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बेटे का शव न मिलने की आस टूटी, मदद भी नहीं मिली
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उरई। कालपी स्थित यमुना नदी में नाव पलटने से डूबे चार युवकों में से तीन के शव तो मिल गए। पर आठ दिन बीतने के बाद भी चौथे डूबे युवक तौहीद का कुछ पता नहीं चला। तौहीद के परिजनों ने तो आस भी छोड़ दी है। नाते रिश्तेदारों का कहना है कि शव नहीं मिला। इस कारण प्रशासन और सरकार से भी कोई मदद नहीं मिल रही है।
बता दें कि बीते शनिवार कालपी स्थित यमुना नदी में बाढ़ के दौरान 6 युवक नाव पर सवार थे। तभी नाव पलटने से वे सभी यमुना में डूब गए दो युवकों को बचा लिया गया था। जबकि चार युवक डूब गए थे। जिसमेें तीन युवकों के शव तो मिल गए। पर शहर के करसान रोड निवासी तौहीद रहमानी का अभी तक कोई पता नहीं चला है। परिजनों ने पांच दिन तक एनडीआरएफ, सेना व गोताखोरों की मदद से नदी में खोज कराई। पर शव न मिलने पर निराश परिजनों ने गुरुवार को उसका तीजा (अंतिम संस्कार) भी कर दिया। पिता अबसारुल हक व माता शाहीना बेगम का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि अब उन्हें कोई उम्मीद नहीं बची है। वहीं पत्नी शामीन नाज व बेटी असमीन फातिमा व नवीहा भी पिता की तस्वीर देख देखकर रो रही है। पिता ने बताया कि वे रिटायर्ड शिक्षक है। उसके तीन पुत्र थे। जिसमें तौहीद सबसे बड़ा था और एसी रिपेयरिंग करके परिवार का भरम पोषण करता था। उसके दो छोटे भाई तनवीर, तौकीर भी है। उनका कहना है कि प्रशासन ने खोजबीन में तो पूरा सहयोग किया है लेकिन उन्हें सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।
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बता दें कि बीते शनिवार कालपी स्थित यमुना नदी में बाढ़ के दौरान 6 युवक नाव पर सवार थे। तभी नाव पलटने से वे सभी यमुना में डूब गए दो युवकों को बचा लिया गया था। जबकि चार युवक डूब गए थे। जिसमेें तीन युवकों के शव तो मिल गए। पर शहर के करसान रोड निवासी तौहीद रहमानी का अभी तक कोई पता नहीं चला है। परिजनों ने पांच दिन तक एनडीआरएफ, सेना व गोताखोरों की मदद से नदी में खोज कराई। पर शव न मिलने पर निराश परिजनों ने गुरुवार को उसका तीजा (अंतिम संस्कार) भी कर दिया। पिता अबसारुल हक व माता शाहीना बेगम का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि अब उन्हें कोई उम्मीद नहीं बची है। वहीं पत्नी शामीन नाज व बेटी असमीन फातिमा व नवीहा भी पिता की तस्वीर देख देखकर रो रही है। पिता ने बताया कि वे रिटायर्ड शिक्षक है। उसके तीन पुत्र थे। जिसमें तौहीद सबसे बड़ा था और एसी रिपेयरिंग करके परिवार का भरम पोषण करता था। उसके दो छोटे भाई तनवीर, तौकीर भी है। उनका कहना है कि प्रशासन ने खोजबीन में तो पूरा सहयोग किया है लेकिन उन्हें सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।
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