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अब बोल और सुन रही वैष्णवी

Mon, 02 Aug 2021 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 12:00 AM IST
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रबीएसके टीम व अपने माता पिता के साथ वैष्णवी। - फोटो : ORAI
उरई। आरबीएसके ने उसके माता पिता के चेहरें पर खुशियां लौटा दी है। पांच साल की वैष्णवी जन्म से ही गूंगी बहरी थी। इसे लेकर उसके माता-पिता परेशान थे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम के सहयोग से मासूम का निशुल्क आपरेशन कराया। अब वैष्णवी बोलने और सुनने भी लगी है।
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शहर के मोहल्ला सुशील नगर निवासी पेशे के मिस्त्री सुशील कुमार ने बताया कि उनका विवाह नौ साल पहले नीतू से हुआ था। शादी के करीब डेढ़ साल बाद जुड़वा बच्चें हुए। बेटा प्रिंस तो ठीक-ठाक था पर बेटी वैष्णवी जन्म से ही गूंगी बहरी थी। कई डॉक्टरों से सलाह ली तो पता चला कि बेटी को जन्मजात बहरापन (डेफनेस) की बीमारी है। डाक्टरों ने बीमारी के इलाज में लाखों रुपये का खर्चा बताया। उनके पास इतना पैसा नहीं था। दिल्ली के सफदरगंज स्थित अस्पताल में दिखाने गए तो वहां एक बार की जांच में ही 25 हजार रुपये से अधिक खर्च होता था। इसी बीच पत्नी नीतू जालौन सीएचसी गई थी। वहां से उन्हें आरबीएसके टीम का नंबर मिला। उन्होंने आरबीएसके टीम के डॉ मोहसिन से बात की। इसके बाद आरबीएसके में इलाज के लिए बेटी का पंजीकरण कर दिया। तमाम जांचों के बाद बीती 20 जून 2021 को बेटी का कानपुर के मल्होत्रा ईएनटी हास्पिटल में डॉ रोहित मल्होत्रा ने आपरेशन कर दिया। तीन दिन बात जांच के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। अब वैष्णवी बोल और सुन सकती है। डाक्टरों के मुताबिक, धीरे-धीरे स्पीच थैरेपी के माध्यम से वैष्णवी पूरी तरह बोलना और सुनना सीख जाएगी। माता पिता ने आरबीएसके टीम को धन्यवाद दिया।
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50 बीमारियों का इलाज होता है आरबीएसके में
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले 19 साल तक के बच्चों का निशुल्क इलाज कराया जाता है। इसमें जन्मजात बीमारियों के साथ हार्ट संबंधी, कुष्ठ, क्षय रोग, कटे होंठ व तालु, टेढ़े पांव, जन्मजात मोतियाबिंद, कुपोषण समेत पचास प्रकार की बीमारियों का इलाज कराया जाता है। इसके लिए जनपद के सभी नौ ब्लाकों में 18 मोबाइल हेल्थ टीम कार्य कर रही है। जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र के प्रबंधक रवींद्र चौधरी ने बताया कि जन्मजात बीमारियों वाले बच्चों क माता पिता परेशान न हो। यदि वह बीमारी के इलाज के लिए सक्षम नहीं है तो वह सीएमओ कार्यालय स्थित आरबीएसके के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। अपने मोबाइल नंबर 8299724866 पर संपर्क करने को कहा है।
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अब तक 400 बच्चों का हो चुका निशुल्क इलाज
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ एसडी चौधरी बताते है कि आरबीएसके के अंतर्गत अब तक करीब चार सौ बच्चों के माता पिता को आरबीएसके के माध्यम से लाभ दिलाया जा चुका है।
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