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Jalaun News: लाखों खर्च के बाद भी घंटाघर की घड़ी नहीं बताती सही वक्त

Mon, 01 Apr 2024 06:54 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Mon, 01 Apr 2024 06:54 AM IST
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Even after spending lakhs the clock of the clock tower does not tell the correct time
उरई। अंग्रेजों के जमाने से शहर के लोगों को वक्त बताने वाले घंटाघर के घड़ी की सुई पिछले कई वर्षों से बंद पडी है। शहर की पहचान बताने वाले घंटाघर की घड़ी काफी लंबे समय से शहर का गौरव रही है। लेकिन घड़ी आज कल से नहीं कई सालों से समय गलत बता रही है। जबकि कई बार निर्माण और सुंदरीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं।
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शहर के घंटाघर का इतिहास तो काफी पुराना है। लेकिन ऊपर तल का निर्माण करीब पांच साल पहले हुआ था। इसमें करीब 65 लाख की लागत आई थी। उस वक्त ऊपरी तल पर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी पुस्तकालय एवं वाचनालय का निर्माण हुआ था। फिलहाल कुछ समय बाद बंद हो गया था। उस समय सबसे ऊपर लगी घड़ी को ठीक किया गया था। जो समय बताने के साथ हर घंटे पर आवाज भी करती थी। थोड़ी दिन बाद आवाज बंद हो गई। दो महीने बाद गलत समय बताने लगी। उसके बाद इसको सही नहीं किया गया।
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छह महीने पहले फिर से इसके सुंदरीकरण के लिए पालिका ने काम शुरू कराया। इसके लिए करीब 16 लाख के बजट को खर्च किया गया। लेकिन जो काम होना था। वह तो नहीं हुए जो नहीं होने थे। उन्हें करा दिया गया। सीढ़ी होने के बाद भी उन्हें तोड़कर लोहे की नई सीढ़ी लगवा दी। इसका विरोध भी हुआ था। उच्च अधिकारियों के पास शिकायत भी गई थी। सुंदरीकरण में सभी काम हुए लेकिन चारों तरफ लगी घड़ियों को ठीक नहीं किया गया। पांच साल सही समय का इंतजार रही घड़ी को फिर निराशा हाथ लगी। आज भी घड़ियां गलत समय बताती हैं। वहीं, ईओ गिरिश चंद्र ने बताया कि इसको लेकर जानकारी नहीं है। इसको जल्द दिखवाकर सही कराई जाएगी।
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लोगों ने बताया इतिहास
रामराजा ने बताया कि करीब 1965 में इस स्थान पर कुआं था। इसके बाद यहां पर घंटाघर का निर्माण हुआ। जिसमें नीचे तल पर दुकानें भी बनाई गई थीं। घड़ी और आवाज आने से बाजार में रौनक थी। अब कई साल से बंद पड़ी है। सूरज वर्मा ने बताया कि जब से घड़ी लगी हुई हैं। तब से अभी तक सही समय नहीं बताया है। दो तीन महीने तो घड़ी ठीक चली। लेकिन उसके बाद खराब हो गईं। तब से अभी तक ठीक ही नहीं हुई हैं। जबकि लाखों रुपये खर्च हो गए।


वर्जन-
घंटाघर की घड़ी कई सालों से खराब है। अभी सुंदरीकरण की वजह से घड़ीं नहीं बदली जा सकी हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद चारों घड़ियों को बदला जाएगा। -गिरिजा चौधरी, पालिकाध्यक्ष, उरई
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