{"_id":"5e0a45ca8ebc3e878d5d6f0f","slug":"finger-print-report-will-increase-the-trouble-of-baba-and-the-subinspector-orai-news-knp5353638129","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाबा और दरोगा की मुसीबतें बढ़ाएगी फहिंगर प्रिंट रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाबा और दरोगा की मुसीबतें बढ़ाएगी फहिंगर प्रिंट रिपोर्ट
विज्ञापन
दरोगा राजेंद्र तिवारी
- फोटो : ORAI
उरई/रामपुरा (जालौन)। बाबा और उनके घरवाले भले ही मामले को आत्महत्या बता रहे हों पर रिवाल्वर की फिंगर प्रिंट रिपोर्ट बाबा की मुसीबतें बढ़ा सकती है। पुलिस का कहना है कि मामला आत्महत्या का नहीं है, क्योंकि यदि सुसाइड होता तो रिवाल्वर जमीन पर गिरा पड़ा होता, पुलिस को रिवाल्वर दरोगा के पास मिला है। करीब एक माह के भीतर फिंगर प्रिंट रिपोर्ट भी आ जाएगी, जिससे साफ हो जाएगा कि गोली बाबा के हाथ से चली या फिर दरोगा के हाथ से। वहीं अपर पुलिस अधीक्षक डॉ अवधेश सिंह का कहना है कि कई और जांच रिपोर्ट आना बाकी है, जिससे पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
बता दें कि 26 दिसंबर को निनावली के आश्रम में बाबा मणींद्र महाराज के शिष्य गांव निवासी युवक रविशंकर की हत्या हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने भी पहले बाबा को हत्या के मामले में और फिर दरोगा को साजिश रचने में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बाबा और उसके घरवाले अभी भी यही कह रहे हैं कि युवक की हत्या नहीं हुई बल्कि उसने आत्महत्या की है।
जबकि पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि दरोगा राजेंद्र तिवारी का सर्विस रिवाल्वर वारदात के वक्त जमीन पर गिरा ही नहीं है, यदि गिरा होता तो वह पुलिस को मौके पर पड़ा मिला होता। इतना ही पुलिस ने जब घटनास्थल पर दरोगा से उनका सर्विस रिवाल्वर लिया तो उसमें कहीं कोई मिट्टी या कुछ भी ऐसा निशान नहीं मिला था, जिससे लगे कि वह जमीन पर गिरा होगा, जबकि आत्महत्या के मामले में रिवाल्वर का जमीन पर गिरना तय था। पुलिस को अब रिवाल्वर की फिंगर प्रिंट रिपोर्ट आने का इंतजार है, जिससे साफ हो जाएगा कि गोली किसके हाथ से चली।
विज्ञापन
पत्नी, बच्चों से एसओजी ने लिए बयान
एसओजी टीम ने बाबा की पत्नी व बच्चों से भी बयान लिए, जिसमें सभी के बातें अलग अलग आ रही है, सबसे बड़ी तेरह साल की बेटी का कहना है कि वह तो पीछे झाड़ू लगा रही थी, तभी गोली की आवाज हुई पर उसने ध्यान नहीं दिया। पत्नी का कहना है कि वह बच्चों के साथ टीवी देख रही थी, इस कारण उसे गोली की आवाज सुनाई नहीं दी। बच्चों और पत्नी दोनों के बयान में एक समानता जरूर है कि वे छह माह पहले तक लखनऊ के गोमती नगर में रहते थे।
बाबा की सुरक्षा पर ग्रामीणों के सवाल
चार दिन पहले तक जिस निनावली गांव में एक भी आवाज बाबा के खिलाफ नहीं उठती थी, वहीं के गांव वाले अब सवाल कर रहे हैं कि आखिर कोई तो बताए कि बाबा को दरोगा और सिपाहियों की सुरक्षा मिलती किसके निर्देश पर थी। इस बारे में अधिकारी भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। बता दें कि बाबा के कई बड़े अधिकारियों व सत्ता से जुड़े नेताओं से संबंध थे, जिस कारण भी कोई नहीं बताने को तैयार है कि आदेश कहां से और किससे आते थे। यदि कभी समय पर सुरक्षा नहीं पहुंचती तो थाने में हड़कंप जरूर मच जाता था।
विज्ञापन
बता दें कि 26 दिसंबर को निनावली के आश्रम में बाबा मणींद्र महाराज के शिष्य गांव निवासी युवक रविशंकर की हत्या हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने भी पहले बाबा को हत्या के मामले में और फिर दरोगा को साजिश रचने में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बाबा और उसके घरवाले अभी भी यही कह रहे हैं कि युवक की हत्या नहीं हुई बल्कि उसने आत्महत्या की है।
विज्ञापन
जबकि पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि दरोगा राजेंद्र तिवारी का सर्विस रिवाल्वर वारदात के वक्त जमीन पर गिरा ही नहीं है, यदि गिरा होता तो वह पुलिस को मौके पर पड़ा मिला होता। इतना ही पुलिस ने जब घटनास्थल पर दरोगा से उनका सर्विस रिवाल्वर लिया तो उसमें कहीं कोई मिट्टी या कुछ भी ऐसा निशान नहीं मिला था, जिससे लगे कि वह जमीन पर गिरा होगा, जबकि आत्महत्या के मामले में रिवाल्वर का जमीन पर गिरना तय था। पुलिस को अब रिवाल्वर की फिंगर प्रिंट रिपोर्ट आने का इंतजार है, जिससे साफ हो जाएगा कि गोली किसके हाथ से चली।
विज्ञापन
पत्नी, बच्चों से एसओजी ने लिए बयान
एसओजी टीम ने बाबा की पत्नी व बच्चों से भी बयान लिए, जिसमें सभी के बातें अलग अलग आ रही है, सबसे बड़ी तेरह साल की बेटी का कहना है कि वह तो पीछे झाड़ू लगा रही थी, तभी गोली की आवाज हुई पर उसने ध्यान नहीं दिया। पत्नी का कहना है कि वह बच्चों के साथ टीवी देख रही थी, इस कारण उसे गोली की आवाज सुनाई नहीं दी। बच्चों और पत्नी दोनों के बयान में एक समानता जरूर है कि वे छह माह पहले तक लखनऊ के गोमती नगर में रहते थे।
बाबा की सुरक्षा पर ग्रामीणों के सवाल
चार दिन पहले तक जिस निनावली गांव में एक भी आवाज बाबा के खिलाफ नहीं उठती थी, वहीं के गांव वाले अब सवाल कर रहे हैं कि आखिर कोई तो बताए कि बाबा को दरोगा और सिपाहियों की सुरक्षा मिलती किसके निर्देश पर थी। इस बारे में अधिकारी भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। बता दें कि बाबा के कई बड़े अधिकारियों व सत्ता से जुड़े नेताओं से संबंध थे, जिस कारण भी कोई नहीं बताने को तैयार है कि आदेश कहां से और किससे आते थे। यदि कभी समय पर सुरक्षा नहीं पहुंचती तो थाने में हड़कंप जरूर मच जाता था।

मणींद्र महाराज- फोटो : ORAI