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Jalaun News: भीषण आग से उजड़े परिवार, खाने तक को मोहताज हुए लोग
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मुहम्मदाबाद। डकोर विकासखंड के ग्राम कुसमिलिया में रविवार शाम लगी भीषण आग ने कई परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। हालात ऐसे हो गए कि कई परिवारों के सामने खाने तक का संकट खड़ा हो गया। शाम करीब छह बजे गांव की महिलाएं खाना बनाने की तैयारी कर रही थीं, जबकि कुछ घरों में खाना बन चुका था। तभी अचानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। तेज लपटों और धुएं से गांव में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों ने समरसेबल और बाल्टियों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग लगातार फैलती रही। गांव की संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां अंदर तक नहीं पहुंच सकीं, जिससे राहत कार्य में काफी दिक्कत हुई। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोगों के घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और जरूरी दस्तावेज तक जलकर राख हो गए। महिलाओं का कहना है कि उन्हें इतना भी मौका नहीं मिला कि वह कुछ जरूरी सामान भी निकाल पातीं। सूचना पर पहुंची एसडीएम ज्योति सिंह ने राहत कार्य में जुटे ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि गांव में राहत कैंप लगाया जाएगा और सभी प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कोटेदार को निर्देश दिए कि सभी पीड़ित परिवारों को तत्काल खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। एसडीएम ने कहा कि अधिकारी पूरी रात गांव में मौजूद रहेंगे और किसी भी पीड़ित परिवार को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। फिलहाल करीब बीस से अधिक परिवार पंचायत भवन में रात बिताने को मजबूर हैं।
गांव की छोटी गलियों के कारण नहीं पहुंच सकीं दमकल गाड़ियां
कुसमिलिया गांव में लगी भीषण आग के दौरान दमकल विभाग की बड़ी लापरवाही भी सामने आई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां अंदर तक नहीं पहुंच सकीं।शाम करीब छह बजे लगी आग ने देखते ही देखते कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दमकल वाहन समय पर अंदर तक पहुंच जाते तो नुकसान कम हो सकता था।
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हमारी किताबें निकाल लो, मासूम जान्हवी की पुकार ने सबको रुलाया
कुसमिलिया गांव में लगी आग के दौरान एक मासूम बच्ची की बात सुनकर हर कोई भावुक हो गया। आग की लपटों में घिरे घर को देखकर बच्ची जान्हवी लगातार लोगों से कहती रही कि कोई मेरी किताब निकाल लो। ग्रामीणों ने बताया कि बच्ची अपनी पढ़ाई की किताबों को बचाने के लिए रोती रही, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भी घर के अंदर नहीं जा सका। कुछ ही देर में किताबें, कपड़े और घर का पूरा सामान जलकर राख हो गया। गांव में आग से सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ा है। कई परिवारों के सामने अब रहने और खाने की समस्या खड़ी हो गई है।
इलाज का पर्चा भी जल गया,पीड़िता उमा देवी का दर्द
कुसमिलिया गांव में लगी आग से पीड़ित उमा देवी ने रोते हुए बताया कि उनका करीब डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हुआ है। घर में रखा सामान, कपड़े, अनाज और जरूरी कागजात सब कुछ जल गया। उमा देवी ने बताया कि वह लंबे समय से पेट की बीमारी से परेशान हैं और इलाज चल रहा था, लेकिन आग में इलाज का पर्चा तक जल गया। उन्होंने कहा कि “हमारा कोई सहारा नहीं है, अब दोबारा इलाज कैसे होगा।” पीड़ित परिवारों का कहना है कि आग ने उनकी पूरी जिंदगी उजाड़ दी है और अब उन्हें प्रशासन से राहत की उम्मीद है।
सबसे पहले भूरे के घर में लगी आग, आपबीती सुनाते हुए रोया भूरा
मुहम्मदाबाद। गांव में लगी भीषण आग ने बुजुर्ग भूरे सिंह का सब कुछ छीन लिया। रोते हुए उन्होंने बताया कि उनके घर के बगल में काफी गंदगी और झाड़-झंखाड़ पड़ा था। वहीं से निकली चिंगारी उनके घर तक पहुंच गई और पूरा कच्चा मकान जलकर राख हो गया। भूरे सिंह ने बताया कि घर में रखा करीब 10क्विंटल गेहूं, दो बोरी लाही, गृहस्थी का सामान और गैस सिलेंडर सब आग में नष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि अब उनके पास खाने तक के लिए एक रुपया नहीं बचा है। इस दौरान ग्राम प्रधान केके राजपूत ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि शासन से उन्हें मुआवजा दिलाया जाएगा।
आग बुझाते समय झुलसे राममिलन
मुहम्मदाबाद। गांव में लगी भीषण आग को बुझाने के दौरान राममिलन राजपूत झुलस गए। बताया गया कि वह मकान के अंदर घुसकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे थे, तभी जलता हुआ अंगारा उनके ऊपर गिर गया।इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आग बुझाने में जुटे रहे। गांव वालों ने उनकी बहादुरी और सूझबूझ की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया। वहीं सामान उठाने में गांव की ही रामदुलारी भी झुलस गईं। जिनका मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। (संवाद)
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फोटो - 44 आग से जला सामान। संवाद
शॉर्ट सर्किट से दो घरों में लगी आग, लाखों का सामान जलकर राख
मुहम्मदाबाद। डकोर ब्लॉक के बीहड़ क्षेत्र स्थित टीकर गांव में रविवार देर रात शॉर्ट सर्किट से दो मकानों में भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से दोनों परिवारों की गृहस्थी जलकर राख हो गई। ग्रामीणों और दमकल कर्मियों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। घटना में करीब पांच से छह लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। टीकर गांव निवासी पुन्नू केवट और शिवराम केवट के मकानों में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते लपटें इतनी तेज हो गईं कि लोग घरों के पास तक नहीं पहुंच सके। ग्रामीणों ने अपने घरों से पानी लाकर और सबमर्सिबल चलाकर आग बुझाने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची, जिसके बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
पीड़ित पुन्नू केवट ने बताया कि परिवार के लोग रात में सो रहे थे, तभी घर में आग दिखाई दी। जब तक लोग सामान निकालने पहुंचे, तब तक पूरा मकान आग की चपेट में आ चुका था। उन्होंने बताया कि रविवार को ही मटर बेचकर लाए गए 44 हजार रुपये घर में रखे थे, जो आग में जल गए। इसके अलावा जेवर, अनाज, गृहस्थी का सामान, कूलर, पंखे और अन्य घरेलू सामान भी राख हो गया। अब परिवार के पास न रहने के लिए छत बची है और न ही खाने-पीने का सामान। वहीं शिवराम केवट के घर में रखा गेहूं, बर्तन और अन्य सामान भी पूरी तरह जल गया। आग लगने के बाद दोनों परिवारों के सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। (संवाद)
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ग्रामीणों ने समरसेबल और बाल्टियों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग लगातार फैलती रही। गांव की संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां अंदर तक नहीं पहुंच सकीं, जिससे राहत कार्य में काफी दिक्कत हुई। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोगों के घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और जरूरी दस्तावेज तक जलकर राख हो गए। महिलाओं का कहना है कि उन्हें इतना भी मौका नहीं मिला कि वह कुछ जरूरी सामान भी निकाल पातीं। सूचना पर पहुंची एसडीएम ज्योति सिंह ने राहत कार्य में जुटे ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि गांव में राहत कैंप लगाया जाएगा और सभी प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कोटेदार को निर्देश दिए कि सभी पीड़ित परिवारों को तत्काल खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। एसडीएम ने कहा कि अधिकारी पूरी रात गांव में मौजूद रहेंगे और किसी भी पीड़ित परिवार को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। फिलहाल करीब बीस से अधिक परिवार पंचायत भवन में रात बिताने को मजबूर हैं।
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गांव की छोटी गलियों के कारण नहीं पहुंच सकीं दमकल गाड़ियां
कुसमिलिया गांव में लगी भीषण आग के दौरान दमकल विभाग की बड़ी लापरवाही भी सामने आई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां अंदर तक नहीं पहुंच सकीं।शाम करीब छह बजे लगी आग ने देखते ही देखते कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दमकल वाहन समय पर अंदर तक पहुंच जाते तो नुकसान कम हो सकता था।
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हमारी किताबें निकाल लो, मासूम जान्हवी की पुकार ने सबको रुलाया
कुसमिलिया गांव में लगी आग के दौरान एक मासूम बच्ची की बात सुनकर हर कोई भावुक हो गया। आग की लपटों में घिरे घर को देखकर बच्ची जान्हवी लगातार लोगों से कहती रही कि कोई मेरी किताब निकाल लो। ग्रामीणों ने बताया कि बच्ची अपनी पढ़ाई की किताबों को बचाने के लिए रोती रही, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भी घर के अंदर नहीं जा सका। कुछ ही देर में किताबें, कपड़े और घर का पूरा सामान जलकर राख हो गया। गांव में आग से सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ा है। कई परिवारों के सामने अब रहने और खाने की समस्या खड़ी हो गई है।
इलाज का पर्चा भी जल गया,पीड़िता उमा देवी का दर्द
कुसमिलिया गांव में लगी आग से पीड़ित उमा देवी ने रोते हुए बताया कि उनका करीब डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हुआ है। घर में रखा सामान, कपड़े, अनाज और जरूरी कागजात सब कुछ जल गया। उमा देवी ने बताया कि वह लंबे समय से पेट की बीमारी से परेशान हैं और इलाज चल रहा था, लेकिन आग में इलाज का पर्चा तक जल गया। उन्होंने कहा कि “हमारा कोई सहारा नहीं है, अब दोबारा इलाज कैसे होगा।” पीड़ित परिवारों का कहना है कि आग ने उनकी पूरी जिंदगी उजाड़ दी है और अब उन्हें प्रशासन से राहत की उम्मीद है।
सबसे पहले भूरे के घर में लगी आग, आपबीती सुनाते हुए रोया भूरा
मुहम्मदाबाद। गांव में लगी भीषण आग ने बुजुर्ग भूरे सिंह का सब कुछ छीन लिया। रोते हुए उन्होंने बताया कि उनके घर के बगल में काफी गंदगी और झाड़-झंखाड़ पड़ा था। वहीं से निकली चिंगारी उनके घर तक पहुंच गई और पूरा कच्चा मकान जलकर राख हो गया। भूरे सिंह ने बताया कि घर में रखा करीब 10क्विंटल गेहूं, दो बोरी लाही, गृहस्थी का सामान और गैस सिलेंडर सब आग में नष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि अब उनके पास खाने तक के लिए एक रुपया नहीं बचा है। इस दौरान ग्राम प्रधान केके राजपूत ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि शासन से उन्हें मुआवजा दिलाया जाएगा।
आग बुझाते समय झुलसे राममिलन
मुहम्मदाबाद। गांव में लगी भीषण आग को बुझाने के दौरान राममिलन राजपूत झुलस गए। बताया गया कि वह मकान के अंदर घुसकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे थे, तभी जलता हुआ अंगारा उनके ऊपर गिर गया।इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आग बुझाने में जुटे रहे। गांव वालों ने उनकी बहादुरी और सूझबूझ की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया। वहीं सामान उठाने में गांव की ही रामदुलारी भी झुलस गईं। जिनका मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। (संवाद)
फोटो - 44 आग से जला सामान। संवाद
शॉर्ट सर्किट से दो घरों में लगी आग, लाखों का सामान जलकर राख
मुहम्मदाबाद। डकोर ब्लॉक के बीहड़ क्षेत्र स्थित टीकर गांव में रविवार देर रात शॉर्ट सर्किट से दो मकानों में भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से दोनों परिवारों की गृहस्थी जलकर राख हो गई। ग्रामीणों और दमकल कर्मियों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। घटना में करीब पांच से छह लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। टीकर गांव निवासी पुन्नू केवट और शिवराम केवट के मकानों में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते लपटें इतनी तेज हो गईं कि लोग घरों के पास तक नहीं पहुंच सके। ग्रामीणों ने अपने घरों से पानी लाकर और सबमर्सिबल चलाकर आग बुझाने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची, जिसके बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
पीड़ित पुन्नू केवट ने बताया कि परिवार के लोग रात में सो रहे थे, तभी घर में आग दिखाई दी। जब तक लोग सामान निकालने पहुंचे, तब तक पूरा मकान आग की चपेट में आ चुका था। उन्होंने बताया कि रविवार को ही मटर बेचकर लाए गए 44 हजार रुपये घर में रखे थे, जो आग में जल गए। इसके अलावा जेवर, अनाज, गृहस्थी का सामान, कूलर, पंखे और अन्य घरेलू सामान भी राख हो गया। अब परिवार के पास न रहने के लिए छत बची है और न ही खाने-पीने का सामान। वहीं शिवराम केवट के घर में रखा गेहूं, बर्तन और अन्य सामान भी पूरी तरह जल गया। आग लगने के बाद दोनों परिवारों के सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। (संवाद)