{"_id":"67d9c207d6ae0fb61109b7d5","slug":"forest-will-be-developed-in-konch-using-miyawaki-method-orai-news-c-224-1-ori1001-127024-2025-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: कोंच में विकसित होगा मियावाकी पद्धति से वन, तीन साल में हो जाएगा तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: कोंच में विकसित होगा मियावाकी पद्धति से वन, तीन साल में हो जाएगा तैयार
Wed, 19 Mar 2025 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Wed, 19 Mar 2025 12:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उरई। जिले में पहली बार कोंच नगर पालिका की सीमा में मियावाकी पद्धति से वन तैयार किया जाएगा। यह लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा, जिसमें 10 हजार पौधे लगाए जाएंगे। बताया जा रहा कि वन विकसित हो जाने से इसके आसपास ऑक्सीजन का स्तर करीब पांच डिग्री तक बढ़ जाएगा। तापमान में करीब पांच डिग्री की गिरावट आएगी।
वन परियोजना को पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम बताया जा रहा है। 45 लाख रुपये से विकसित किए जाने वाले वन के लिए कोंच नगर पालिका को शासन से 21 लाख रुपये मिल चुके हैं। जल्द ही नगर पालिका इसकी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंप देगी। वन की देखभाल दो वर्षों तक वन विभाग करेगा। इसके बाद वन को नगर पालिका कोंच को सौंप दिया जाएगा।
एसडीओ साजिद अली ने बताया कि मियावाकी पद्धति जापान के वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी ने विकसित की है। इस तकनीक से कम समय में सघन हरित आवरण विकसित किया जा सकता है। इससे पेड़ तेज़ी से बढ़ते हैं और तीन वर्षों में घने जंगल का स्वरूप ले लेते हैं।
विज्ञापन
वन विकसित करने का मकसद जिले के बढ़ने तापमान को कम करना है। अभी गर्मियों में जिले का अधिकतम तापमान 46 डिग्री तक चला जाता है, जबकि न्यूनतम तापमान भी 19 डिग्री तक बना रहता है। इससे गर्मी अधिक पड़ती है। संवाद
वन विभाग के डीएफओ प्रदीप कुमार ने कहा कि वन विकसित करने के बाद इसके आसपास के क्षेत्र में ऑक्सीजन का स्तर 4 से 5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। तापमान में भी कमी आएगी। गर्मी और बारिश के लिए वन उपयोगी साबित होगा। जिले में पहली बार इस तकनीक से वन तैयार किया जा रहा है। इससे नगर पालिका और शहरवासी सीख सकेंगे कि पौधों को कैसे लगाया और किस तरह से संरक्षित किया जाए।
विज्ञापन
वन परियोजना को पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम बताया जा रहा है। 45 लाख रुपये से विकसित किए जाने वाले वन के लिए कोंच नगर पालिका को शासन से 21 लाख रुपये मिल चुके हैं। जल्द ही नगर पालिका इसकी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंप देगी। वन की देखभाल दो वर्षों तक वन विभाग करेगा। इसके बाद वन को नगर पालिका कोंच को सौंप दिया जाएगा।
विज्ञापन
एसडीओ साजिद अली ने बताया कि मियावाकी पद्धति जापान के वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी ने विकसित की है। इस तकनीक से कम समय में सघन हरित आवरण विकसित किया जा सकता है। इससे पेड़ तेज़ी से बढ़ते हैं और तीन वर्षों में घने जंगल का स्वरूप ले लेते हैं।
विज्ञापन
वन विकसित करने का मकसद जिले के बढ़ने तापमान को कम करना है। अभी गर्मियों में जिले का अधिकतम तापमान 46 डिग्री तक चला जाता है, जबकि न्यूनतम तापमान भी 19 डिग्री तक बना रहता है। इससे गर्मी अधिक पड़ती है। संवाद
वन विभाग के डीएफओ प्रदीप कुमार ने कहा कि वन विकसित करने के बाद इसके आसपास के क्षेत्र में ऑक्सीजन का स्तर 4 से 5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। तापमान में भी कमी आएगी। गर्मी और बारिश के लिए वन उपयोगी साबित होगा। जिले में पहली बार इस तकनीक से वन तैयार किया जा रहा है। इससे नगर पालिका और शहरवासी सीख सकेंगे कि पौधों को कैसे लगाया और किस तरह से संरक्षित किया जाए।