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किसानों पर भारी पड़ रही पूस की रात में रखवाली

Sun, 05 Jan 2020 12:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2020 12:30 AM IST
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Guarding the farmers on the night of Pus
खेत पर लगा गेट दिखाते किसान भगतसिंह - फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद/कदौरा/आटा। पूस की रात में जहां रात का न्यूनतम तापमान 3 और 4 डिग्री के आसपास रहता है, ऐसे में हाथों में लाठी व चार्ट लेकर खेतों में पहरा देना किसानों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। खेत पर ही झोपड़ी बनाकर फसलों की रखवाली करना मजबूरी बना हुआ है। अन्ना मवेशियों का झुंड खेतों के आसपास ही मंडराता रहता है, किसान की जरा सी चूक उसकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है।
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कालपी तहसील के कदौरा, आटा, महेबा, माधौगढ़ तहसील के सरावन, रामपुरा, कोंच के भेड़, डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद, कुसमिलिया, टिमरो आदि गांवों में अन्ना मवेशियों की भरमार है। क्षेत्र में गोशालाएं तो हैं पर उनकी क्षमता इतनी नहीं है कि सभी मवेशियों को रखा जा सके। लिहाजा किसान को भी अपनी मटर, मसूर, चना आदि की फसलों को बचाने के लिए पूरी-पूरी रात जागकर खेतों में पहरा देना पड़ रहा है। पहरा देने वाले अधिकांश किसानों का कहना है कि सर्दी लगने से उनका स्वास्थ्य बिगड़ा हुआ है, फिर भी परिवार पालने के लिए पहरे के अलावा कोई और रास्ता भी तो नहीं है।
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आटा के किसान अजय पांडे का कहना है कि दिन में परिवार के लोग तो रात को उसे पहरा देना पड़ता है। बीच में एक दो बार तबियत भी बिगड़ी तो दवा लेकर काम चला लिया, आखिर मवेशियों से फसल भी तो बचानी है। मुहम्मदाबाद के किसान अमरचंद्र बोले, गोशालाएं मवेशियों के आगे छोटी पड़ गई हैं, जिस कारण जानवर खेतों की ओर दौड़ते हैं। उनसे फसल बचाने के लिए रजाई गद्दे लेकर खेत में बनी झोपड़ी पर लेटना पड़ता है। कदौरा के किसान किशन कुमार कहते हैं कि सर्द रातों में पहरा देना वाकई कष्टकारी है, किया भी क्या जा सकता है। खेत न रखाए तो फसल भी हाथ न लगेगी। हालांकि तबियत बिगड़ती है तो घर बैठ जाते हैं, फिर परिवार का कोई दूसरा सदस्य आ जाता है।
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बता दें कि पिछले पंद्रह दिनों में खेतों पर ही सर्दी लगने से तीन चार किसानों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है। जिला अस्पताल के डॉक्टर राहुल सचान का कहना है कि किसान सर्दी को देखते हुए पहरे के वक्त न सिर्फ गर्म कपड़े व कंबल जरूर रखे, बल्कि आग जलाकर भी बैठें। सीने में दर्द, खासी, बुखार हो तो नजदीक के सीएचसी, पीएचसी जाकर डॉक्टरों की सलाह भी लेते रहे।

खेतों में गेट लगाकर भी हो रही पहरेदारी
मुहम्मदाबाद। कड़ाके की ठंड में रात के वक्त पहरा देने से बचने के लिए कुठौंदा गांव के किसानों ने एक नया तरीका निकाला, जिसमें पांच छह खेतों को मिलाकर उनके बाहर एक लकड़ी का गेट बनाया गया है। अब किसान गेट पर ही ताला डालकर पहरा देते हैं। किसान भगत सिंह के मुताबिक इससे 5-6 खेत मालिकों के बजाए सिर्फ एक या दो को वह भी बारी बारी से पहरा देना होता है, जो कि बहुत जरूरी भी नहीं है। फिर भी ऐतिहातन देना ठीक रहता है। इस तरह बाकी के किसान रोज रोज की सर्दी से बच जाते हैं। किसान गुलाब सिंह, सुरेश, महेंद्र आदि का कहना है कि आखिर कब तक प्रशासन से मदद मिलने का इंतजार करते कुछ तो करना ही था सो भइया अपनी मदद अपने हाथ स्वयं करने का फैसला कर गेट लगाना ही ठीक लगा। वह तो कहेंगे बाकी के गांव के लोग भी कुछ ऐसा ही उपाय करें, जिससे किसानों को इस ठंड में रातें खेतों में न बितानी पड़ें।

किशन

किशन- फोटो : ORAI

अमर चन्द्र राजपूत

अमर चन्द्र राजपूत- फोटो : ORAI

कदौरा में झोपड़ी में बैठकर खेतों की रखवाली करते किसान

कदौरा में झोपड़ी में बैठकर खेतों की रखवाली करते किसान- फोटो : ORAI

किसान अजय

किसान अजय- फोटो : ORAI

मोहम्मदाबाद क्षेत्र के खेत में मड़ैया में रजाई गद्दा डाल कर लेटे किसान हरचटी अहिरबार

मोहम्मदाबाद क्षेत्र के खेत में मड़ैया में रजाई गद्दा डाल कर लेटे किसान हरचटी अहिरबार- फोटो : ORAI

आटा में खेतों पर पहरा देते किसान प्रभु

आटा में खेतों पर पहरा देते किसान प्रभु- फोटो : ORAI

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