प्राइजेज के माध्यम से रखा गया है। एजेंसी को इस सत्र में शासन से रुपये न मिलने के चलते मेडिकल कालेज में काम कर
रहे सभी 162 कर्मचारियों को नौ माह से मानदेय नहीं दिया गया है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि मेडिकल कालेज समाज कल्याण विभाग के अधीन है। इस कालेज के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा ही रुपये दिए जाते हैं, अब जबकि शासन ने मेडिकल कालेज का बजट पास कर लिया तो समाज कल्याण विभाग ने इस पर अड़ंगा डाल दिया है। इसके चलते कर्मचारियों का मानदेय अटका हुआ है जिसे लेकर अब कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
कर्मचारियों ने की नारेबाजी
सोमवार को ठेके पर कार्य कर रहे कर्मचारियों ने ओपीडी के सामने खड़े होकर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान लवकेश तिवारी, मनोज, अनीता, सुमन, मिथलेश, रंजीत, राहुल, ब्रजेश, देवेंद्र आदि मौजूद रहे।
-मरीजों की संख्या हुई कम
राजकीय मेडिकल कालेज में स्वीपर और वार्डब्वाय के हड़ताल पर चले जाने से मेडिकल कालेज में 30 प्रतिशत मरीजों की संख्या कम हो गई है।
डाक्टर बैठ रहे गंदगी में
राजकीय मेडिकल कालेज की ओपीडी में डाक्टर गंदगी के बीच बैठने को मजबूर है। उसी गंदगी में वह मरीजों का चेकअप कर इलाज कर रहे हैं।
ओपीडी परिसर में फैली गंदगी
राजकीय मेडिकल कालेज की ओपीडी परिसर में पसरी गंदगी के चलते यहां संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।
मेडिकल कालेज में ठेके पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नौ माह से मानदेय न मिलने से वह हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी सूचना एक दिसंबर को कालेज के प्रधानाचार्य को दे दी गई थी।
डॉ. मेजर रणवीर सिंह, सीएमएस
जालौन का राजकीय मेडिकल कालेज शासन की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। कालेज प्रबंधन की ओर से वित्तीय वर्ष 15-16 के लिए शासन को दवाओं और अन्य सुविधाओं के लिए दो करोड़ का बजट प्रस्ताव भेजा गया था। शासन ने अब तक महज तीन लाख रुपये ही उपलब्ध करवाए हैं। इससे अस्पताल में उपचार समेत अन्य सभी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। कर्मचारियों
को पिछले नौ महीनों से मानदेय तक नहीं मिल पा रहा है जिससे उन्होंने अस्पताल में हड़ताल कर दी है।
गौरतलब है कि राजकीय मेडिकल कालेज में ठेके पर स्वीपर, वार्डब्वाय और गार्ड रखे गए हैं। इन कर्मचारियों को हर्ष इंटर प्राइजेज के माध्यम से रखा गया है। एजेंसी को इस सत्र में शासन से रुपये न मिलने के चलते मेडिकल कालेज में काम कर
रहे सभी 162 कर्मचारियों को नौ माह से मानदेय नहीं दिया गया है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि मेडिकल कालेज समाज कल्याण विभाग के अधीन है। इस कालेज के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा ही रुपये दिए जाते हैं, अब जबकि शासन ने मेडिकल कालेज का बजट पास कर लिया तो समाज कल्याण विभाग ने इस पर अड़ंगा डाल दिया है। इसके चलते कर्मचारियों का मानदेय अटका हुआ है जिसे लेकर अब कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
कर्मचारियों ने की नारेबाजी
सोमवार को ठेके पर कार्य कर रहे कर्मचारियों ने ओपीडी के सामने खड़े होकर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान लवकेश तिवारी, मनोज, अनीता, सुमन, मिथलेश, रंजीत, राहुल, ब्रजेश, देवेंद्र आदि मौजूद रहे।
-मरीजों की संख्या हुई कम
राजकीय मेडिकल कालेज में स्वीपर और वार्डब्वाय के हड़ताल पर चले जाने से मेडिकल कालेज में 30 प्रतिशत मरीजों की संख्या कम हो गई है।
डाक्टर बैठ रहे गंदगी में
राजकीय मेडिकल कालेज की ओपीडी में डाक्टर गंदगी के बीच बैठने को मजबूर है। उसी गंदगी में वह मरीजों का चेकअप कर इलाज कर रहे हैं।
ओपीडी परिसर में फैली गंदगी
राजकीय मेडिकल कालेज की ओपीडी परिसर में पसरी गंदगी के चलते यहां संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।
मेडिकल कालेज में ठेके पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नौ माह से मानदेय न मिलने से वह हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी सूचना एक दिसंबर को कालेज के प्रधानाचार्य को दे दी गई थी।
डॉ. मेजर रणवीर सिंह, सीएमएस