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Jalaun News: बुंदेलखंड-चंबल रेल संपर्क को बजट का इंतजार
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जालौन। बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र के बीच प्रस्तावित दो नई रेल लाइनों के निर्माण के लिए बजट आवंटन की मांग तेज हो गई है। समाजसेवी देवीदयाल वर्मा ने रेलमंत्री को पत्र भेजकर महोबा-भिंड और कोंच-फफूंद रेल परियोजनाओं को जल्द शुरू करने का आग्रह किया है। ये परियोजनाएं करीब डेढ़ दशक से अधर में हैं।
देवीदयाल वर्मा ने अपने पत्र में बताया कि तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी ने कोंच-जालौन-औरैया-फफूंद (89.68 किलोमीटर) रेल लाइन को स्वीकृति दी थी। इसके साथ ही महोबा-राठ-चरखारी-उरई-जालौन-बंगरा-माधौगढ़ होते हुए भिंड तक (217 किलोमीटर) रेल लाइन की भी योजना बनी थी। दोनों परियोजनाएं क्षेत्र के विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण हैं। कोंच-फफूंद लाइन की सर्वे रिपोर्ट 29 मार्च 2012 को रेलवे बोर्ड को भेजी गई थी। महोबा-भिंड लाइन की सर्वे रिपोर्ट 10 फरवरी 2014 को रेलवे बोर्ड नई दिल्ली भेजी जा चुकी है। हालांकि, स्वीकृति और सर्वे के बाद भी इनका निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
इन रेल लाइनों के निर्माण की मांग संसद में भी उठती रही है। पूर्व सांसद भानुप्रताप सिंह वर्मा, राज्यसभा सांसद चंद्रकांता और वर्तमान सांसद नारायणदास अहिरवार ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी इन रेल लाइनों के लिए सहमति जताई है। क्षेत्र के पिछड़े इलाकों में विकास और रोजगार के नए रास्ते खोलने के लिए इन परियोजनाओं का जल्द पूरा होना आवश्यक है।
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लोकेशन सर्वे के लिए मिल चुके 5.43 करोड़
समाजसेवी ने बताया कि रेलवे बोर्ड की ओर से लोकेशन सर्वे के लिए 5.43 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और सर्वे का काम चल रहा है। अब असली जरूरत रेल ट्रैक के निर्माण के लिए बजट की है। उन्होंने रेलमंत्री से दोनों परियोजनाओं को बजट में शामिल कर पर्याप्त धनराशि आवंटित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोंच-फफूंद रेल लाइन बनने से जालौन औरैया से बेहतर तरीके से जुड़ सकेगा, जबकि महोबा-भिंड रेल लाइन जालौन को बुंदेलखंड और चंबल के विस्तृत क्षेत्र से जोड़ेगी।
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देवीदयाल वर्मा ने अपने पत्र में बताया कि तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी ने कोंच-जालौन-औरैया-फफूंद (89.68 किलोमीटर) रेल लाइन को स्वीकृति दी थी। इसके साथ ही महोबा-राठ-चरखारी-उरई-जालौन-बंगरा-माधौगढ़ होते हुए भिंड तक (217 किलोमीटर) रेल लाइन की भी योजना बनी थी। दोनों परियोजनाएं क्षेत्र के विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण हैं। कोंच-फफूंद लाइन की सर्वे रिपोर्ट 29 मार्च 2012 को रेलवे बोर्ड को भेजी गई थी। महोबा-भिंड लाइन की सर्वे रिपोर्ट 10 फरवरी 2014 को रेलवे बोर्ड नई दिल्ली भेजी जा चुकी है। हालांकि, स्वीकृति और सर्वे के बाद भी इनका निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
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इन रेल लाइनों के निर्माण की मांग संसद में भी उठती रही है। पूर्व सांसद भानुप्रताप सिंह वर्मा, राज्यसभा सांसद चंद्रकांता और वर्तमान सांसद नारायणदास अहिरवार ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी इन रेल लाइनों के लिए सहमति जताई है। क्षेत्र के पिछड़े इलाकों में विकास और रोजगार के नए रास्ते खोलने के लिए इन परियोजनाओं का जल्द पूरा होना आवश्यक है।
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लोकेशन सर्वे के लिए मिल चुके 5.43 करोड़
समाजसेवी ने बताया कि रेलवे बोर्ड की ओर से लोकेशन सर्वे के लिए 5.43 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और सर्वे का काम चल रहा है। अब असली जरूरत रेल ट्रैक के निर्माण के लिए बजट की है। उन्होंने रेलमंत्री से दोनों परियोजनाओं को बजट में शामिल कर पर्याप्त धनराशि आवंटित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोंच-फफूंद रेल लाइन बनने से जालौन औरैया से बेहतर तरीके से जुड़ सकेगा, जबकि महोबा-भिंड रेल लाइन जालौन को बुंदेलखंड और चंबल के विस्तृत क्षेत्र से जोड़ेगी।