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Jalaun News: ओलावृष्टि से टूटा किसानों का भरोसा, बलकट खेती संकट में

Sun, 19 Apr 2026 12:51 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2026 12:51 AM IST
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Hailstorm shatters farmers' confidence, balkat farming in trouble
फोटो -26 गेहूं के खेत में टूटकर ज़मीन पर बिखरी पड़ी बालियां। संवाद
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50 गांवों में फसल चौपट, कर्ज और लागत ने बढ़ाई चिंता

संवाद न्यूज एजेंसी
कुठौंद। ब्लॉक क्षेत्र के करीब 50 गांवों में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सबसे ज्यादा असर नकद जोत (बलकट) करने वाले किसानों पर पड़ा है। फसल बर्बादी के बाद किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं और अब कई किसान बलकट पर खेती छोड़ने का मन बना रहे हैं।
किसानों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा ने महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। गेहूं की तैयार फसल खेतों में ही बर्बाद हो गई जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। लगातार नुकसान और अनिश्चित मौसम के चलते किसानों का खेती से मोहभंग होने लगा है। कई किसान अब वैकल्पिक रोजगार की तलाश में हैं क्योंकि बलकट पर खेती में जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है।
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कर्ज में डूबे किसान, मदद का इंतजार

फोटो -27 दीपू द्विवेदी।
रनधीरपुर निवासी किसान दीपू द्विवेदी ने बताया कि उनके पास 100 बीघा खुद की जमीन है जबकि 30 बीघा उन्होंने बलकट पर ली थी। ओलावृष्टि में पूरी फसल नष्ट हो गई। उन्होंने बताया कि खेती के लिए बैंक से 10 लाख रुपये का कर्ज लिया था जो बीज, खाद और मजदूरी में खर्च हो गया।ऑनलाइन शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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लागत भी नहीं निकल रही
फोटो - 28 अंकित पुरी।
कुठौंद निवासी किसान अंकित पुरी ने बताया कि उन्होंने 40 बीघा जमीन चार लाख रुपये में नगद जोत पर ली थी। इसमें से करीब 15 बीघा फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बाकी फसल की हालत इतनी खराब है कि कटाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार का नुकसान इतना बड़ा है कि आगे खेती करना भी जोखिम भरा लग रहा है।



नगद जोत पर खेती घाटे का सौदा

फोटो -29 भगवान दास पाल।
स्थानीय किसान भगवान दास पाल ने बताया कि उन्होंने 28 बीघा जमीन नगद जोत पर लेकर गेहूं बोया था, लेकिन ओलावृष्टि ने पूरी फसल खराब कर दी। अब लागत निकालना भी मुश्किल है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में नगद जोत पर खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
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