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‘शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की जरूरत’
अमर उजाला ब्यूरो जालौन
Updated Sat, 17 Oct 2015 12:18 AM IST
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कालपी कालेज में शुक्रवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से ‘विश्वविद्यालयों में सुधार एवं कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा’ विषयक पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. मृत्युंजय सिंह की अध्यक्षता में हुई संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति को सरल बनाने के लिए रणनीति पर विचार मंथन किया गया।
संगोष्ठी मेें मुख्य अतिथि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी पूरनलाल वर्मा ने कहा कि बुनियादी शिक्षा कमजोर होने से उच्च शिक्षा का माहौल बेहतर नहीं बन पाता। इसलिए प्रत्येक छात्र के लिए प्राथमिक स्तर पर ही सही एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने की पहल शुरू होनी चाहिए।
इसके अलावा आज बुनियादी शिक्षा के साथ ही साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. म़ृत्युंजय सिंह ने कहा कि रोजगार के साधन सृजित करने के लिए वर्तमान उच्च शिक्षा पद्धति उपयोगी नहीं है।
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इसके सरलीकरण की आवश्यकता है ताकि लोगों को रोजगार परक बनाया जा सके और लोगों को रोजगार मिले। नई शिक्षा नीति में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं एवं शिक्षाविदों की सलाह से नई शिक्षानीति को बढ़ावा दिया जाए।
अनुशासन अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पाल सिंह ने कहा कि शिक्षा में नैतिक आदर्शों का समावेश नई शिक्षा नीति में शामिल किया जाना आवश्यक है। वरिष्ठ प्राध्यापक मधु प्रभा त्रिपाठी ने कहा कि कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को लागू किया जाए।
वहीं, डॉ. सुधा गुप्त ने कहा कि नई शिक्षा मेें तकनीकी एवं सामाजिक क्रिया कलापों से संबंधित विषय सामग्री का अध्ययन सामग्री को नई शिक्षा नीति में जोड़ा जाए। इस मौके पर डॉ. सोमचंद्र चौहान, वीरेंद्र शर्मा, राधा रानी, विनीत चतुर्वेदी, कीर्ति पुरवार, पंकज द्विवेदी, नीता, आसिफ खान, रवि मिश्रा, लक्ष्मी ओझा, प्रियंका शर्मा आदि मौजूद रहीं।
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संगोष्ठी मेें मुख्य अतिथि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी पूरनलाल वर्मा ने कहा कि बुनियादी शिक्षा कमजोर होने से उच्च शिक्षा का माहौल बेहतर नहीं बन पाता। इसलिए प्रत्येक छात्र के लिए प्राथमिक स्तर पर ही सही एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने की पहल शुरू होनी चाहिए।
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इसके अलावा आज बुनियादी शिक्षा के साथ ही साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. म़ृत्युंजय सिंह ने कहा कि रोजगार के साधन सृजित करने के लिए वर्तमान उच्च शिक्षा पद्धति उपयोगी नहीं है।
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इसके सरलीकरण की आवश्यकता है ताकि लोगों को रोजगार परक बनाया जा सके और लोगों को रोजगार मिले। नई शिक्षा नीति में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं एवं शिक्षाविदों की सलाह से नई शिक्षानीति को बढ़ावा दिया जाए।
अनुशासन अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पाल सिंह ने कहा कि शिक्षा में नैतिक आदर्शों का समावेश नई शिक्षा नीति में शामिल किया जाना आवश्यक है। वरिष्ठ प्राध्यापक मधु प्रभा त्रिपाठी ने कहा कि कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को लागू किया जाए।
वहीं, डॉ. सुधा गुप्त ने कहा कि नई शिक्षा मेें तकनीकी एवं सामाजिक क्रिया कलापों से संबंधित विषय सामग्री का अध्ययन सामग्री को नई शिक्षा नीति में जोड़ा जाए। इस मौके पर डॉ. सोमचंद्र चौहान, वीरेंद्र शर्मा, राधा रानी, विनीत चतुर्वेदी, कीर्ति पुरवार, पंकज द्विवेदी, नीता, आसिफ खान, रवि मिश्रा, लक्ष्मी ओझा, प्रियंका शर्मा आदि मौजूद रहीं।