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गिरते जलस्तर से किसान तबाह

Sun, 10 Jan 2016 11:04 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई Updated Sun, 10 Jan 2016 11:04 PM IST
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Farmers devastated by falling water levels
‘बुंदेलखंड की सुनो कहानी, बुंदेलों की बानी में। पानीदार यहां का घोड़ा,
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आग यहां के पानी में।’ आल्हा की ये पंक्तियां अब बीते दिनों की बात हो गई हैं। चार साल के सूखे ने जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा तथा महोबा के पानी में ही आग लगा दी है। जल स्तर प्रतिदिन दो इंच की दर से खिसक रहा है। पानी की कमी ने बुंदेलखंड की आर्थ्क व

सामाजिक व्यवस्था ध्वस्त कर दी है। बुंदेलखंड के पांच जिलों में पानी का अकाल है। किसानों पर इसका सीधा असर पड़ा है। जनपद जालौन के बीहड़ांचलों का आलम यह है कि कई स्थानों पर खेत के बड़े-बड़े हिस्से खाली पड़े हैं। इनमें ऐरी, रमपुरा, सिमिरिया, गुढ़ा, बंधौली ऐसे गांव हैं जहां अधिकांश खेत पानी से वंचित हैं। सूखे के हालातों ने किसानों के

लिए एक बार फिर संकट खड़ा कर दिया हैं। सरकारें भी आश्वासन देकर किसानों को टरका रही हैं। गिने चुने लोगों को मुआवजा देकर किसानों के साथ ठगी की जा रही है।  मुआवजा वितरण में भी किसानों की भूमि संबंधी पत्रावलियां मांगी जाती हैं। जब तक किसान इन्हें देने की तैयारी करता है तब तक योजना में ही बदलाव कर दिया जाता है।

प्रतिदिन गिर रहा जल स्तर
कई वर्षों से बुंदेलखंड में अपेक्षा के अनुरूप बरसात नहीं हुई है। इससे जलस्तर भी तेजी से गिरा है। वहीं सूखे की स्थिति में ट्यूबवेलों से पानी का दोहन भी जलस्तर के नीचे जाने के लिए जिम्मेदार है। वहीं कम बारिश से चेक डैमों में पानी रिजर्व नहीं रखा जा सका। इसके चलते बारिश न होने और सूखे में खेतों को पानी उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। इन स्थितियों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

टेल तक नहीं पहुंचा पानी
समय से पानी न छोड़े जाने और नहरों की सफाई न होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पाया। इससे खेतों को पानी नहीं मिला और वे सूखे पड़े रहे। इसके चलते अधिकांश जगहों पर बुवाई तक नहीं हो पाई। जिन किसानों ने किसी तरह बुवाई कर भी ली उन्हें बाद में पानी की दिक्कत हुई।

बची हुई फसलें भी सूखने की कगार पर
भाकियू जिलाध्यक्ष बृजेश राजपूत के अनुसार गांव रमपुरा, ऐरी की 60 फीसदी और बंधौली प्रधान सुबोध राजपूत के मुताबिक मात्र 10 फीसदी खेत बोए जा सके हैं। इसे लेकर क्षेत्र के राजकुमार, अनंती, खेमचंद्र, देवपाल, राजकिशोर, रामपाल, विनीत, रमशंकर, मइयादीन, गोपाल, हरीशंकर आदि किसानों ने बताया कि जैसे-तैसे किसानों ने फसलों की

बुवाई की थी, अब उनमें पहले पानी की आवश्यकता है। बीहड़ क्षेत्र के ऊंचे-नीचे गांव रमपुरा, ऐरी में सरकारी ट्यूबवेल तीन तथा प्राइवेट ट्यूबवेल भी इतने ही हैं। इसी तरह गांव बंधौली में 4 सरकारी एवं 2 प्राइवेट ट्यूबवेल ही हैं। इनकी हालत भी खस्ता है। इससे बची फसल भी सूखने की कगार पर है। किसानों को जल्द पानी नहीं मिला बची फसल भी सूख जाएगी।

पानी देने का सही समय
गेहूं की बुवाई के लिए उपयुक्त समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक माना गया है। इसी तरह बुवाई के बाद गेहूं को पहला पानी 20 से 25 दिनों के अंदर दिया जाना चाहिए। इसी तरह दूसरा पानी 40 से 45 दिनों में और तीसरा 60 से 65 दिनों में एवं चौथा पानी 80 से 85 दिनों के बाद मिलना चाहिए। यह जानकारी देते ुहए भाकियू के जिलाध्यक्ष किसान बृजेश राजपूत ने बताया कि अगर गेहूं की किस्म हार्ड है तो इसमें एक-दो पानी और बढ़ सकते हैं।
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