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Jalaun News: पांच दिन बाद भी बोहनी को तरस रहे दो खरीद केंद्र
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जालौन। जिले में गेहूं की खरीद तेज करने के लिए विपणन विभाग भले जोर लगा रहा हो लेकिन केंद्र खुले हुए पांच दिन बीत चुके है अभी तक केंद्रों पर गेंहू खरीद शुरू तक नहीं हो सकी है।
इस बार सरकार ने गेंहू खरीद का समर्थन मूल्य पिछले वर्ष की अपेक्षा 110 रुपये बढ़ाकर 2125 रुपये किया है। एक अप्रैल से नवीन गल्ला मंडी परिसर में गेंहू खरीद के लिए 16 केंद्र खोले गए हैं। मंडी में गेंहू खरीद का मूल्य 1960 रुपये होने के बाद भी किसान सरकारी गेंहू खरीद केंद्र पर नहीं पहुंच रहे हैं। किसान रामशंकर सुढ़ार ने बताया कि जिन किसानों के पास खुद की जमीन कम है वह इसे पूरा करने के लिए बलकट पर खेती जोत लेते हैं। किसान के पास खुद की जमीन के एवज में ही गेंहू खरीद की जानी है। ऐसे में केंद्र पर जाने से क्या फायदा होगा। किसान जहां बलकट की फसल बेचेंगे वहीं अपनी खेती की भी फसल बेचेंगे। व्यापारियों के यहां बेचने पर पूरी सुविधा और नकद रुपये मिल रहे हैं तो सरकारी क्रय केंद्रों पर जाकर तमाम उलझनों में क्यों पड़ें। मंडी सचिव वीरेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों का माल केंद्र पर नहीं आ रहा है।
किसान अनिल सिंह सिरसा दोगढ़ी ने बताया कि सरकारी गेंहू क्रय केंद्र पर फसल बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और एसडीएम की ओर से सत्यापन कराया जाता है। इतने झंझट में कौन पड़ना चाहेगा। इससे बचने के लिए किसानों को व्यापारी को ही गेंहू बेचना उचित लग रहा है।
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किसान अश्वनी गुपलापुर ने बताया कि केंद्र पर पहुंचने पर तुलाई, छनाई आदि का नुकसान होता था। भुगतान भी देरी से मिलता है। परेशान किसानों को रुपयों की तत्काल आवश्यकता रहती है। व्यापारी के पास से तत्काल भुगतान मिल जाता है जिससे उन्हें मजदूरों को देने में आसानी रहती है।
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इस बार सरकार ने गेंहू खरीद का समर्थन मूल्य पिछले वर्ष की अपेक्षा 110 रुपये बढ़ाकर 2125 रुपये किया है। एक अप्रैल से नवीन गल्ला मंडी परिसर में गेंहू खरीद के लिए 16 केंद्र खोले गए हैं। मंडी में गेंहू खरीद का मूल्य 1960 रुपये होने के बाद भी किसान सरकारी गेंहू खरीद केंद्र पर नहीं पहुंच रहे हैं। किसान रामशंकर सुढ़ार ने बताया कि जिन किसानों के पास खुद की जमीन कम है वह इसे पूरा करने के लिए बलकट पर खेती जोत लेते हैं। किसान के पास खुद की जमीन के एवज में ही गेंहू खरीद की जानी है। ऐसे में केंद्र पर जाने से क्या फायदा होगा। किसान जहां बलकट की फसल बेचेंगे वहीं अपनी खेती की भी फसल बेचेंगे। व्यापारियों के यहां बेचने पर पूरी सुविधा और नकद रुपये मिल रहे हैं तो सरकारी क्रय केंद्रों पर जाकर तमाम उलझनों में क्यों पड़ें। मंडी सचिव वीरेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों का माल केंद्र पर नहीं आ रहा है।
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किसान अनिल सिंह सिरसा दोगढ़ी ने बताया कि सरकारी गेंहू क्रय केंद्र पर फसल बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और एसडीएम की ओर से सत्यापन कराया जाता है। इतने झंझट में कौन पड़ना चाहेगा। इससे बचने के लिए किसानों को व्यापारी को ही गेंहू बेचना उचित लग रहा है।
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किसान अश्वनी गुपलापुर ने बताया कि केंद्र पर पहुंचने पर तुलाई, छनाई आदि का नुकसान होता था। भुगतान भी देरी से मिलता है। परेशान किसानों को रुपयों की तत्काल आवश्यकता रहती है। व्यापारी के पास से तत्काल भुगतान मिल जाता है जिससे उन्हें मजदूरों को देने में आसानी रहती है।