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Jalaun News: औषधि निरीक्षक पर लाइसेंस के नाम पर एक लाख रुपये मांगने का आरोप
Tue, 21 May 2024 01:33 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Tue, 21 May 2024 01:33 AM IST
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उन्नाव। एक महिला ने औषधि निरीक्षक पर दवा बिक्री लाइसेंस जारी करने के नाम पर एक लाख रुपये घूस मांगने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री पोर्टल और डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में बताया है कि मांग पूरी करने पर आवेदन निरस्त कर दिया।
शुक्लागंज के ऋषि नगर निवासी ज्योति तिवारी व गायत्री नगर के प्रबल अवस्थी ने मुख्यमंत्री पोर्टल और डीएम को अलग-अलग शिकायती पत्र दिया है। ज्योति के मुताबिक, उन्होंने होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। औषधि निरीक्षक अशोक कुमार मौके पर गए थे और सारे अभिलेख सही मिलने पर लाइसेंस पास होने की सहमति जताई थी। आरोप है कि ड्रग इंस्पेक्टर के कहने पर उनसे ऑफिस मिलने गए तो लाइसेंस जारी करने के लिए रुपयों की मांग की। असमर्थता जाहिर करने पर बिना कोई कारण लिखे लाइसेंस आवेदन निरस्त कर दिया।
वहीं, प्रबल अवस्थी का आरोप है कि एक रिटेल और होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। रिटेल के लिए 30 हजार और होलसेल के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई और न देने पर आवेदन निरस्त कर दिया। आरोप है कि आवेदन में मांगे गए प्रमाण पत्रों में ओनरशिप प्रूफ के तौर पर हाउस टैक्स की रसीद दिखाई। जिसे पिछले साल जमा किया गया था। निरीक्षक ने उसे पुराना बताकर मानने से मना कर दिया। इसके बाद भवन की रजिस्ट्री दिखाई तो उसे भी अमान्य बता दिया।
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हालांकि औषधि निरीक्षक अशोक कुमार ने आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि अभिलेखों की कमी के कारण आवेदन निरस्त किए थे। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि अस्वस्थ होने के कारण डाॅक्टर ने आराम करने की सलाह दी है। इसलिए अभी कार्य पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पा रहा हूं। शिकायती पत्र आया होगा तो जांच कराएंगे।
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शुक्लागंज के ऋषि नगर निवासी ज्योति तिवारी व गायत्री नगर के प्रबल अवस्थी ने मुख्यमंत्री पोर्टल और डीएम को अलग-अलग शिकायती पत्र दिया है। ज्योति के मुताबिक, उन्होंने होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। औषधि निरीक्षक अशोक कुमार मौके पर गए थे और सारे अभिलेख सही मिलने पर लाइसेंस पास होने की सहमति जताई थी। आरोप है कि ड्रग इंस्पेक्टर के कहने पर उनसे ऑफिस मिलने गए तो लाइसेंस जारी करने के लिए रुपयों की मांग की। असमर्थता जाहिर करने पर बिना कोई कारण लिखे लाइसेंस आवेदन निरस्त कर दिया।
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वहीं, प्रबल अवस्थी का आरोप है कि एक रिटेल और होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। रिटेल के लिए 30 हजार और होलसेल के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई और न देने पर आवेदन निरस्त कर दिया। आरोप है कि आवेदन में मांगे गए प्रमाण पत्रों में ओनरशिप प्रूफ के तौर पर हाउस टैक्स की रसीद दिखाई। जिसे पिछले साल जमा किया गया था। निरीक्षक ने उसे पुराना बताकर मानने से मना कर दिया। इसके बाद भवन की रजिस्ट्री दिखाई तो उसे भी अमान्य बता दिया।
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हालांकि औषधि निरीक्षक अशोक कुमार ने आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि अभिलेखों की कमी के कारण आवेदन निरस्त किए थे। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि अस्वस्थ होने के कारण डाॅक्टर ने आराम करने की सलाह दी है। इसलिए अभी कार्य पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पा रहा हूं। शिकायती पत्र आया होगा तो जांच कराएंगे।